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Famous Temple: मेवाड़ से जयपुर कैसे पहुंचे मोतीडूंगरी गणेश? 1761 की कहानी में छिपा है मंदिर का पूरा इतिहास

Last Updated:September 10, 2026, 06:46 IST

Jaipur Famous Moti Doongri Ganesh Temple: जयपुर का मोतीडूंगरी गणेश मंदिर गुलाबी नगरी के प्रथम आराध्य श्रीगणेश के प्रमुख मंदिरों में शामिल है. गणेश चतुर्थी पर यहां देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर की स्थापना वर्ष 1761 में हुई थी और इससे जुड़ी कहानी जयपुर के तत्कालीन राजा सवाई माधोसिंह से जुड़ी है, जो मेवाड़ के मावली से भगवान गणेश की प्रतिमा जयपुर लेकर आए थे. बुधवार को मंदिर में विशेष रूप से श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है. नए वाहन या नए काम की शुरुआत से पहले भी लोग गणेशजी का आशीर्वाद लेने यहां पहुंचते हैं. मनोकामना के लिए धागा बांधने की परंपरा भी यहां देखने को मिलती है.मेवाड़ से जयपुर कैसे पहुंचे मोतीडूंगरी गणेश? 1761 की रोचक कहानीZoomजयपुर का मोतीडूंगरी गणेश मंदिर गुलाबी नगरी के प्रथम आराध्य श्रीगणेश के प्रमुख मंदिरों में शामिल है.

जयपुर. गणेश चतुर्थी का पर्व हो और जयपुर के मोतीडूंगरी गणेश मंदिर की चर्चा न हो, ऐसा शायद ही संभव है. गुलाबी नगरी के प्रथम आराध्य माने जाने वाले मोतीडूंगरी श्रीगणेश मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है. गणेश चतुर्थी के मौके पर यहां आस्था का खास नजारा देखने को मिलता है. जयपुर ही नहीं, राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों और देश-विदेश से श्रद्धालु यहां भगवान गणेश के दर्शन करने पहुंचते हैं. भक्तों के बीच मान्यता है कि मंदिर में विराजमान श्रीगणेश की सिंदूरी प्रतिमा के दर्शन करने और सच्चे मन से प्रार्थना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं.  यही वजह है कि इस मंदिर का रिश्ता सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि जयपुर की पहचान और लोगों की भावनाओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है.

मोतीडूंगरी गणेश मंदिर का इतिहास करीब ढाई सौ साल पुराना बताया जाता है. जयपुर की स्थापना के 34 साल बाद वर्ष 1761 में इस मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई थी. मंदिर की स्थापना से जुड़ी कहानी भी बेहद रोचक है. बताया जाता है कि गणेशजी की यह भारी-भरकम प्रतिमा तत्कालीन राजा सवाई माधोसिंह मेवाड़ के मावली से जयपुर लेकर आए थे. सवाई माधोसिंह जयपुर के संस्थापक सवाई जयसिंह और सिसोदिया रानी चंद्रकुंवर के पुत्र थे. उनका मेवाड़ से पारिवारिक रिश्ता था. ऐतिहासिक परिस्थितियों के बीच जब माधोसिंह को जयपुर की राजगद्दी मिली, तब वे मेवाड़ से भगवान गणेश की प्रतिमा अपने साथ जयपुर लेकर आए और मोतीडूंगरी में इसकी स्थापना करवाई. इसके बाद से यह स्थान धीरे-धीरे जयपुर के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में शामिल हो गया.

हर बुधवार उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में बुधवार का दिन विशेष माना जाता है. जयपुर और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिन भगवान गणेश के दर्शन करने पहुंचते हैं. बुजुर्गों से लेकर युवा, महिलाएं और बच्चे, हर वर्ग के लोगों की मंदिर के प्रति गहरी आस्था है. भक्तों के बीच यह भी मान्यता है कि किसी नए काम की शुरुआत करने से पहले भगवान गणेश का आशीर्वाद लेना शुभ होता है. यही कारण है कि लोग नया वाहन खरीदने के बाद सीधे मोतीडूंगरी गणेश मंदिर पहुंचते हैं. कई लोग अपने घर, कारोबार या दूसरे शुभ कामों के लिए भगवान गणेश को निमंत्रण देने भी मंदिर आते हैं.

मनोकामना के लिए बांधते हैं धागा

मंदिर में अपनी मनोकामना लेकर आने वाले श्रद्धालु अलग-अलग तरीके से भगवान गणेश के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं. इनमें मंदिर परिसर में धागा बांधना भी शामिल है. भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना और भगवान गणेश की कृपा से उनकी मनोकामना पूरी होती है. मंदिर के महंत पंडित कैलाश शर्मा के अनुसार, मोतीडूंगरी गणेशजी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है. यहां आने वाले भक्त सिर्फ जयपुर या राजस्थान से ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों से भी पहुंचते हैं.

गणेश चतुर्थी पर बढ़ जाता है आस्था का रंग

गणेश चतुर्थी के दौरान मोतीडूंगरी गणेश मंदिर की रौनक देखते ही बनती है. मंदिर में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. इस दौरान भगवान गणेश के विशेष पूजन और दर्शन को लेकर भक्तों में खास उत्साह रहता है. मंदिर और आसपास का इलाका गणपति भक्ति से सराबोर नजर आता है. मोतीडूंगरी गणेश मंदिर आज सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि जयपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा है. सदियों से चली आ रही परंपरा, भगवान गणेश के प्रति लोगों की आस्था और हर वर्ग के श्रद्धालुओं की मौजूदगी इसे खास बनाती है. गुलाबी नगरी में आने वाले लोगों के लिए भी मोतीडूंगरी गणेश मंदिर जयपुर की पहचान से जुड़े प्रमुख स्थलों में शामिल है.

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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Jaipur,Rajasthan

First Published :

September 10, 2026, 06:46 IST

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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