मजदूरी छोड़ शुरू किया बिजनेस, 40 का गुब्बारा 100 में बेचकर सरकारी नौकरी से ज्यादा कमा रहा राहुल

कोटा. कहते हैं कि कमाई के लिए हमेशा बड़े कारोबार या बड़ी पूंजी की जरूरत नहीं होती. अगर मेहनत, हुनर और सही जगह पर सामान बेचने की समझ हो, तो छोटा सा काम भी परिवार की जिंदगी बदल सकता है. इसकी मिसाल कोटा के नांता निवासी राहुल हैं. राहुल ने कुछ दिन बेलदारी का काम किया, लेकिन उन्हें उसमें ज्यादा मुनाफा नहीं लगा. फिर उन्होंने किसी को गुब्बारे बेचते देखा और बिना किसी झिझक के खुद भी यह काम शुरू करने का फैसला किया. होलसेल दुकान से लाइट वाले रंग-बिरंगे गुब्बारे खरीदकर बेचने शुरू किए और आज हर महीने करीब 30 से 35 हजार रुपए तक कमा रहे हैं.
राहुल बताते हैं कि उन्होंने शुरुआत मजदूरी से की थी. दिनभर मेहनत करने के बाद भी कमाई इतनी नहीं हो पाती थी कि परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो सकें. उन्होंने करीब 8 से 10 दिन बेलदारी का काम किया, लेकिन हाथ में ज्यादा पैसे नहीं बचे. ऐसे में उन्होंने कुछ अलग करने का फैसला किया और रोजगार की तलाश में दिल्ली पहुंच गए.
दिल्ली के सदर बाजार से मिला बिजनेस आइडियादिल्ली में राहुल ने सदर बाजार में एक व्यक्ति को लाइट वाले गुब्बारे बेचते देखा. उन्हें यह काम पसंद आया. उन्होंने उस व्यक्ति से गुब्बारों के बारे में जानकारी ली और पता किया कि ये गुब्बारे कहां से मिलते हैं. राहुल ने करीब 40 रुपए प्रति गुब्बारे की कीमत पर सामान खरीदा. शुरुआत में उन्होंने सिर्फ 5 गुब्बारे लिए. बाजार में इन्हें करीब 100 रुपए प्रति पीस के हिसाब से बेचा. 5 गुब्बारे बेचकर उन्हें 500 रुपए मिले. इसके बाद उन्होंने मुनाफे के पैसे खर्च करने के बजाय दोबारा सामान खरीदने में लगाए. यहीं से उनका छोटा कारोबार धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा.
5 गुब्बारों से शुरू हुआ सफर
पहली बिक्री में फायदा होने के बाद राहुल ने 10 गुब्बारे खरीदे. फिर बिक्री बढ़ी तो उन्होंने गुब्बारों की संख्या भी बढ़ानी शुरू कर दी. उनका मानना था कि कमाई का पैसा निकालकर खर्च करने के बजाय उसे दोबारा कारोबार में लगाया जाए. इसी तरीके से बिना बड़ी पूंजी लगाए उन्होंने अपना काम बढ़ाया. दिल्ली में यह काम सीखने के बाद राहुल ने अलग-अलग शहरों में जाकर भी गुब्बारे बेचे. पंजाब, सीकर और मुंबई जैसे शहरों में घूमकर उन्होंने इस कारोबार को आगे बढ़ाया और अलग-अलग बाजारों में ग्राहकों की पसंद को समझा.
कोटा में कोचिंग एरिया बना बड़ा बाजार
फिलहाल राहुल रक्षाबंधन के मौके पर अपने घर कोटा आए हुए हैं. उन्होंने कोटा शहर में नयापुरा, गुमानपुरा और सब्जी मंडी सहित कई जगहों पर गुब्बारे बेचने की कोशिश की. शुरुआत में बिक्री सामान्य रही, लेकिन जब वे कोटा के कोचिंग एरिया और लैंडमार्क सिटी पहुंचे तो युवाओं और छात्रों के बीच लाइट वाले गुब्बारों की अच्छी मांग दिखाई दी. राहुल के अनुसार, यहां लोग खासकर शाम के समय इन रंग-बिरंगे और रोशनी वाले गुब्बारों को पसंद करते हैं. कोटा में महज 4 दिनों में उन्होंने 3 हजार रुपए से ज्यादा की कमाई की.
30 से 35 हजार रुपए महीने तक कमाईराहुल का कहना है कि सीजन और बिक्री की जगह के हिसाब से कमाई में उतार-चढ़ाव रहता है, लेकिन अच्छे दिनों में वह महीने के करीब 30 से 35 हजार रुपए तक कमा लेते हैं. त्योहारों और भीड़भाड़ वाले दिनों में बिक्री और बढ़ जाती है. इस कारोबार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सामान की लागत कम है और सही जगह पर बिक्री करने पर अच्छा मुनाफा मिल जाता है. इसी वजह से उन्होंने छोटे स्तर से शुरू किए इस काम को धीरे-धीरे अपनी कमाई का मुख्य जरिया बना लिया.
कारोबार ने बदली परिवार की आर्थिक स्थितिराहुल का कहना है कि गुब्बारे बेचने से हुई कमाई ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने में मदद की है. पहले परिवार पर पुराना कर्ज था. कमाई बढ़ने के बाद धीरे-धीरे सारी उधारी चुका दी. इसके बाद बचत से मकान बनवाया और बाइक भी खरीदी. अब परिवार पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में है. माता-पिता और बड़ा भाई भी परिवार की जिम्मेदारियों में सहयोग करते हैं.
युवाओं के लिए छोटी पूंजी में बड़ा सबकराहुल की कहानी इस बात की मिसाल है कि कारोबार शुरू करने के लिए हमेशा लाखों रुपए की जरूरत नहीं होती. उन्होंने महज 5 गुब्बारों से शुरुआत की और बिक्री से मिले मुनाफे को दोबारा कारोबार में लगाया. लगातार मेहनत, बाजार की समझ और सही जगह पर बिक्री ने उनके इस छोटे से काम को कमाई का अच्छा जरिया बना दिया.



