poultry farming tips in monsoon special advice to prevent diseases guide

Last Updated:August 21, 2026, 18:07 IST
Monsoon Poultry Care Tips: बरसात के मौसम में मुर्गियों को बीमारी से बचाने के लिए घरेलू उपाय अपनाना जरूरी है. नमी और गंदगी से संक्रमण का खतरा बढ़ता है, जिससे पूरा झुंड बीमार पड़ सकता है. शेड को सूखा रखना, साफ-सफाई और टीकाकरण पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है. जानें रखरखाव के साथ बचाव का तरीका.
देवघर: मानसून की शुरुआत के साथ ही ग्रामीण इलाकों में मुर्गी पालन करने वाले किसानों की समस्याएं बढ़ने लगती हैं. लगातार होने वाली बारिश के कारण पॉल्ट्री शेड में नमी और गीलापन बढ़ जाता है. कई बार बारिश का पानी शेड के अंदर तक घुस जाता है, जिससे मुर्गियों के बीमार पड़ने का जोखिम काफी बढ़ जाता है. विशेषज्ञों की मानें तो समय रहते शेड की साफ-सफाई पर ध्यान न दिया जाए और मुर्गियों को गीले फर्श पर रखा जाए, तो संक्रमण एक मुर्गी से पूरे झुंड में तेजी से फैल सकता है. इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. जानें महत्वपूर्ण सलाह.
पशु चिकित्सक की महत्वपूर्ण सलाहदेवघर कृषि विज्ञान केंद्र की वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन ने बताया कि बरसात के मौसम में शेड को सूखा रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. मुर्गियों को किसी भी हाल में गीली जगह पर न रखें. उन्होंने सलाह दी कि शेड में हर दो से तीन दिन में चूने का छिड़काव अवश्य करें. गीली मिट्टी और मुर्गियों की बीट (मल) के मिलने से हानिकारक अमोनिया गैस बनती है, जो मुर्गियों के श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाती है. इस गैस के संपर्क में आने से मुर्गियों की मृत्यु दर बढ़ जाती है.
बरसात में रानीखेत बीमारी का सबसे बड़ा खतराडॉ. सोरेन के अनुसार बरसात के दिनों में मुर्गियों में रानीखेत नाम की गंभीर बीमारी फैलने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है. इसके अलावा नमी और गंदगी के कारण सांस की बीमारी, दस्त और अन्य वायरल संक्रमण भी तेजी से पनपते हैं. यदि मुर्गियों में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें तुरंत गंभीरता से लें. अचानक सुस्ती आना और दाना-पानी कम खाना, सांस लेने में तकलीफ या गड़गड़ाहट की आवाज होना, अंडा देने वाली मुर्गियों के उत्पादन में अचानक भारी गिरावट आना शामिल है.
शेड का रखरखाव और खान-पानशेड को हमेशा हवादार रखें. यदि फर्श का बिछावन (कुट्टा या भुसी) गीला हो जाए, तो उसे तुरंत बदलकर सूखा बिछावन डालें. मुर्गियों को हमेशा साफ पानी दें और पीने के बर्तन को रोजाना धोएं. दाने को नमी और फफूंद से बचाकर रखें; गीला या फफूंद युक्त दाना न खिलाएं. शेड के आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि दूषित जल कीटाणुओं का मुख्य केंद्र होता है.
संक्रमण से बचाव के उपायकिसी भी मुर्गी में बीमारी के लक्षण दिखते ही उसे तुरंत स्वस्थ मुर्गियों से अलग कर दें. बाहर से लाई गई नई मुर्गियों को सीधे पुराने झुंड में न मिलाएं, बल्कि कुछ दिनों तक अलग रखकर उनकी सेहत की निगरानी करें. रानीखेत और अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए उम्र के अनुसार मुर्गियों का टीकाकरण जरूर कराएं. यदि झुंड में अचानक मुर्गियां मरने लगें या बीमारी फैले, तो मनमर्जी से दवा देने के बजाय तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक या पशुपालन विभाग से संपर्क करें.
About the AuthorAmit Ranjan
अमित रंजन वर्तमान में में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …
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Deoghar,Jharkhand
First Published :
August 21, 2026, 18:07 IST



