Rajasthan

लहरिया की छटा, घूमर की थाप और सावन की मस्ती, केरालिया में दिखा राजस्थानी रंग

Last Updated:August 19, 2026, 07:18 IST

Lahariya Mahotsav Jaisalmer: जैसलमेर के लाठी क्षेत्र स्थित केरालिया गांव में सावन के अवसर पर लहरिया महोत्सव धूमधाम से मनाया गया. राजस्थानी संस्कृति और लोक परंपराओं को सहेजने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाएं लहरिया, बंधेज और पारंपरिक आभूषणों में नजर आईं. ‘सतरंगी लहरिया’ और ‘सावन आयो रे’ जैसे लोकगीतों पर महिलाओं ने सामूहिक घूमर नृत्य किया. आईदान सिंह भाटी ने बताया कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत और सामाजिक समरसता से जोड़ने का प्रयास किया जाता है.

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सावन में सजा केरालिया, लहरिया के रंग में झूमा गांव और घूमर पर थिरकीं महिलाएंZoomJaisalmer Lahariya Mahotsav: केरालिया में घूमर और लहरिया की धूम

Jaisalmer: जैसलमेर जिले के लाठी क्षेत्र अंतर्गत केरालिया गांव में सावन की हरियाली और उमंग के बीच लहरिया महोत्सव बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. राजस्थानी लोक संस्कृति, सदियों पुरानी परंपराओं और पारंपरिक वेशभूषा को सहेजने के साथ-साथ महिलाओं को एक साझा मंच प्रदान करने के उद्देश्य से यह आयोजन किया गया. महोत्सव में गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे पूरा माहौल उत्सव के रंगों में ढल गया.

लहरिया महोत्सव के दौरान पूरा आयोजन स्थल सावन के जीवंत रंगों से सराबोर नजर आया. महिलाएं लाल, पीले और सतरंगी लहरिया, बंधेज और चुनरी की मनमोहक पारंपरिक पोशाकों में सज-धजकर पहुंचीं. हाथों में रची मेहंदी, माथे पर बिंदिया, पारंपरिक राजस्थानी आभूषणों और सिर पर सजी रंग-बिरंगी ओढ़नियों ने महिलाओं के रूप-रंग और पूरे कार्यक्रम की रौनक में चार चांद लगा दिए. महिलाओं का यह उत्साह और उमंग देखते ही बन रहा था.

‘सतरंगी लहरिया’ और ‘तारा री चुनड़ी’ पर थिरके कदम, महिलाओं ने जमाया रंगमहोत्सव का मुख्य आकर्षण महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किए गए रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे. महिलाओं ने राजस्थान के प्रसिद्ध लोकनृत्य घूमर के साथ कई पारंपरिक नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. ‘सतरंगी लहरिया’, ‘तारा री चुनड़ी’ और ‘सावन आयो रे’ जैसे एक से बढ़कर एक लोकप्रिय सावन गीतों पर महिलाओं ने समूह में लोकनृत्य किया. पारंपरिक ढोल-थाली की थाप और लोकगीतों के मधुर सुरों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा.

नई पीढ़ी को समृद्ध विरासत से जोड़ने का एक अनूठा प्रयासकेरालिया गांव के आईदान सिंह भाटी ने कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लहरिया महोत्सव के आयोजन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं में आपसी भाईचारा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना है. उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में जब लोग अपनी जड़ों से दूर हो रहे हैं, तब ऐसे सामूहिक आयोजनों के जरिए नई पीढ़ी को राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत से जोड़े रखने का एक सार्थक प्रयास किया जा रहा है. महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से संस्कृति को नई संजीवनी मिलती है.

पारंपरिक व्यंजनों के साथ हुआ महोत्सव का समापनसांस्कृतिक प्रस्तुतियों के समापन के बाद सभी महिलाओं ने एक-दूसरे को सावन की बधाई दी और मिलकर पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों का लुत्फ उठाया. कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि ये हमारी लुप्त होती सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखने, सामाजिक मेलजोल बढ़ाने और आपसी जुड़ाव को गहरा करने का काम करते हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Jaisalmer,Jaisalmer,Rajasthan

First Published :

August 19, 2026, 07:18 IST

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