अमेठी में चाइनीज नहीं इको फ्रेंडली राखी भाईयों की कलाई पर बांधेंगी बहनें, समूह की महिलाएं कर रही हैं तैयार

Last Updated:August 24, 2026, 14:42 IST
अमेठी में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इको-फ्रेंडली राखियां बना रही हैं. इससे उन्हें रोजगार मिल रहा है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं. रक्षाबंधन का त्योहार बहनों और भाइयों का खास त्योहार माना जाता है. ऐसे में हर बार रक्षाबंधन को लेकर बहाने उत्साहित होती हैं कि उन्हें अपने भाइयों को राखी बांधकर उनसे अपनी रक्षा सूत्र का उपहार लेना है. ऐसे में अब चाइनीस राखी नहीं बल्कि इको फ्रेंडली राखी भाइयों के कलाइयों की शोभा बढ़ाएगी.
ख़बरें फटाफट
अमेठी: रक्षाबंधन का त्योहार बहनों और भाइयों का खास त्योहार माना जाता है. ऐसे में हर बार रक्षाबंधन को लेकर बहाने उत्साहित होती हैं कि उन्हें अपने भाइयों को राखी बांधकर उनसे अपनी रक्षा सूत्र का उपहार लेना है. ऐसे में अब चाइनीस राखी नहीं बल्कि इको फ्रेंडली राखी भाइयों के कलाइयों की शोभा बढ़ाएगी. महिलाएं जो स्वयं सहायता समूह में जुड़ी हैं. उन्हें राखी बनाना सिखाया जा रहा है और महिलाएं रक्षा सूत्र तैयार कर उससे रोजगार भी पा रही हैं. समूह की महिलाओं को तरह-तरह का काम समय-समय पर हर त्योहार पर सिखाया जाता है. जिससे महिलाओं को पूरे साल भर रोजगार उपलब्ध रहता है.
स्वयं सहायता की महिलाएं कर रहीं तैयार
अमेठी जिले में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को राखी बनाकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है अमेठी जिले में आससेटी संस्थान की तरफ से . महिलाएं अलग-अलग डिजाइन की राखियां जो पूरी तरीके से इको फ्रेंडली और शुद्ध है महिलाओं का मानना है कि समय-समय पर उन्हें अलग-अलग प्रोडक्ट बनाने सिखाए जाते हैं जिससे वह आत्मनिर्भर बन रही हैं वहीं मास्टर ट्रेनर का भी मानना है कि इससे महिलाओं के पास रोजगार भी होगा और महिलाएं आसानी से त्योहार के साथ-साथ आर्थिक रूप से समृद्ध भी होगी.
होता है आर्थिक फायदा
साई बाबा स्वयं सहायता समूह में जुड़ी महिला संतोषी देवी बताती है कि हम लोग समूह बनाए हैं और समूह के जरिए हम सब राखी बना रहे हैं. तरह-तरह का काम सीख रहे हैं हर त्यौहार पर कुछ ना कुछ प्रोडक्ट हम सब तैयार करते हैं. जिससे हमें समूह में अलग-अलग चीज सीखने का मौका भी मिलता है. इसके साथ ही आर्थिक फायदा भी होता है स्वयं सहायता समूह से हमारी किस्मत अच्छी चमक रही है और हमें अच्छा फायदा हो रहा है. उन्होंने कहा कि अब हमें किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नही और हमें रोजगार आसानी से मिला है.
वहीं एक और समूह में जुड़ी मुस्लिम महिला नजरीन बताती है कि बहुत ही फायदेमंद भाइयों की कलाई पर रखी काफी बेहतर तरीके से रक्षा सूत्र के साथ प्यार के बंधन को मजबूत करेगी हमें आरसेटी की तरफ से तरह-तरह के प्रशिक्षण दिए जाते हैं जिससे हमें हर बार कुछ न कुछ कर पूरे साल भर आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलता है.
महिलाओं को रोजगार का अवसर
वहीं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का प्रशिक्षण दे रही मास्टर ट्रेनर श्वेता बरनवाल बताती हैं कि यह पूरी तरीके से इको फ्रेंडली रखी है. इसमें धागा है मोटी है पमपम है कौड़ी है ऐसी तरह-तरह की चीजों से हम लोग तरह-तरह के रक्षा सूत्र तैयार कर रहे हैं महिलाओं को इससे रोजगार मिल सकता है और महिलाओं को अलग-अलग तरीके से अलग-अलग प्रोडक्ट बनाना सिखाया जा रहा है जिससे महिलाओं को रोजगार मिल रहा है.
About the AuthorRajneesh Kumar Yadav
Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
और पढ़ेंLocation :
Amethi,Lucknow,Uttar Pradesh
First Published :
August 24, 2026, 14:42 IST



