पाचन से लेकर सूजन तक, जानिए क्यों आयुर्वेद में खास है गम्हार का पेड़

Last Updated:August 19, 2026, 06:30 IST
गोंडा के गांव और खेतों के आसपास मिलने वाला गम्हार पेड़ आयुर्वेदिक और पारंपरिक चिकित्सा में खास महत्व रखता है. इसका वैज्ञानिक नाम Gmelina arborea है. वैद्य के अनुसार गम्हार की जड़, छाल और अन्य हिस्सों का पारंपरिक उपयोग पाचन, सूजन, कमजोरी और कुछ अन्य समस्याओं में किया जाता रहा है. हालांकि, औषधि के रूप में इसका इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए.
गोंडा: गांव और खेतों के आसपास कई ऐसे पेड़-पौधे मौजूद हैं, जिनके बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं होती. इन्हीं में से एक है गम्हार, जिसे वैज्ञानिक नाम Gmelina arborea से जाना जाता है. इसे कई जगह गम्भारी, गम्हारी के नाम से भी जाना जाता है. यह तेजी से बढ़ने वाला पेड़ है और इसकी लकड़ी के साथ-साथ आयुर्वेदिक और पारंपरिक चिकित्सा में भी इसका महत्व बताया गया है.
पाचन तंत्र के लिए है उपयोगी: वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि गम्हार का पारंपरिक उपयोग पाचन से जुड़ी कई समस्याओं में बताया गया है. कब्ज, गैस, अपच, पेट में दर्द और भूख कम लगने जैसी परेशानियों में इसके विभिन्न हिस्सों का इस्तेमाल आयुर्वेदिक चिकित्सा में किया जाता रहा है. माना जाता है कि इसके कुछ प्राकृतिक तत्व पाचन तंत्र को सामान्य रखने में मदद कर सकते हैं.
सूजन और जोड़ों की परेशानी में इस्तेमाल: गम्हार में सूजन कम करने में मदद करता है. आयुर्वेदिक परंपरा में इसकी जड़ और छाल का इस्तेमाल शरीर में होने वाली सूजन तथा जोड़ों की परेशानी में किया जाता रहा है. गठिया या अन्य कारणों से होने वाले जोड़ों के दर्द में शरीर के कुछ हिस्सों में सूजन और अकड़न की समस्या हो सकती है. पारंपरिक चिकित्सा में गम्हार को ऐसे मामलों में उपयोगी पौधों में शामिल किया जाता है. हालांकि, लंबे समय से जोड़ों में दर्द, सूजन या चलने-फिरने में परेशानी होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी.
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कमजोरी और थकान में है लाभकारी: गम्हार को आयुर्वेदिक परंपरा में शरीर को पोषण देने वाले पौधों में भी गिना जाता है. इसका पारंपरिक उपयोग शारीरिक कमजोरी और थकान जैसी समस्याओं में किया जाता रहा है. माना जाता है कि इसके कुछ हिस्से शरीर को ताकत देने और सामान्य स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. लगातार कमजोरी महसूस होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. शरीर में खून की कमी, पोषक तत्वों की कमी, नींद पूरी न होना या कोई अन्य बीमारी भी इसकी वजह हो सकती है.
बुखार में भी बताया गया है उपयोग: गम्हार के विभिन्न हिस्सों के इस्तेमाल का बुखार जैसी स्थितियों में किया जाता है. इसके साथ ही शरीर में बेचैनी जैसी समस्याओं में भी इसके पारंपरिक उपयोग की जानकारी मिलती है. हालांकि, बुखार कई बीमारियों का लक्षण हो सकता है. खासकर तेज बुखार, लगातार बुखार रहने, कमजोरी बढ़ने या दूसरे गंभीर लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. ऐसी स्थिति में केवल घरेलू नुस्खे या औषधीय पौधों पर निर्भर रहना सही नहीं है.
रक्तस्राव से जुड़ी समस्याओं में उपयोग: गम्हार का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में रक्तस्राव से जुड़ी कुछ समस्याओं में भी बताया गया है. नकसीर यानी नाक से खून आने और महिलाओं में अत्यधिक मासिक रक्तस्राव जैसी स्थितियों में इसके पारंपरिक उपयोग का उल्लेख मिलता है. लेकिन ऐसी समस्याओं के पीछे कई चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं. बार-बार नकसीर आना या मासिक धर्म के दौरान सामान्य से बहुत अधिक रक्तस्राव होना गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है. इसलिए ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय जांच जरूरी है.
विशेषज्ञ की सलाह से करें इस्तेमाल: गम्हार के औषधीय उपयोग मुख्य रूप से आयुर्वेदिक और पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान से जुड़े हैं. इसके कुछ संभावित औषधीय गुणों पर वैज्ञानिक अध्ययन भी हुए हैं, लेकिन किसी बीमारी के इलाज के लिए इसे आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. अगर कोई व्यक्ति गम्हार का उपयोग औषधि के रूप में करना चाहता है तो उसे योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. विशेषज्ञ व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और समस्या के अनुसार सही तरीका और मात्रा बता सकते हैं.
गम्हार के बताए गए उपयोग पारंपरिक आयुर्वेदिक जानकारी पर आधारित हैं. यह लेख किसी बीमारी के इलाज या दवा का विकल्प नहीं है. गंभीर, लगातार या बढ़ती हुई स्वास्थ्य समस्या होने पर डॉक्टर से जांच और उचित उपचार कराना जरूरी है.
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August 19, 2026, 06:30 IST



