पाकिस्तान का वो अनचाहा रिकॉर्ड जिसे कोई टीम छूना भी नहीं चाहेगी, टेस्ट में बनाया सबसे मनहूस कीर्तिमान

नई दिल्ली. हेडिंग्ले की तेज हवाओं और सीम होती गेंदों के बीच पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने एक ऐसा शर्मनाक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है, जिसे कोई भी टीम कभी याद नहीं रखना चाहेगी. इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे टेस्ट मैच में पाकिस्तान की बल्लेबाजी की शुरुआत दोनों पारियों में शून्य से आगे नहीं बढ़ सकी. पहली पारी में खाता खुलने से पहले ही टीम का पहला विकेट गिरा और दूसरी पारी में भी कहानी जस की तस रही.
मैच की पहली पारी में युवा बल्लेबाज अजान अवैस ओली रॉबिन्सन की पहली ही गेंद पर बिना खाता खोले एलबीडब्ल्यू आउट हो गए. उस वक्त स्कोरबोर्ड पर शून्य रन टंगा था. उम्मीद थी कि दूसरी पारी में पाकिस्तानी सलामी जोड़ी इस गलती से सबक लेगी, लेकिन शुक्रवार को मैदान पर उतरी टीम के साथ इतिहास ने खुद को दोहरा दिया. पारी के दूसरे ही ओवर में इमाम-उल-हक 5 गेंद खेलकर बिना कोई रन बनाए पवेलियन लौट गए. नतीजतन, दोनों पारियों में पाकिस्तान का स्कोर 0/1 दर्ज हुआ.
पाकिस्तान के नाम हुआ शर्मनाक रिकॉर्ड.
इतिहास में पहली बार किसी टीम ने सातवीं बार झेला यह दर्दटेस्ट क्रिकेट की लाल गेंद और शुरुआती नमी के सामने नई गेंद से निपटना दुनिया के किसी भी सलामी बल्लेबाज के लिए सबसे कठिन इम्तिहान माना जाता है. किसी एक पारी में शून्य पर पहला विकेट गिरना सामान्य बात है, लेकिन एक ही टेस्ट मैच की दोनों पारियों में खाता खोले बिना पहला विकेट गंवा देना बेहद दुर्लभ और निराशाजनक है. पाकिस्तान टेस्ट क्रिकेट के 149 साल के लंबे इतिहास में दुनिया की पहली ऐसी टीम बन गई है, जिसने यह अनचाहा कारनामा सातवीं बार किया है.
हर 68वें मैच में दोहराई जाती है वही पुरानी गलतीआंकड़ों के नजरिए से देखें तो यह कमजोरी पाकिस्तान के टेस्ट इतिहास में गहराई से जुड़ी नजर आती है. पाकिस्तान ने अब तक अपने कुल 472 टेस्ट मैचों में से 7 बार यह स्थिति झेली है, यानी लगभग हर 68वें मैच में उनके साथ ऐसा हुआ है. इस शर्मनाक सूची में दूसरे नंबर पर इंग्लैंड की टीम है, जिसने 1098 टेस्ट मैचों में 5 बार दोनों पारियों में शून्य पर पहला विकेट गंवाया है, जो औसतन हर 220 मैच में एक बार बैठता है.
अन्य बड़ी टीमों का क्या है हाल?बाकी टीमों की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया चार बार इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति का शिकार बना है, जबकि भारतीय टीम के साथ टेस्ट इतिहास में ऐसा केवल दो बार हुआ है. न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज, बांग्लादेश, जिम्बाब्वे और आयरलैंड जैसी टीमों ने अपने पूरे इतिहास में केवल एक-एक बार ही किसी टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शून्य पर अपना पहला विकेट गंवाया है.
पर्थ से शुरू हुआ था शून्य पर बिखरने का सिलसिलापाकिस्तान के इस अनचाहे सिलसिले की शुरुआत 47 साल पहले मार्च 1979 में हुई थी. तब पर्थ के तेज और उछाल भरे वाका मैदान पर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने पाकिस्तान के दोनों सलामी बल्लेबाजों को दोनों पारियों में शून्य पर चलता कर दिया था. इसके ठीक तीन साल बाद, जुलाई 1982 में बर्मिंघम के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ पाकिस्तान ने फिर यही गलती दोहराई. यह इंग्लैंड के खिलाफ उनका पहला ऐसा मैच था, जो अब हेडिंग्ले में तीसरी बार घटित हुआ है.
कोलंबो में दोनों पारियों में लगे थे ‘गोल्डन डक’इसके बाद पंद्रह वर्षों तक पाकिस्तानी टीम इस शर्मिंदगी से बची रही, लेकिन अप्रैल 1997 में कोलंबो के एसएससी मैदान पर श्रीलंका के खिलाफ यह सिलसिला फिर लौट आया. उस मैच की दोनों पारियों में पाकिस्तानी ओपनर पहली ही गेंद पर ‘गोल्डन डक’ बनाकर आउट हुए थे.
2000 के दशक में यूएई की पिचों पर भी वही हालसाल 2000 के बाद यह समस्या पाकिस्तान के लिए और ज्यादा विकराल रूप लेने लगी. अक्टूबर 2002 में शारजाह की तपती गर्मी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहली और तीसरी पारी में टीम का पहला विकेट शून्य पर गिरा. इसके ग्यारह साल बाद, अक्टूबर 2013 में दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका के घातक तेज गेंदबाजों ने फिर से पाकिस्तान को इसी दर्द से रूबरू कराया.
सिडनी से हेडिंग्ले तक बदस्तूर जारी है सिलसिलाहाल के वर्षों में भी पाकिस्तानी टॉप-ऑर्डर इस बीमारी से उबर नहीं सका है. जनवरी 2024 में सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (एससीजी) पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम ने छठी बार दोनों पारियों में बिना किसी रन के पहला विकेट खोया था. अब हेडिंग्ले टेस्ट में इंग्लैंड के सामने वही कहानी दोहराकर पाकिस्तान ने इस अनचाहे रिकॉर्ड के शिखर पर अपनी जगह और मजबूत कर ली है. दशकों से बदलती पिचों, अलग-अलग पीढ़ियों के बल्लेबाजों और कप्तानों के बावजूद, नई गेंद के सामने शून्य पर लड़खड़ाने की यह कमजोरी पाकिस्तान का पीछा नहीं छोड़ रही है.



