क्यों रवींद्र जडेजा और प्रभात जयसूर्या से अलग है मानव सुथार, पैरों के ‘पिवटिंग’ से डाल रहे है गॉल टेस्ट में बड़ा फर्क

नई दिल्ली. जब गेंद हवा में सरसराहट के साथ नाचती नजर आए और फिर पिच पर गिरे तो उसके घुमाव से बल्लेबाजों का दिमाग घूम जाए तो एक बात साफ समझ लेना चाहिए कि कोई अपनी उंगलियों, कलाई कंधा और कमर के साथ क्रीज पर शानदार तरीके से पिवट कर रहा है तभी वो इतना असरदार नजर आ रहा है. गॉल की पिच पर मानव सुथार का शानदार टर्न इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि पारंपरिक गेंदबाजी में थोड़ा सा तकनीकी बदलाव भी खेल को पूरी तरह बदल सकता है.
श्रीलंका के गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम की स्पिन-अनुकूल पिच पर भारतीय युवा स्पिनर मानव सुथार ने गेंद को हवा में जिस तरह से नचाया, उसने सभी को हैरान कर दिया। हालांकि इस मैच में प्रभात जयसूर्या और रवींद्र जडेजा जैसे दुनिया के दिग्गज और स्थापित बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स स्पिनर भी खेल रहे थे, लेकिन सुथार के एक्शन ने उन्हें एक अलग ही धार दी. तीनों गेंदबाज पारंपरिक बाएं हाथ के स्पिनर हैं, लेकिन गेंद को रिलीज करने का तरीका, शरीर का झुकाव और उंगलियों का इस्तेमाल तीनों को एक-दूसरे से बिल्कुल अलग और अनोखा बनाता है.
मानव सुथार: ‘ओवर स्पिन’ और हाई-आर्म एक्शन का जादू
गॉल के मैदान पर मानव सुथार को जयसूर्या और जडेजा के मुकाबले काफी ज्यादा टर्न और उछाल मिल रहा है. इसका मुख्य कारण उनका हाई-आर्म रिलीजहै. गेंदबाजी करते समय सुथार का हाथ उनके कान के बिल्कुल पास से ऊपर की तरफ आता है. इस वर्टिकल एक्शन के कारण वो गेंद पर ‘ओवर स्पिन’करा पाते हैं. ओवर स्पिन में गेंद हवा में आगे की तरफ घूमने के बजाय नीचे की ओर तेजी से गिरती है (Dip होती है). पिच पर टप्पा खाने के बाद गेंद को एक्स्ट्रा बाउंस मिलता है, जिससे बल्लेबाज चकमा खा जाता है. हवा में गेंद के घूमने (Revolutions) के कारण उन्हें गॉल की सूखी पिच से बाकी दोनों गेंदबाजों के मुकाबले कहीं ज्यादा शार्प और खतरनाक घुमाव मिल रहा है.
प्रभात जयसूर्या: गॉल के राजा और सटीकता का नाम
श्रीलंका के प्रभात जयसूर्या गॉल के मैदान के सबसे सफल गेंदबाजों में से एक हैं, लेकिन उनकी ताकत मानव सुथार जैसी भारी-भरकम टर्न नहीं, बल्कि ‘अंडर स्पिन’ और क्रीज का इस्तेमाल है. जयसूर्या का बॉलिंग हैंड कान से थोड़ा दूर रहता है. वो गेंद को उंगलियों से रगड़ने के बजाय थोड़ा पीछे से धकेलते हैं, जिसे अंडर स्पिन या स्लाइडर इफेक्ट कहा जाता है. गॉल की पिच पर उनकी गेंदें टप्पा खाकर ज्यादा उछलने के बजाय नीची रहती हैं और तेजी से अंदर या बाहर निकलती हैं. वो लगातार एक ही टप्पे पर गेंदबाजी करके बल्लेबाज के धैर्य की परीक्षा लेते हैं और विकेट चटकाते हैं.
रवींद्र जडेजा: गति का मिश्रण और ‘नेचुरल वेरिएशन’
दुनिया के सबसे बेहतरीन टेस्ट ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा की स्पिन गेंदबाजी की शैली सुथार और जयसूर्या दोनों से अलग है. जडेजा भी जयसूर्या की तरह ‘अंडर स्पिन’ और साइड-आर्म एक्शन का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनकी ताकत उनकी रफ्तार और सटीकता है. जडेजा गेंद को हवा में ज्यादा समय यानि फ्लाइट नहीं देते, जिससे बल्लेबाज को क्रीज से बाहर निकलने का मौका नहीं मिलता. उनका हाथ कान से दूर और थोड़ा नीचे से आता है, जिससे गेंद को स्किड कराने में मदद मिलती है. जडेजा की ताकत उनका ‘नेचुरल वेरिएशन’ है; यानी एक ही एक्शन से उनकी एक गेंद तेजी से घूमती है, तो दूसरी बिना घूमे सीधे निकल जाती है. अंडर स्पिन के कारण उनकी गेंदें पिच पर गिरकर तेजी से बल्लेबाज के पैड या स्टंप्स पर लगती हैं.
संक्षेप में कहें तो जहां रवींद्र जडेजा और प्रभात जयसूर्या अपनी फ्लैट कलाई और अंडर स्पिन के जरिए बल्लेबाजों को गति, सटीकता और कम उछाल से फंसाते हैं, वहीं मानव सुथार का क्लासिक हाई-आर्म एक्शन उन्हें हवा में ड्रिफ्ट, शानदार डिप और पिच से खतरनाक ओवर-स्पिन टर्न दिलाता है. गॉल की पिच पर सुथार का यह प्रदर्शन दिखाता है कि टेस्ट क्रिकेट में आज भी ‘फ्लाइट और टर्न’ का पारंपरिक अंदाज सबसे घातक हथियार है.



