अरावली पर्वत पर पत्थरों से बनते हैं मन्नतों के घर

Last Updated:August 19, 2026, 06:19 IST
Nagaur Gopeshwar Mahadev: नागौर के कुचामनसिटी स्थित 2300 फीट ऊंचे अरावली पर्वत पर विराजमान गोपेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालु अनूठी परंपरा निभा रहे हैं. सावन में भक्त पौने दो किमी की चढ़ाई के दौरान रास्तों में बिखरे पत्थरों से छोटे-छोटे मन्नतों के घर बनाते हैं. मान्यता है कि यहां पत्थरों से जितनी मंजिलों का घर बनाया जाता है, असल जिंदगी में भी वैसा ही पक्का घर मिलता है. यह मंदिर आस्था और सपनों का अनोखा केंद्र बन चुका है.
कुचामनसिटी के हरियाजुन में बेहद प्राचीन गोपेश्वर महादेव मंदिर मौजूद है. यह मंदिर करीब 2300 फीट ऊंची अरावली पर्वतमाला पर स्थित है. मंदिर अपनी अनोखी मान्यता को लेकर प्रसिद्ध है. सावन के महीने में यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के साथ अपनी मनोकामना भी पत्थरों में सजाते हैं. पहाड़ी पर पड़े छोटे-बड़े पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर जमाकर श्रद्धालु छोटे-छोटे घर बनाते हैं. भक्त इन संरचनाओं को मन्नतों के महल कहते हैं.
पहाड़ी की चोटी और चढ़ाई के रास्ते में जगह-जगह पत्थरों से बने ऐसे छोटे-छोटे घर दिखाई देते हैं. इस परंपरा के पीछे स्थानीय लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. मान्यता है कि श्रद्धालु यहां जितनी मंजिल या जितने आकार का पत्थरों का घर बनाता है, भविष्य में उसे असल जीवन में उतना ही बड़ा घर प्राप्त होता है. यही विश्वास लोगों को पहाड़ी पर चढ़ते समय रास्ते में रुककर पत्थर चुनने और उन्हें एक-दूसरे के ऊपर जमाकर अपने सपनों का घर बनाने के लिए प्रेरित करता है.
किसी के लिए यह पत्थरों का साधारण ढेर हो सकता है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह उनके भविष्य के घर का प्रतीक माना जाता है. गोपेश्वर महादेव मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब पौने दो किलोमीटर की पहाड़ी चढ़ाई तय करनी पड़ती है. रास्ते में अरावली के प्राकृतिक पत्थर जगह-जगह बिखरे हुए हैं. श्रद्धालु इन्हीं पत्थरों को उठाकर अपनी कल्पना के अनुसार घर का आकार देते हैं. कोई एक मंजिल का छोटा घर बनाता है, तो कोई कई स्तरों में पत्थर जमाकर बड़ा महल तैयार करता है.
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चढ़ाई के दौरान ऐसे सैकड़ों छोटे-बड़े मन्नतों के घर श्रद्धालुओं को इस अनूठी परंपरा से रूबरू कराते हैं. सावन में इस परंपरा का नजारा और भी खास हो जाता है. भगवान शिव की आराधना के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु गोपेश्वर महादेव मंदिर पहुंचते हैं. पूजा और दर्शन के बाद कई लोग पहाड़ी के रास्ते में रुककर अपनी मन्नत के प्रतीक के रूप में पत्थरों का घर बनाते हैं. श्रद्धालुओं का कहना है कि उनके लिए यह यात्रा सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं रहती, बल्कि अपनी इच्छाओं और भविष्य के सपनों को आकार देने का अवसर भी बन जाती है.
मंदिर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है, जहां पहुंचकर श्रद्धालु गोपेश्वर महादेव के दर्शन करते हैं. आम श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पहाड़ी पर सीढ़ियों का निर्माण किया गया है. वहीं चौपहिया वाहनों के आवागमन के लिए पहाड़ को काटकर सड़क भी बनाई गई है. हालांकि, पैदल चढ़ाई करने वाले श्रद्धालुओं के लिए रास्ते का प्राकृतिक स्वरूप और अरावली के पत्थर इस यात्रा को अलग अनुभव देते हैं. इसी रास्ते में जगह-जगह बने पत्थरों के घर इस धार्मिक स्थल की पहचान को और खास बनाते हैं.
मंदिर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है, जहां पहुंचकर श्रद्धालु गोपेश्वर महादेव के दर्शन करते हैं. आम श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पहाड़ी पर सीढ़ियों का निर्माण किया गया है. वहीं चौपहिया वाहनों के आवागमन के लिए पहाड़ को काटकर सड़क भी बनाई गई है. हालांकि, पैदल चढ़ाई करने वाले श्रद्धालुओं के लिए रास्ते का प्राकृतिक स्वरूप और अरावली के पत्थर इस यात्रा को अलग अनुभव देते हैं. इसी रास्ते में जगह-जगह बने पत्थरों के घर इस धार्मिक स्थल की पहचान को और खास बनाते हैं.
अरावली की ऊंचाई पर बने ये छोटे-छोटे पत्थरों के घर अब गोपेश्वर महादेव की यात्रा की अनूठी पहचान बन चुके हैं. यहां प्रकृति, आस्था और सपनों का ऐसा संगम दिखाई देता है, जहां श्रद्धालु सिर्फ मंदिर तक नहीं पहुंचते, बल्कि अपने भविष्य की कल्पना को भी रास्ते में आकार देते हैं. किसी घर में एक मंजिल है, तो किसी में कई मंजिलों के सपने और उम्मीदें नजर आती हैं.
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August 19, 2026, 06:19 IST



