पाली का ये धाम बना मिनी माउंट आबू, 522 सीढ़ियां चढ़ते ही दिखेंगे झरने, झील और बादलों से ढकी अरावली की चोटियां

पाली. मानसून के सुहावने मौसम में अगर आप भी किसी हिल स्टेशन की वादियों का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो अब आपको पाली से दूर माउंट आबू जाने की जरूरत नहीं है. जी हां, पाली के इंद्रानगर स्थित प्रसिद्ध पुनागर माता जी मंदिर में इन दिनों बिल्कुल माउंट आबू जैसा ही मनमोहक नजारा देखने को मिल रहा है. अरावली की ऊंची चोटियों में शामिल इस धाम पर मानसून की बारिश के साथ ही कुदरत का अद्भुत सौंदर्य निखरकर सामने आया है. मंदिर की सीढ़ियों से बहते झरने, सामने फैली खूबसूरत झील और बादलों से ढकी पहाड़ियां सैलानियों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रही हैं.
पाली-सोजत हाईवे पर शहर से करीब 22 किलोमीटर की दूरी पर इंद्रानगर स्थित प्रसिद्ध पुनागर माताजी मंदिर इन दिनों बिल्कुल माउंट आबू जैसा ही मनमोहक नजारा पेश कर रहा है. अरावली पर्वतमाला की ऊंची चोटियों पर बसे इस पावन धाम में मानसून की बारिश के साथ ही कुदरत का अद्भुत सौंदर्य निखरकर सामने आया है. पहाड़ से बहते झरने, सामने फैली खूबसूरत झील और बादलों से ढकी पहाड़ियां श्रद्धालुओं और पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रही हैं.
3 हजार साल पुराना इतिहास और 522 सीढ़ियों का सफरअरावली की चोटी पर स्थित यह सिद्ध पीठ लगभग 3 हजार साल पुराना माना जाता है. मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को 522 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. सीढ़ियों के आसपास का प्राकृतिक नजारा और हरी-भरी वादियां भक्तों की थकान पल भर में दूर कर देती हैं.
गूंगे बोलने और बहरे सुनने की अलौकिक मान्यतापुनागर धाम से कई चमत्कारी मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. जनश्रुति और भक्तों के अटूट विश्वास के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सूर्योदय से पहले माताजी के दर्शन कर ले, तो गूंगे बोलने लगते हैं और बहरों को सुनाई देने लगता है. माना जाता है कि यहां केवल सच्चे मन से दर्शन करने मात्र से ही श्रद्धालुओं को शारीरिक और मानसिक कष्टों में लाभ मिलना शुरू हो जाता है.
चमत्कारों और तपस्या की तपोभूमि
इस पावन धाम का इतिहास कई हैरतअंगेज और अलौकिक घटनाओं का साक्षी रहा है. इतिहास के अनुसार, यहां तपस्वी साधुओं ने एक साथ 12 अलग-अलग स्थानों पर जीवित समाधि ली थी, जिससे इस स्थान की आध्यात्मिक ऊर्जा और बढ़ गई. मंदिर से जुड़ी एक प्राचीन कथा के अनुसार, यहां एक संत ने मरे हुए मोरों को, जिन्हें पकाकर खाया जा चुका था, अपनी भक्ति और आध्यात्मिक शक्ति से पुनर्जीवित कर चमत्कार दिखाया था. मानसून के इस सुहावने मौसम में पुनागर माताजी का मंदिर न केवल आध्यात्मिक शांति का केंद्र बना हुआ है, बल्कि पाली जिले का एक प्रमुख पिकनिक और टूरिस्ट स्पॉट भी बन चुका है.
माउंट आबू के गुरु शिखर जैसा होता है एहसासमानसून की रिमझिम फुहारों के बीच जब आप 522 सीढ़ियां चढ़कर अरावली की ऊंची चोटी पर स्थित पुनागर माताजी धाम पहुंचते हैं, तो वहां का नजारा माउंट आबू के गुरु शिखर जैसा अहसास कराता है. ऊंचाई से चारों ओर फैली धुंध, हरी-भरी पर्वत श्रृंखलाएं और सीने को छूकर गुजरते रुई जैसे सफेद बादल आपको किसी दूरस्थ हिल स्टेशन की वादियों में होने का अहसास कराते हैं. ढलान से बहते प्राकृतिक झरने और नीचे फैली झील का विहंगम दृश्य ऐसा लगता है, मानो धरती सीधे आसमान से हाथ मिला रही हो.



