जोधपुर में रक्षाबंधन पर तालाब में उतरी सदियों पुरानी परंपरा, भाई-बहन ने निभाई अनोखी रस्म

Last Updated:August 29, 2026, 08:51 IST
Jodhpur Raksha Bandhan Samand Hilorna Tradition: रक्षाबंधन के मौके पर जोधपुर के लूणावास खारा गांव में राजस्थानी लोक संस्कृति की अनूठी तस्वीर देखने को मिली. गवाली तालाब पर सैकड़ों महिलाएं एक जैसी पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर मंगल कलश सजाकर पहुंचीं. ढोल और थाली की धुन पर मंगल गीत गाते हुए महिलाओं ने तालाब की चार परिक्रमा की. इसके बाद भाई-बहनों ने सदियों पुरानी ‘समंद हिलोरने’ की रस्म निभाई. दोनों ने एक-दूसरे को तालाब का जल पिलाकर भाई-बहन के अटूट प्रेम और रिश्ते की मजबूती की कामना की. बाद में भाई ने बहन को चुनरी ओढ़ाई. गांव की भोर के राही टीम की ओर से व्यवस्थाएं की गईं और श्रद्धालुओं को मात-गुगरी का प्रसाद वितरित किया गया.
ख़बरें फटाफट
जोधपुर. आधुनिकता की इस दौड़ में जहां गांवों की पुरानी परंपराएं धीरे-धीरे पीछे छूटती जा रही है, वहीं जोधपुर के समीप लूणावास खारा गांव में आज भी सदियों पुरानी संस्कृति उसी उत्साह और आस्था के साथ जीवंत नजर आती है. गवाली तालाब पर रक्षाबंधन के अवसर पर ऐसा ही अनूठा नजारा देखने को मिला, जब सैकड़ों की संख्या में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर पहुंचीं और भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक मानी जाने वाली समंद हिलोरने की परंपरा का निर्वहन किया. सिर पर मंगल कलश, चेहरे पर उत्साह और होठों पर मंगल गीत लिए महिलाओं की टोलियां जब तालाब की ओर बढ़ीं तो मानो पूरा गांव राजस्थानी संस्कृति के रंग में रंग गया.
ढोल और थाली की मधुर धुन के बीच महिलाओं के नाचते-गाते पहुंचने का दृश्य हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा था. गवाली तालाब पहुंचने के बाद महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार तालाब की चार परिक्रमा लगाई. इसके बाद बहनों ने अपने भाइयों के साथ मिलकर ‘समंद हिलोरने’ की परंपरा निभाई.इस दौरान भाई ने अपनी बहन को तालाब का जल पिलाया और बहन ने भी भाई को तालाब का जल पिलाकर भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती और प्रेम की कामना की.
भाई ने अपनी बहन को चुनरी ओढ़ाकर आशीर्वाद दिया
रस्म पूरी होने के बाद भाई ने अपनी बहन को चुनरी ओढ़ाकर आशीर्वाद दिया. एक जैसी पारंपरिक वेशभूषा में सैकड़ों महिलाओं की मौजूदगी और सिर पर सजे मंगल कलश ने पूरे माहौल को बेहद खास बना दिया. महिलाएं मंगल गीत गाते हुए परंपरा निभाती नजर आईं तो ऐसा लगा जैसे राजस्थान की पुरानी लोक संस्कृति एक बार फिर आंखों के सामने जीवंत हो उठी हो. इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए पूरा गांव गवाली तालाब पर उमड़ पड़ा. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते और पारंपरिक आयोजन का साक्षी बना. गांव की भोर के राही टीम की ओर से आयोजन में विशेष व्यवस्थाएं की गई थी.
प्रसाद में बांटी गई मात-गुगरी
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और ग्रामीणों में उत्साह देखते ही बन रहा था. परंपरा के साथ आटे से तैयार की गई मात और गुगरी भी लोगों में प्रसाद स्वरूप वितरित की गई, जिसे श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ ग्रहण किया. आधुनिकता के इस दौर में लूणावास खारा के गवाली तालाब पर दिखाई दी. यह तस्वीर यही संदेश देती नजर आई कि समय कितना भी बदल जाए, गांवों की मिट्टी से जुड़ी संस्कृति और भाई-बहन के प्रेम की ये अनमोल परंपराएं आज भी लोगों के दिलों में उसी तरह जिंदा हैं.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
और पढ़ेंLocation :
Jodhpur,Rajasthan
First Published :
August 29, 2026, 08:51 IST



