क्रिकेट का सबसे रहस्यमयी खिलाड़ी, 0 रन-0 विकेट-0 कैच, फिर भी जिता गया मैच, बाद में मिला बड़ा सम्मान

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क्रिकेट का सबसे रहस्यमयी खिलाड़ी, 0 रन-0 विकेट-0 कैच, फिर भी जिता गया मैच
Last Updated:August 26, 2026, 06:01 IST
cricket uniqie records: वेस्टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाज कैमरून कफी ने अपनी कसी हुई गेंदबाजी के दम पर इस नामुमकिन से दिखने वाले कारनामे को हकीकत में बदला था. यह ऐतिहासिक मुकाबला आज से करीब दो दशक पहले 23 जून 2001 को कोका-कोला कप के दौरान हरारे स्पोर्ट्स क्लब में वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के बीच खेला गया थाबिना रन बनाए और बिना विकेट लिए कफी ने जीता था मैन आफ द मैच का पुरस्कार
नई दिल्ली. बड़ी पुरानी कहावत है कि जब उपर वाला देने पर आता है तो छप्पर फाड़कर देता है . ये आम जीवन से लेकर खेल के मैदान हर जगह लागू होती है. क्रिकेट के मैदान पर भी एक बार ऐसा ही देखने को मिला जब एक ऐसा खिलाड़ी सबकुछ ले उड़ा जब बड़े बड़े उस्ताद उम्मीद लगाए बैठे थे. आमतौर पर किसी खिलाड़ी को ‘मैन ऑफ द मैच’ का पुरस्कार तब मिलता है जब उसने बल्ले से ताबड़तोड़ रन बनाए हों, गेंदबाजी में विकेटों की झड़ी लगाई हो या मैदान पर कोई हैरतअंगेज कैच पकड़ा हो. लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कोई खिलाड़ी बिना एक भी रन बनाए, बिना कोई विकेट लिए और बिना कोई कैच पकड़े भी ‘मैन ऑफ द मैच’ बन जाए? जी हां, क्रिकेट के इतिहास में एक बार ऐसा अनोखा अजूबा हो चुका है.
वेस्टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाज कैमरून कफी ने अपनी कसी हुई गेंदबाजी के दम पर इस नामुमकिन से दिखने वाले कारनामे को हकीकत में बदला था. यह ऐतिहासिक मुकाबला आज से करीब दो दशक पहले 23 जून 2001 को कोका-कोला कप के दौरान हरारे स्पोर्ट्स क्लब में वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के बीच खेला गया था. इस मैच में जिम्बाब्वे ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया. पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज की टीम ने निर्धारित 50 ओवरों में 5 विकेट खोकर 266 रनों का एक मजबूत स्कोर खड़ा किया. विंडीज की तरफ से सलामी बल्लेबाज क्रिस गेल ने शानदार 53 रन और डैरेन गंगा ने बेहतरीन 66 रनों की पारियां खेलीं. चूंकि कैमरून कफी एक पुछल्ले बल्लेबाज थे और विंडीज के सिर्फ 5 विकेट गिरे थे, इसलिए कफी को इस पारी में बल्लेबाजी करने का मौका ही नहीं मिला और उनका स्कोर शून्य (0) रहा.
जिम्बाब्वे की पारी और कफी की ‘कंजूस’ गेंदबाजी
267 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम को रोकने के लिए वेस्टइंडीज के गेंदबाजों ने पूरा जोर लगा दिया. विंडीज की तरफ से स्पिनर मार्लन सैमुअल्स ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट झटके, वहीं तेज गेंदबाज मर्विन डिल्लन ने भी घातक गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट अपने नाम किए. इन शानदार प्रदर्शनों के बावजूद जिम्बाब्वे की टीम 50 ओवर में 9 विकेट खोकर केवल 239 रन ही बना सकी और वेस्टइंडीज ने यह मैच 27 रनों से जीत लिया. जब मैच खत्म होने के बाद ‘मैन ऑफ द मैच’ की घोषणा की गई, तो हर कोई हैरान रह गया. यह पुरस्कार न तो अर्धशतक लगाने वाले गेल या गंगा को मिला, और न ही 3-3 विकेट लेने वाले सैमुअल्स या डिल्लन को मिला. यह पुरस्कार दिया गया कैमरून कफी को.
आखिर क्यों मिला कफी को यह पुरस्कार?
कैमरून कफी ने इस मैच में 10 ओवर गेंदबाजी की, जिसमें 2 मेडन ओवर फेंके और बिना कोई विकेट लिए सिर्फ 20 रन दिए. उनका इकोनॉमी रेट महज 2.00 का था. साल 2001 के दौर में, जब बाकी सभी गेंदबाज 5 या 6 की इकोनॉमी से रन लुटा रहे थे, तब कफी ने जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों को पूरी तरह से बांध कर रख दिया था. उनके द्वारा बनाए गए इसी भारी दबाव के कारण जिम्बाब्वे के बल्लेबाज रन गति नहीं बढ़ा पाए और दूसरे छोर पर मौजूद सैमुअल्स और डिल्लन को विकेट मिलते चले गए. मैच के अंपायरों और रेफरी ने माना कि कफी की यह अत्यधिक अनुशासित और किफायती गेंदबाजी ही वेस्टइंडीज की जीत की असली चाबी थी. यही वजह है कि क्रिकेट इतिहास में उनका नाम हमेशा के लिए दर्ज हो गया कि “ना बनाए रन, ना लिया विकेट, ना लपका कैच, फिर भी बने मैन ऑफ द मैच”. यह स्पेल इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि क्रिकेट में प्रभाव केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि खेल की परिस्थितियों में पैदा किए गए दबाव से मापा जाता है.
About the AuthorRajeev MishraAssociate editor
राजीव मिश्रा, खेल पत्रकारिता में एक जाना पहचाना चेहरा है जो अपनी बेबाक विशलेषण के लिए जाने जाते है. वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स …
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New Delhi,Delhi
First Published :
August 26, 2026, 06:01 IST



