जन्माष्टमी पर मेरठ के महाभारत कालीन मंदिरों में करें भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन, जानें हस्तिनापुर और परीक्षितगढ़ किला का महत्व

Last Updated:August 29, 2026, 09:20 IST
जन्माष्टमी पर मेरठ के मंदिरों में भगवान कृष्ण की पूजा होती है. हस्तिनापुर, किला परीक्षितगढ़, औघडनाथ मंदिर और इस्कॉन मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं. जिसकी गवाही आज भी मेरठ से 45 किलोमीटर दूर हस्तिनापुर देते हुए दिखाई देता है. हस्तिनापुर से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर रिसर्च करते आ रहे एक्सपर्ट असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती के अनुसार हस्तिनापुर और किला परीक्षितगढ के कण कण में भगवान श्री कृष्ण का निवास है. यहां विभिन्न ऐसे मंदिर भी बने हुए हैं. जिनके बारे में किंदंवती है कि भगवान श्री कृष्णा का यहां नाता रहा है.
जन्माष्टमी का पावन पर्व नजदीक है. ऐसे में देखने को मिलता है कि भगवान कान्हा के भक्त विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करते हुए नजर आते हैं. साथ ही ऐसे मंदिरों की भी तलाश करते हैं. जहां वह भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना कर सके. ऐसे सभी भक्तों के लिए मेरठ भी बेहद खास है क्योंकि मेरठ को महाभारत कालीन धरती के तौर पर जाना जाता है.
जिसकी गवाही आज भी मेरठ से 45 किलोमीटर दूर हस्तिनापुर देते हुए दिखाई देता है. हस्तिनापुर से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर रिसर्च करते आ रहे एक्सपर्ट असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती के अनुसार हस्तिनापुर और किला परीक्षितगढ के कण कण में भगवान श्री कृष्ण का निवास है. यहां विभिन्न ऐसे मंदिर भी बने हुए हैं. जिनके बारे में किंदंवती है कि भगवान श्री कृष्णा का यहां नाता रहा है.
उन्होंने बताया कि सर्वप्रथम जब आप मेरठ के महाभारत कालीन हस्तिनापुर स्थित द्रोपदी मंदिर जाएंगे. तो वहां आपको एक अनोखा ही नजारा देखने को मिलेगा. जहां द्रौपदी मंदिर में भगवान श्री कृष्णा भी विराजमान है. यह मंदिर चीर हरण की उस दास्तान को दर्शाता है. जब द्रोपदी द्वारा भगवान श्री कृष्ण का आवाहन किया गया था. तो किस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने उनकी लाज बचाई थी.
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कुछ इसी तरह का उल्लेख की किला परीक्षितगढ़ का भी मिलता है. कहा जाता है कि जब महाभारत कालीन युद्ध की शुरुआत हुई थी. उस युद्ध को रुकवाने के लिए भी भगवान श्री कृष्ण ने काफी प्रयास किए थे. इसी प्रयास के अंतर्गत वह किला परीक्षितगढ़ स्थित गांधारी तालाब के पास भी पहुंचे थे. जहां उन्होंने रात्रि विश्राम करते हुए संधि कराने का प्रयास किया था. हालांकि वर्तमान में यहां प्राचीन शिव मंदिर बना हुआ है. साथ ही वह पेड़ भी मौजूद है.
मेरठ केंट स्थित ऐतिहासिक औघडनाथ मंदिर में भी भगवान श्री राधा कृष्ण विराजमान इस मंदिर के प्रति भी भक्तों में अनोखी आस्था देखने को मिलती है. जन्माष्टमी के पावन पर पर यहां देश-विदेश के फूलों से जहां भगवान श्री कृष्ण के मंदिर को सजाया जाता है. जो भी श्रद्धालु भगवान श्री कृष्णा और राधा मैया की पूजा अर्चना करते हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. यहां पर खास तौर पर जन्माष्टमी के पावन पर वही चांदी के पालने पर भगवान श्री लड्डू गोपाल को झुलाया जाता है.
कहा जाता है भगवान श्री कृष्णा और भक्तों का अनोखा रिश्ता होता है. इसी रिश्ते की वानगी को बयां करता है बुढाना गेट स्थित श्री बालाजी का मंदिर यहां भगवान श्री राधा कृष्ण भी विराजमान है. मंदिर कार्य समिति के पदाधिकारी डॉ गौरव पाठक के अनुसार यहां पर भगवान श्री कृष्णा और राधा मैया की चांदी की मूर्ति स्थापना करने के लिए उनकी दादी द्वारा अपने सभी जेवरों को भी बेचकर उनकी मूर्ति की स्थापना की थी. ऐसे में यहां भी भक्तों की विशेष आस्था देखने को मिलती है.
मेरठ सराफा स्थित भगवान श्री कृष्ण के मंदिर के प्रति भी भक्तों की देखने को मिलती है. सर्राफा व्यापारियों द्वारा हर साल यहां धूमधाम से जन्माष्टमी के पावन पर्व का आयोजन किया जाता है. यहां पर अनोखे अंदाज में पूजा अर्चना की जाती है. कभी यहां चांदी और हीरे मुकुट भगवान श्री कृष्ण को पहनाए जाते हैं. जो कभी यहां उनका अद्भुत तरीके से सिंगार किया जाता है. मान्यता है जो भी मांगते हैं भक्तों को सब कुछ मिलता है.
बताते चले कि इसी तरह इस्कॉन के प्रति भक्तों में काफी आस्था देखने को मिलती है. जहां श्रद्धालु हरे रामा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे के मत्रों पर झूमते हुए नजर आते हैं. ऐसे में मेरठ के शास्त्री नगर में भी भगवान श्री कृष्ण का इस्कॉन द्वारा मंदिर स्थापित किया गया है. यहां भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं आपको पूजा अर्चना करते हुए दिखाई देंगे. खास बात यह कि यहां पर इस्कॉन पद्धति के अनुसार ही पूजा अर्चना की जाती है.
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August 29, 2026, 09:20 IST



