श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब है? व्रत रखने से पहले जान लें सही तारीख, पूजा विधि और भगवान कृष्ण से जुड़ी खास मान्यता

Last Updated:August 20, 2026, 18:57 IST
Krishna Janmashtami 2026: भविष्य पुराण में जन्माष्टमी व्रत की महिमा बताते हुए इसके फल को बहुत बड़ा बताया गया है. इसी आधार पर धार्मिक मान्यता है कि एक जन्माष्टमी का व्रत 20 करोड़ एकादशी व्रतों के समान फलदायी माना जाता है. इसके अलावा जन्माष्टमी का व्रत करने से मनुष्य को पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होने की भी मान्यता है.
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20 करोड़ एकादशियों के बराबर मिलता है एक जन्माष्टमी के व्रत का फल
करौली. भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली जन्माष्टमी हिंदू धर्म के प्रमुख व्रत-पर्वों में से एक है. इस दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में उपवास रखते हैं और रात्रि में उनके जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. धार्मिक मान्यताओं में जन्माष्टमी के व्रत को बेहद पुण्यदायी बताया गया है. मान्यता है कि विधि-विधान और श्रद्धा के साथ रखा गया एक जन्माष्टमी व्रत 20 करोड़ एकादशी के व्रतों के बराबर फल प्रदान करता है.
इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितम्बर 2026 को मनाया जाएगा. ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करने वाले श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर रात में भगवान के जन्म के समय पूजा करेंगे.
जन्माष्टमी के व्रत का क्या है महत्व?हिंडौन के ज्योतिषी पंडित धीरज शर्मा के अनुसार, जन्माष्टमी का व्रत भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा और समर्पण का पर्व है. धार्मिक ग्रंथों में इस व्रत की महिमा का विशेष वर्णन मिलता है. मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा के साथ जन्माष्टमी का व्रत करता है, उसे भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है. भविष्य पुराण में जन्माष्टमी व्रत की महिमा बताते हुए इसके फल को बहुत बड़ा बताया गया है. इसी आधार पर धार्मिक मान्यता है कि एक जन्माष्टमी का व्रत 20 करोड़ एकादशी व्रतों के समान फलदायी माना जाता है. इसके अलावा जन्माष्टमी का व्रत करने से मनुष्य को पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होने की भी मान्यता है.
इस तरह रखें जन्माष्टमी का व्रतपंडित धीरज शर्मा के मुताबिक जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को सुबह स्नान करके भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करना चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद पूरे दिन भगवान का नाम स्मरण, भजन और पूजा-पाठ करते हुए व्रत का पालन करना चाहिए. व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार फलाहार कर सकते हैं या निर्जल व्रत भी रख सकते हैं. व्रत की विधि व्यक्ति की क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार रखनी चाहिए. दिनभर भगवान श्रीकृष्ण की बाल स्वरूप वाली प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा-अर्चना करना भी शुभ माना जाता है.
आधी रात को ऐसे करें भगवान श्रीकृष्ण की पूजा जन्माष्टमी की पूजा में सबसे विशेष समय आधी रात का माना जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था. इसलिए श्रद्धालु रात 12 बजे भगवान के जन्म के समय पूजा करते हैं. इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को पंचामृत से स्नान कराया जाता है. इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाकर फूल, माला, चंदन और आभूषणों से सजाया जाता है. भगवान को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और अन्य प्रसाद का भोग लगाया जाता है. इसके बाद श्रीकृष्ण की आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना की जाती है. पूजा पूरी होने के बाद श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करके अपना व्रत खोल सकते हैं.
व्रत में रखें इस बात का ध्यान जन्माष्टमी का व्रत केवल भूखे रहने का नाम नहीं है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के प्रति मन, वचन और कर्म से श्रद्धा रखना भी महत्वपूर्ण माना गया है. इसलिए व्रत के दौरान सात्विक आहार, भगवान का स्मरण और धार्मिक गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Karauli,Rajasthan
First Published :
August 20, 2026, 18:57 IST



