दादी के लिए पोता बना श्रवण कुमार, 42 किलो जल के साथ कांवड़ में बैठाकर 45 KM की यात्रा पर निकला

Last Updated:August 22, 2026, 20:16 IST
Sikar Kanwar Yatra: सीकर में 21 साल के राहुल ने भक्ति और पारिवारिक प्रेम की अनोखी मिसाल पेश की है. राहुल कांवड़ के एक पलड़े में अपनी दादी को बैठाकर और दूसरे में 42 किलो जल लेकर करीब 45 किलोमीटर की पैदल तीर्थ यात्रा पर निकला. उसकी यह अनोखी यात्रा लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. लोग राहुल की तुलना भगवान राम के भक्त श्रवण कुमार से कर रहे हैं और उसकी श्रद्धा को सलाम कर रहे हैं.
ख़बरें फटाफट
Sikar News: सावन के महीने में सीकर में आस्था, भक्ति और परिवार के रिश्ते की ऐसी तस्वीर देखने को मिल रही है, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया है. जिस तरीके से श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता को कावड़ में बिठाकर तीर्थ यात्रा करवाई थी उसी तरीके से 21 साल के राहुल कुमार अपनी बुजुर्ग दादी लच्छी देवी को कांवड़ में बैठक तीर्थ यात्रा पर निकला है. वह कुल 45 किलोमीटर कीयह अनोखी पैदल कावड़ यात्रा कर रहा है. जिसमें कावड़ के एक पलड़े मे अपनी दादी को बैठा रखा है और दूसरे पलड़े में जल से भरी स्टील की मटकियां हैं. राहुल की यह यात्रा सिर्फ भगवान की भक्ति ही नहीं बल्कि दादी के प्रति सेवा की मिसाल भी बन गई है.
राहुल शेखावाटी के मिनी हरिद्वार कहे जाने वाले तीर्थराज लोहार्गल की यात्रा कर रहे हैं. वे गौमुख से जल लेकर गांव रामपुरा के लिए रवाना हुए हैं. उन्होंने 20 अगस्त को दोपहर करीब 2 बजे यात्रा शुरू की. पहले दिन रात रामपुरा और दूसरे दिन पिपराली में विश्राम किया. तीसरे दिन सीकर पहुंचे, जहां नगर सेठ के नाम से प्रसिद्ध कल्याण मंदिर में उनका जोरदार स्वागत किया गया. 23 अगस्त की शाम वे अपने गांव वापस पहुंचेंगे. इस दौरान परिवार के अन्य सदस्य भी राहुल के साथ हैं और उनका हौसला बढ़ा रहे हैं.
एक पलड़े में 42 किलो जल, दूसरे में बैठीं दादीराहुल के अनुसार कांवड़ के दोनों पलड़ों का कुल वजन करीब 81 किलो है. एक तरफ 42 किलो जल से भरी स्टील की मटकियां रखी गई हैं, जबकि दूसरे पलड़े में दादी लच्छी देवी चौकी पर बैठी हैं. राहुल ने बताया कि पहले उन्होंने लोहार्गल से करीब एक-एक क्विंटल जल लाने का विचार किया था, लेकिन बाद में श्रवण कुमार का भजन सुना. इसी से उन्हें दादी को कांवड़ में बैठाकर यात्रा करने का विचार आया. राहुल कहते हैं कि कांवड़ में जल लाना तो हर कोई करता है, लेकिन वे ऐसी कांवड़ लाना चाहते थे जो समाज के लिए एक मिसाल बने. उनके मन में विचार आया कि आज के दौर में भी सतयुग जैसी सेवा और संस्कार जीवित रह सकते है. इसी भावना के साथ उन्होंने अपनी दादी को कांवड़ में बैठाया और पैदल यात्रा शुरू कर दी.
हर 100 मीटर बाद लेते हैं थोड़ा आरामलंबी दूरी और भारी वजन के बावजूद राहुल लगातार आगे बढ़ रहे हैं. कांवड़ के मुख्य बांस के चारों तरफ फोम लपेटकर उसे मजबूत रस्सियों से बांधा गया है, ताकि यात्रा के दौरान संतुलन बना रहे. राहुल भगवान भोलेनाथ का नाम लेकर आगे बढ़ते हैं और करीब हर 100 मीटर के बाद थोड़ा आराम करते हैं. उनके साथ बनवारी लाल बरवड़, रोहित शर्मा, इंद्रपाल शेषमल और मनोज बरवड़ सहित परिवार के लोग सहयोग कर रहे हैं.
दादी बोलीं- अब तो श्मशान जाने का समय है, बच्चों ने तीर्थ करवा दियाकांवड़ में बैठी लच्छी देवी इस यात्रा से बेहद भावुक हैं. उन्होंने कहा कि उनके बच्चे और नाती-पोते ऐसे हैं, जो उन्हें तीर्थयात्रा करवा रहे हैं. उन्होंने कहा कि सारी मेहनत बच्चे कर रहे हैं और भगवान सबको ऐसे नाती-पोते दे. दादी ने भावुक होकर कहा कि अब तो श्मशान जाने का समय है, लेकिन बच्चों ने उन्हें तीर्थयात्रा करवा दी.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
और पढ़ेंLocation :
Sikar,Rajasthan
First Published :
August 22, 2026, 20:16 IST



