उदयपुर नगर निगम चुनाव में कांटे की टक्कर, BJP का दबदबा टूटेगा या कांग्रेस करेगी बड़ा उलटफेर?

Last Updated:September 06, 2026, 13:07 IST
Udaipur Nagar Nikay Chunav Ground Report: उदयपुर नगर निगम चुनाव को लेकर शहर की सियासत गरमा गई है. 80 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी प्रचार में जुटे हैं, वहीं कई वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है. उदयपुर नगर निगम में पिछले छह बोर्ड से भाजपा का दबदबा रहा है और अब सातवें बोर्ड को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच जोरदार मुकाबला है. इस चुनाव में स्मार्ट सिटी के तहत हुए विकास कार्य, सड़क, ट्रैफिक, पार्किंग और ड्रेनेज जैसे स्थानीय मुद्दे अहम हो सकते हैं. पर्यटन नगरी उदयपुर की झीलों, ऐतिहासिक धरोहर और खूबसूरती को बचाते हुए विकास की नई दिशा तय करना भी नए बोर्ड के सामने बड़ी चुनौती होगी. करीब 17 वार्डों में मजबूत निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने भाजपा-कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है.
उदयपुर. नगर निगम चुनाव को लेकर उदयपुर शहर की सियासत इन दिनों पूरी तरह गरमाई हुई है. शहर के 80 वार्डों में चुनावी माहौल बन चुका है और भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी जोर-शोर से प्रचार में जुटे हुए हैं. पिछले छह बोर्ड से उदयपुर नगर निगम में भाजपा का दबदबा रहा है, लेकिन इस बार सातवें बोर्ड को लेकर राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं. शहर में बदलाव की चर्चा के साथ ही कई वार्डों में मुकाबला बेहद कांटे का दिखाई दे रहा है. इस बार चुनावी मैदान में भाजपा और कांग्रेस के कई पुराने और चर्चित चेहरे आमने-सामने हैं. दोनों ही दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं.
प्रत्याशी घर-घर संपर्क कर रहे हैं और मतदाताओं से विकास के नाम पर समर्थन मांग रहे हैं. वहीं, स्थानीय मुद्दों को लेकर भी प्रत्याशी लगातार जनता के बीच अपनी बात रख रहे हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार और अधिक तेज होने की उम्मीद है. उदयपुर शहर में पिछले वर्षों में स्मार्ट सिटी के नाम पर हुए काम भी इस चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकते हैं. शहरवासियों का कहना है कि स्मार्ट सिटी के तहत कई महत्वपूर्ण विकास कार्य हुए, लेकिन कुछ जगहों पर काम की गुणवत्ता, यातायात व्यवस्था, सड़क निर्माण, पार्किंग और ड्रेनेज जैसी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल भी उठे.जनता चाहती है कि आने वाला बोर्ड उदयपुर की खूबसूरती और विरासत को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाए.
17 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों की स्थिति मजबूत
शहरवासियों की सबसे बड़ी उम्मीद ऐसे जनप्रतिनिधियों से है जो उदयपुर की पहचान और पर्यटन को ध्यान में रखते हुए विकास की नई दिशा तय करें. उदयपुर देश-दुनिया में अपनी झीलों,प महलों, ऐतिहासिक धरोहर और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है. ऐसे में शहर की मौजूदा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करना भी नए बोर्ड के सामने बड़ी चुनौती होगी. इधर इस बार निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी भाजपा और कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है. करीब 17 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं. इनमें कुछ ऐसे चेहरे भी हैं जिनका अपने वार्ड में व्यक्तिगत प्रभाव और मजबूत जनसंपर्क है. यही वजह है कि कई वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बनती दिखाई दे रही है.
क्या भाजपा लगातार 7वीं बार अपना बोर्ड बनाने में सफल हो पाएगी?
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में पूरी ताकत झोंक रहे हैं. बड़े नेता और स्थानीय पदाधिकारी भी प्रचार में सक्रिय हैं. वहीं निर्दलीय प्रत्याशी भी मतदाताओं के बीच पहुंचकर दोनों प्रमुख दलों से अलग विकल्प के तौर पर खुद को पेश कर रहे हैं. अब देखना होगा कि उदयपुर की जनता इस बार किसे अपना समर्थन देती है. क्या भाजपा लगातार सातवीं बार अपना बोर्ड बनाने में सफल होगी या कांग्रेस बदलाव की उम्मीद को वोट में बदल पाएगी? या फिर मजबूत निर्दलीय प्रत्याशी कई वार्डों में बड़ा उलटफेर करेंगे? इन सवालों का जवाब चुनाव परिणाम आने के बाद ही मिलेगा. फिलहाल उदयपुर की 80 वार्डों की सियासत में मुकाबला दिलचस्प और कांटे का होता दिखाई दे रहा है.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Udaipur,Rajasthan
First Published :
September 06, 2026, 13:07 IST



