श्रीनाथजी की भक्ति में रंग भर रहे बीकानेर के डॉ. राकेश, रोचक है शुरूआत करने की कहानी

Last Updated:August 25, 2026, 12:42 IST
Shrinathji Painting Artist Dr. Rakesh Kiradue Story: बीकानेर की समृद्ध कला परंपरा के बीच डॉ. राकेश किराडू ने श्रीनाथजी की पेंटिंग के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है. कला की कई शैलियों में दक्ष होने के बावजूद उन्होंने भगवान कृष्ण और श्रीनाथजी के चित्रों को अपनी कला का केंद्र बनाया. नाथद्वारा शैली से प्रभावित उनकी पेंटिंग देश के कई हिस्सों तक पहुंच चुकी हैं. वह महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को चित्रकला का प्रशिक्षण भी देते हैं. उनकी 3डी शैली और प्राकृतिक रंगों से तैयार श्रीनाथजी की पेंटिंग लोगों को खास तौर पर आकर्षित करती हैं.
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बीकानेर के कलाकर डॉ. राकेश किराडू श्रीनाथजी की पेंटिंग के जरिए बनाई अपनी अलग पहचान
बीकानेर. राजस्थान का बीकानेर उस्ता कला, मथेरन कला और मिनिएचर पेंटिंग जैसी समृद्ध कला परंपराओं के लिए देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है. शहर में कई ऐसे कलाकार हैं, जिनकी कलाकृतियां देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों तक पहुंच चुकी हैं. लेकिन इन्हीं कलाकारों के बीच एक ऐसे चित्रकार भी हैं, जिन्होंने अपनी कला को भगवान श्रीनाथजी की भक्ति से जोड़कर एक अलग पहचान बनाई है. बीकानेर के चित्रकार डॉ. राकेश किराडू नाथद्वारा शैली में श्रीनाथजी की पेंटिंग बनाने के लिए खास तौर पर पहचाने जाते हैं. कला की दूसरी शैलियों में भी दक्ष होने के बावजूद उन्होंने श्रीनाथजी और भगवान कृष्ण के चित्रों को ही अपनी कला का प्रमुख आधार बनाया.
इसके पीछे उनके जीवन में वैष्णव परंपराओं और श्रीनाथजी के प्रति गहरी आस्था का बड़ा प्रभाव रहा है. पढ़ाई के सिलसिले में नाथद्वारा जाने के दौरान उन्होंने श्रीनाथजी के दर्शन किए और मंदिर की परंपरा के साथ वहां बनने वाली पेंटिंग ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि बीकानेर लौटने के बाद उन्होंने इसी शैली में काम करना शुरू कर दिया. शुरुआत में उन्होंने कागज और कपड़े पर शौकिया तौर पर पेंटिंग बनाईं. उस समय लोगों ने उनकी कला को ज्यादा नहीं समझा, लेकिन धीरे-धीरे उनकी बनाई श्रीनाथजी की पेंटिंग लोगों को पसंद आने लगी. आज बीकानेर में श्रीनाथजी की पेंटिंग बनवाने की बात होती है, तो डॉ. राकेश किराडू का नाम प्रमुखता से लिया जाता है.
500 से ज्यादा श्रीनाथजी की पेंटिंग बनाई
डॉ. राकेश किराडू अब तक 500 से अधिक श्रीनाथजी की पेंटिंग बना चुके हैं. उनकी बनाई कई कलाकृतियां देश के अलग-अलग शहरों में लोगों के घरों, धार्मिक स्थलों और संस्थानों की शोभा बढ़ा रही हैं. नाथद्वारा शैली से प्रभावित उनकी पेंटिंग में श्रीनाथजी के स्वरूप को बेहद बारीकी और भावनात्मक तरीके से उकेरा जाता है. प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल उनकी कला को और खास बनाता है. पेंटिंग में श्रीनाथजी का स्वरूप इतना जीवंत नजर आता है कि देखने वाले कुछ देर तक उसे निहारते रह जाते हैं.
महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को देते हैं प्रशिक्षण
चित्रकला को अपनी साधना बनाने वाले डॉ. राकेश किराडू कला के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं. वह महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में चित्रकला विभाग के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देते हैं. उनके विद्यार्थियों का कहना है कि बीकानेर में अलग-अलग कला शैलियों पर काम करने वाले कई कलाकार हैं, लेकिन श्रीनाथजी का विग्रह बनाने का काम बहुत कम लोग करते हैं. इसकी वजह यह है कि श्रीनाथजी की पेंटिंग तैयार करना बेहद बारीक और धैर्य वाला काम है. इसमें रंगों के साथ-साथ भाव और स्वरूप की बारीकियों का भी विशेष ध्यान रखना पड़ता है.
कला में भक्ति ने दिलाई अलग पहचान
डॉ. किराडू की श्रीनाथजी की पेंटिंग में कला और आस्था का अनोखा मेल दिखाई देता है. उनकी 3डी शैली की प्राकृतिक रंगों से तैयार कलाकृतियों में श्रीनाथजी के स्वरूप को बेहद भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया जाता है. यही वजह है कि उनकी पेंटिंग देखने वाले लोग आकर्षित हुए बिना नहीं रहते. विद्यार्थियों के मुताबिक बीकानेर में श्रीनाथजी का ऐसा स्वरूप तैयार करने वाले कलाकार बहुत कम हैं और डॉ. किराडू की इसी विशेषता ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है. डॉ. राकेश किराडू का अपनी कला को श्रीनाथजी और भगवान कृष्ण के चित्रों के लिए समर्पित करना उन्हें सबसे अलग बनाता है. बीकानेर में रहकर नाथद्वारा शैली की इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वह अपनी कला के जरिए ठाकुरजी के प्रति भक्ति और समर्पण को रंगों में उतार रहे हैं.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Bikaner,Rajasthan
First Published :
August 25, 2026, 12:42 IST



