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Pushkar Holy Places: पुष्कर के तीन पवित्र क्षेत्रों का क्या है रहस्य? एक कमल से जुड़ी है ब्रह्म पुष्कर की कहानी

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पुष्कर के तीन पवित्र क्षेत्रों का क्या है रहस्य? जानिए इससे जुड़ी पौराणिक कथाएं

Last Updated:August 27, 2026, 06:15 IST

Mythological Story of Pushkar: अजमेर जिले की धार्मिक नगरी पुष्कर सिर्फ भगवान ब्रह्मा के प्रसिद्ध मंदिर के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी पौराणिक मान्यताओं और तीन पवित्र पुष्कर क्षेत्रों के लिए भी विशेष पहचान रखती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार ब्रह्म पुष्कर, मध्य पुष्कर और बूढ़ा पुष्कर का संबंध भगवान ब्रह्मा के हाथ में मौजूद कमल के पुष्प से है. पौराणिक कथा के मुताबिक सृष्टि की रचना के बाद भगवान ब्रह्मा ने लोक कल्याण के लिए एक बड़े यज्ञ का संकल्प लिया था. यज्ञ के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश के दौरान उन्हें आकाशवाणी के जरिए अपने हाथ में रखे कमल के पुष्प को आकाश की ओर छोड़ने का संकेत मिला. मान्यता है कि कमल का पुष्प तीन अलग-अलग स्थानों पर गिरा. जहां पहला पुष्प गिरा, वहां बूढ़ा पुष्कर, दूसरे स्थान पर मध्य पुष्कर और तीसरे स्थान पर ब्रह्म पुष्कर का निर्माण हुआ. इसी वजह से पुष्कर के इन तीनों क्षेत्रों को धार्मिक दृष्टि से बेहद पवित्र माना जाता है.

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अजमेर. धार्मिक नगरी पुष्कर अपनी आस्था, पौराणिक मान्यता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है. यहां भगवान ब्रह्मा का प्रसिद्ध मंदिर होने के साथ ही कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जिनका संबंध प्राचीन कथाओं में भी मिलता है. पुष्कर की खास पहचान यहां के तीन पवित्र क्षेत्रों ब्रह्म पुष्कर, मध्य पुष्कर और बूढ़ा पुष्कर से भी जुड़ी हुई है. धार्मिक मान्यता है कि इन तीनों पुष्करों का निर्माण भगवान ब्रह्मा के हाथ में मौजूद कमल के पुष्प से हुआ है.

कपालेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पौराणिक कथा के अनुसार सृष्टि की रचना के बाद भगवान ब्रह्मा ने धरती पर लोक कल्याण के लिए एक बड़ा यज्ञ करने का संकल्प लिया. यज्ञ के भगवान ब्रह्मा को एक ऐसे स्थान की तलाश थी‌ जो पवित्र और धार्मिक कार्य के लिए उपयुक्त हो. यज्ञ के लिए सर्वोत्तम स्थान को लेकर भगवान ब्रह्मा चिंतित हुए तो ब्रह्मा जी को आकाशवाणी के माध्यम से संकेत मिला कि वे अपने हाथ में रखे कमल के पुष्प को आकाश की ओर छोड़ें. जिस स्थान पर कमल का पुष्प गिरेगा, वही स्थान यज्ञ के लिए सबसे उपयुक्त माना जाएगा.

पुष्कर के तीन पवित्र क्षेत्रों का निर्माण इस तरह हुआ

ब्रह्मा जी ने कमल का पुष्प गगन की ओर छोड़ा और वह तीन अलग-अलग स्थानों पर गिरा. पहली जगह जहां गिरा तो वह बूढ़ा पुष्कर बना. इसके बाद दूसरे स्थान पर मध्य पुष्कर और तीसरे स्थान पर ब्रह्म पुष्कर का निर्माण हुआ. इस तरह एक कमल के पुष्प से पुष्कर के तीन पवित्र क्षेत्र अस्तित्व में आने की मान्यता है.

पौराणिक मान्यताओं के कारण विशेष महत्व है

धार्मिक नगरी पुष्कर के यह तीनों हिस्सों की कथा आज भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है. अपनी पौराणिक मान्यताओं के कारण पुष्कर देश दुनिया में विशेष महत्व रखता है. यहां आने वाले श्रद्धालु ब्रह्म पुष्कर के साथ मध्य पुष्कर और बूढ़ा पुष्कर की धार्मिक महत्ता को भी समझते हैं.

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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Ajmer,Rajasthan

First Published :

August 27, 2026, 06:15 IST

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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