गजब जुनून… कभी सड़ते थे मृत मवेशी, रिटायर्ड RAS अफसर ने 12 लाख लगाकर खड़ा कर दिया 6 बीघा में बगीचा

Last Updated:August 19, 2026, 06:07 IST
Pushpendra Singh Shekhawat Inspiring Story: सीकर के सिंहासन पंचायत निवासी रिटायर्ड आरएएस अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह शेखावत ने अपनी पेंशन राशि से गांव के 6 बीघा बंजर डंपिंग यार्ड को ‘रामनगर पार्क’ में बदल दिया है. 12 लाख रुपये खर्च कर उन्होंने मियाजाकी, अल्फांसो आम समेत 55 प्रजातियों के 2500 पौधे लगाए हैं. मिट्टी जांच और विशेषज्ञों की सलाह से विकसित यह पार्क अब फलदार बगीचे और पक्षियों के आशियाने के रूप में मिसाल बन चुका है.
Sikar News. सरकारी सेवा में रहते हुए प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने वाले पुष्पेंद्र सिंह शेखावत ने रिटायरमेंट के बाद अपनी जिंदगी की दूसरी पारी को पर्यावरण संरक्षण के नाम कर दिया. सिंहासन पंचायत के रामनगर निवासी शेखावत करीब दो साल पहले आरएएस सेवा से सेवानिवृत्त हुए. इसके बाद गांव लौटे तो उद्याली जोहड़ी की बदहाल तस्वीर ने उन्हें विचलित कर दिया. यहां मृत पशुओं के अवशेष और कचरा डाला जाता था. लेकिन अपनी मेहनत और पहल से उन्होंने आज उसी जगह को हरियाली से भरे रामनगर पार्क में बदल दिया है.
साल 2024 में शेखावत जब एक दिन घूमते हुए उद्याली जोहड़ी पहुंचे, तो चारों तरफ गंदगी का आलम दिखाई दिया. लंबे समय से देखरेख के अभाव में जोहड़ी के आसपास की जमीन डंपिंग यार्ड में बदल चुकी थी. उन्होंने तय किया कि सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली राशि का इस्तेमाल किसी निजी सुविधा के बजाय गांव की इस बंजर जमीन को हरा-भरा बनाने में किया जाएगा. इसी संकल्प के साथ उन्होंने यहां पार्क विकसित करने का काम शुरू कर दिया.
शेखावत ने पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए अपनी तीन बीघा जमीन पार्क के लिए समर्पित कर दी. इसके साथ ही जोहड़ी के पास पंचायत की करीब तीन बीघा बंजर जमीन को भी पार्क के रूप में विकसित करने का बीड़ा उठाया. इस तरह करीब छह बीघा क्षेत्र को हरियाली के केंद्र में बदलने की योजना बनाई गई. पौधों के चयन से लेकर मिट्टी की गुणवत्ता और सिंचाई तक, उन्होंने हर पहलू पर एक्सपर्ट से जानकारी लेकर काम किया.
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शेखावत ने पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए अपनी तीन बीघा जमीन पार्क के लिए समर्पित कर दी. इसके साथ ही जोहड़ी के पास पंचायत की करीब तीन बीघा बंजर जमीन को भी पार्क के रूप में विकसित करने का बीड़ा उठाया. इस तरह करीब छह बीघा क्षेत्र को हरियाली के केंद्र में बदलने की योजना बनाई गई. पौधों के चयन से लेकर मिट्टी की गुणवत्ता और सिंचाई तक, उन्होंने हर पहलू पर एक्सपर्ट से जानकारी लेकर काम किया.
शेखावत ने पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए अपनी तीन बीघा जमीन पार्क के लिए समर्पित कर दी. इसके साथ ही जोहड़ी के पास पंचायत की करीब तीन बीघा बंजर जमीन को भी पार्क के रूप में विकसित करने का बीड़ा उठाया. इस तरह करीब छह बीघा क्षेत्र को हरियाली के केंद्र में बदलने की योजना बनाई गई. पौधों के चयन से लेकर मिट्टी की गुणवत्ता और सिंचाई तक, उन्होंने हर पहलू पर एक्सपर्ट से जानकारी लेकर काम किया.
पुष्पेंद्र सिंह शेखावत की यह पहल केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है. रामनगर पार्क में पक्षियों के लिए जगह-जगह वाटर पॉइंट और परिंडे विकसित किए गए हैं, जहां रोजाना बड़ी संख्या में पक्षी पहुंचते हैं. कभी कचरे और मृत पशुओं के अवशेषों के कारण पहचान रखने वाली यह जगह अब पक्षियों की चहचहाहट और हरियाली से गुलजार नजर आती है. शेखावत ने अपनी सेवानिवृत्ति की रकम को जिस तरह पर्यावरण संरक्षण में लगाया, वह ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत पहल से बदलाव की मिसाल बन रही है.
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August 19, 2026, 06:07 IST



