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राजस्थान हाईकोर्ट से कारोबारी ज्ञान चंद अग्रवाल केस की फाइलें गायब, SC ने कहा- रजिस्ट्रार जनरल से करें संपर्क

Last Updated:August 30, 2026, 12:09 IST

Rajasthan High Court Records Missing Case: राजस्थान हाईकोर्ट में रजिस्ट्री की फाइल नहीं मिलने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है. यह फाइल कारोबारी ज्ञान चंद अग्रवाल केस से जुड़ी हुई है. अग्रवाल और दो अन्य आरोपियों ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को खत्म करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी. इन याचिकाओं से जुड़े रिकॉर्ड 10 अप्रैल को क्रिमिनल ब्रांच में नहीं मिले. हाईकोर्ट ने ज्यूडिशियल रजिस्ट्रार से रिपोर्ट मांगी, लेकिन 22 अप्रैल को रिपोर्ट को अपर्याप्त बताया. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त को एसएलपी खारिज करते हुए हाईकोर्ट की कार्यवाही में हस्तक्षेप से इनकार किया. कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड नहीं मिल रहे हों तो रजिस्ट्रार जनरल से संपर्क कर दस्तावेज तलाशे जा सकते हैं. रिकॉर्ड गायब होने से जुड़ी घटना को जानबूझकर की गई कार्रवाई मानने का अभी कोई आधार नहीं है.

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राजस्थान हाईकोर्ट में अग्रवाल केस की फाइलें गायब, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामलाZoom

जयपुर. राजस्थान हाईकोर्ट में कारोबारी ज्ञान चंद अग्रवाल और दो अन्य आरोपियों से जुड़े मामलों की फाइलें नहीं मिलने का मामला सामने आया है. ये फाइलें हाईकोर्ट की क्रिमिनल ब्रांच में रखी थीं और 10 अप्रैल 2026 को इनके नहीं मिलने की जानकारी सामने आई. इसके बाद हाईकोर्ट में रिकॉर्ड रखने और उन्हें समय पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने राजस्थान हाईकोर्ट के प्रशासनिक कामकाज को लेकर अलग आरोप लगाए हैं. हालांकि उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड में इन दोनों मामलों के बीच कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है. केवल रिकॉर्ड नहीं मिलने से यह साबित नहीं होता कि फाइलें जानबूझकर गायब की गईं या इसमें किसी तरह की गड़बड़ी हुई.

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ज्ञान चंद अग्रवाल और दो अन्य आरोपियों ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को खत्म करने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थी. इन याचिकाओं से जुड़ी फाइलें 10 अप्रैल को रजिस्ट्री की क्रिमिनल ब्रांच में नहीं मिलीं. इसकी जानकारी मिलने के बाद हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी. रजिस्ट्री की ओर से रिपोर्ट अदालत में पेश की गई, लेकिन 22 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं माना. इस दौरान आरोपी को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम राहत जारी रही और मामले की सुनवाई भी चलती रही.

सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी खारिज की

इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. 10 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही में दखल देने से इनकार कर दिया और एसएलपी खारिज कर दी. हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट में लंबित मामले की जल्द सुनवाई की मांग करने की अनुमति दी. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जरूरी रिकॉर्ड हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में नहीं मिल रहे हैं तो याचिकाकर्ता रजिस्ट्रार जनरल से संपर्क कर सकता है. रजिस्ट्रार जनरल के स्तर पर दस्तावेज तलाशने की कोशिश की जा सकती है और मिलने पर उन्हें हाईकोर्ट के सामने रखा जा सकता है.

2023 में एसओजी ने दर्ज की थी एफआईआर

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ज्ञान चंद अग्रवाल से जुड़ा मूल मामला राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप यानी एसओजी की ओर से 2023 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है. एफआईआर में धोखाधड़ी, भरोसा तोड़ने, जालसाजी और साजिश जैसे आरोप लगाए गए थे. याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट के पहले के निर्देश के बावजूद अग्रवाल जांच में शामिल नहीं हुए. इसके बावजूद उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिलती रही. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त के अपने आदेश में इन आरोपों को सही या गलत नहीं बताया. कोर्ट ने यह भी तय नहीं किया कि हाईकोर्ट में रिकॉर्ड क्यों नहीं मिला या इसके लिए कौन जिम्मेदार है.

जस्टिस मेहता के आरोपों से कोई सीधा संबंध नहीं

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जस्टिस संदीप मेहता ने राजस्थान हाईकोर्ट के कामकाज को लेकर अलग आरोप लगाए हैं. लेकिन अभी तक उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड में इन आरोपों और अग्रवाल से जुड़े मामले की फाइलें नहीं मिलने के बीच कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है. अदालत में सामने आई जानकारी में जस्टिस मेहता के दावों का जिक्र जरूर है, लेकिन इस मामले में अदालत ने इन दावों पर कोई स्वतंत्र फैसला नहीं दिया है. वहीं फाइलों का नहीं मिलना यह जरूर दिखाता है कि अदालत में चल रहे मामलों के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना और जरूरत के समय उन्हें उपलब्ध कराना कितना जरूरी है. खासकर उन मामलों में जहां किसी आरोपी को गिरफ्तारी से राहत मिली हो और मामला अदालत में लंबित हो, वहां संबंधित दस्तावेज समय पर मिलना जरूरी है. इस मामले में आगे की जानकारी रजिस्ट्री की जांच और अदालत की कार्यवाही से सामने आ सकती है.

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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Jaipur,Rajasthan

First Published :

August 30, 2026, 11:55 IST

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