sugarcane farming | sugarcane care tips | गन्ने की फसल को बर्बाद कर सकता है यह रोग, किसान पत्तियों और कलियों की ऐसे करें निगरानी, एक उपाय बनेगा कारगर

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गन्ने की फसल को बर्बाद कर सकता है यह रोग, किसान पत्तियों-कलियों की करें देखभाल
Last Updated:August 22, 2026, 18:15 IST
स्मट गन्ने की एक प्रमुख बीमारी है. समय रहते रोगग्रस्त पौधों को खेत से बाहर नहीं किया गया तो इसका असर गन्ने की पैदावार पर पड़ सकता है. अगस्त का महीना गन्ने की फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. आइए किसान से जानते हैं कि इसकी निगरानी के लिए क्या करें.
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है. जिले के हजारों किसान गन्ने की फसल पर निर्भर हैं और इससे उन्हें अच्छी आमदनी होती है. गन्ना किसानों के लिए प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है. लेकिन इस समय बदलते मौसम और खेतों में बढ़ी नमी के कारण गन्ने की फसल में कई तरह के कीट और रोग दिखाई देने लगते हैं.
स्मट गन्ने की एक प्रमुख बीमारी है, समय रहते रोगग्रस्त पौधों को खेत से बाहर नहीं किया गया तो इसका असर गन्ने की पैदावार पर पड़ सकता है. अगस्त का महीना गन्ने की फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस समय खेतों में नमी बनी रहती है और मौसम में उमस भी रहती है. गन्ने की फसल जितनी तेजी से बढ़ती है, उतना ही जरूरी है कि किसान पौधों की पत्तियों, तने और नई निकल रही कलियों पर नजर रखें.
स्मट गन्ने की फसल में होने वाला एक फफूंदजनित रोग है. इसकी सबसे खास पहचान पौधे के बीच से निकलने वाली लंबी, पतली और काली चाबुक जैसी संरचना होती है. रोग की शुरुआत में पौधा सामान्य दिखाई दे सकता है, लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, पौधे की बढ़वार प्रभावित होने लगती है. संक्रमित पौधों में पत्तियां पतली और संकरी दिखाई देने लगती है.
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जब यह काली संरचना फटती है तो बड़ी मात्रा में काले बीजाणु आसपास फैलने लगते हैं. यही कारण है कि बीजाणु दूसरे स्वस्थ पौधों तक पहुंचकर बीमारी फैलाने का खतरा बना रहता है. इसलिए खेत में एक संक्रमित पौधे को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, तत्काल प्रभाव से रोग ग्रस्त पौधे को खेत से हटा देना चाहिए.
अगर आपके खेतों में गन्ने की फसल में स्मट रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो किसान समय रहते इसकी रोकथाम के लिए Azoxystrobin 18.2% + Difenoconazole 11.4% SC का इस्तेमाल गन्ने में स्मट रोग के नियंत्रण के लिए किया जा सकता है. इसकी मात्रा 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी रखी जाती है. इस हिसाब से किसान 10 लीटर पानी में 10 मिलीलीटर दवा मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं.
गन्ने की फसल में स्मट रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर किसान समय रहते फफूंदनाशी का छिड़काव कर सकते हैं. रोग की शुरुआत में पहला छिड़काव करने के बाद यदि जरूरत महसूस हो तो 10 से 15 दिन के अंतराल पर दूसरा छिड़काव किया जा सकता है. इससे रोग के प्रकोप को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.
कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप बिसेन ने जानकारी देते हुए बताया कि गन्ने की फसल में स्मट (Smut) रोग, एक खतरनाक फफूंद जनित बीमारी है. खेत में रोग से ग्रसित पौधों को तुरंत उखाड़कर जमीन में गाड़ दें या जला दें, ताकि बीजाणु फैल न सकें. यह रोग पैदावार को 30% से 100% तक घटा सकता है. समय रहते किसान इस कीटनाशक दवा का छिड़काव कर सकते हैं.
First Published :
August 22, 2026, 18:15 IST



