रील लाइफ में थलापति विजय, रियल लाइफ में पाली के भामाशाह; ₹50 की पर्ची में ₹20 करोड़ का हाईटेक इलाज

Last Updated:August 19, 2026, 15:35 IST
एक अस्पताल ₹20 करोड़ की लागत से बिना सरकारी मदद के चल रहा है. यहां ₹5 में इलाज, मुफ्त बस सेवा, रियायती डायलिसिस व जांचें उपलब्ध हैं.
भामाशाहों और दानदाताओं के अप्रतिम सहयोग से लगभग ₹20 करोड़ की लागत से पौने 7 बीघा जमीन पर बना यह चिकित्सालय बिना किसी सरकारी सहायता या अनुदान के पूर्ण रूप से लोक-कल्याण के भाव से चलाया जा रहा है. यह संस्थान केवल सांकेतिक शुल्क के लिए ही नहीं, बल्कि अपने विश्वस्तरीय और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी जाना जाता है. आज जहां निजी अस्पतालों में डॉक्टरों का परामर्श शुल्क ₹500 से ₹1000 तक पहुंच गया है, वहीं यहां असहाय और सामान्य मरीज मात्र ₹5 रूपये में ईलाज करा सकते हैं.
दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों के निर्धन मरीजों की सुगम पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अस्पताल प्रबंधन द्वारा विशेष निःशुल्क बस सेवा संचालित की जा रही है. यह बस दूर-दराज के गांवों से मरीजों को सुरक्षित अस्पताल तक लाने और इलाज के उपरांत वापस छोड़ने का कार्य पूरी तरह नि:शुल्क करती है, जिससे असहाय और दूरस्थ क्षेत्रों के रोगियों को आवागमन की चिंता से पूरी तरह मुक्ति मिल गई है.
गुर्दे (किडनी) की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए यहाँ 10 अत्याधुनिक डायलिसिस मशीनों से सुसज्जित एक विशाल हॉल निर्मित किया गया है, जहाँ बाजार दरों से बेहद रियायती मूल्य पर डायलिसिस किया जाता है. इसके साथ ही, भीषण दुर्घटनाओं और हादसों में घायलों को तुरंत आपातकालीन उपचार प्रदान करने के लिए 24 घंटे तत्पर रहने वाला सर्वसुविधायुक्त ट्रॉमा, हड्डी एवं एक्सीडेंट केयर सेंटर संचालित है.
Add as Preferred Source on Google
अस्पताल परिसर में ही उन्नत सीटी स्कैन मशीन, डिजिटल एक्स-रे और सर्वसुविधायुक्त पैथोलॉजी लैब मौजूद है, जहाँ बाजार से काफी कम कीमत पर सभी प्रकार की जटिल जांचें संपन्न की जाती हैं. इतना ही नहीं, माह में एक से दो बार जयपुर और अहमदाबाद जैसे महानगरों से यूरोलॉजी, ऑन्कोलॉजी (कैंसर) और कार्डियोलॉजी (हृदय रोग) के शीर्ष सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टर विशेष रूप से यहाँ आकर मरीजों को परामर्श और सेवाएं प्रदान करते हैं.
अस्पताल के संपूर्ण बुनियादी ढांचे को आधुनिक और मरीज-अनुकूल दृष्टिकोण से तैयार किया गया है. इसमें जटिल शल्य चिकित्सा और नेत्र ऑपरेशन हेतु 2 अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर (OT), महिला व पुरुष मरीजों के लिए 4 विशाल सुसज्जित वार्ड तथा ओपीडी में डॉक्टरों के लिए 7 अलग-अलग चैंबर बनाए गए हैं. इसके अलावा, विशेष देखभाल वाले मरीजों हेतु प्राइवेट रूम, डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ के लिए ऑन-कैंपस आवास और सुरक्षा की दृष्टि से आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम भी विकस
पाली सेवा मंडल के प्रमोद जैथलिया के अनुसार, इस भव्य संस्थान की नींव छह दशक पूर्व 1962-63 में उद्योगपति स्वर्गीय मोहनलाल मोदी और स्वर्गीय मोहनलाल गुप्ता द्वारा ‘हिन्दू सेवा मंडल’ के रूप में रखी गई थी. संस्था ने 1964-65 में पानी दरवाजा स्थित भवन से शुरुआत की, 1979 की भीषण बाढ़ और अकाल में राहत कार्य किए और वर्ष 2001-2005 में आदिवासी क्षेत्रों तक सेवाओं का विस्तार किया.
दानवीर स्व. घीसूलाल पारख की यह दूरदर्शी सोच थी कि पाली में एक ऐसा सर्वसुविधायुक्त चिकित्सालय बने जहाँ धन के अभाव में कोई भी निर्धन व्यक्ति इलाज से वंचित न रहे. वर्ष 2005 में क्रय की गई 6.75 बीघा भूमि पर बना यह नया परिसर आज उनके उसी स्वर्णिम सपने को साकार कर रहा है. जरूरतमंद और असहाय मरीजों के बड़े और जटिल ऑपरेशन यहाँ पूरी तरह निःशुल्क किए जाते हैं, जो इसे सही मायनों में एक सच्चा ‘मानवता का मंदिर’ सिद्ध करता है.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|First Published :
August 19, 2026, 15:35 IST



