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भारत की सबसे महंगी चाइल्ड आर्टिस्ट , जिसकी मां ने अफेयर में लुटा दी कमाई, श्रीदेवी की बनी आवाज

Last Updated:September 11, 2026, 20:05 IST

घर चलाने के लिए पैसे कमाना किसी बच्चे का काम नहीं है, मगर कई सितारों ने चाहते-न चाहते हुए हिंदी सिनेमा में काम किया. यह हमेशा से बच्चों के लिए बेरहम जगह रही है. उन्हें खेलने-कूदने की उम्र में अपने से दोगुनी उम्र के लोगों के बीच काम करते हुए बड़ा होना पड़ा. बेबी नाज भी उन्हीं में से एक थीं. वे इंडिया की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली चाइल्ड स्टार थीं. उन्होंने कई फिल्मों में श्रीदेवी के लिए डबिंग भी की थी.

नई दिल्ली: मशहूर चाइल्ड आर्टिस्ट बेबी नाज की जिंदगी के बारे में जानने के बाद लगता है कि मां का दिल भी अपने बच्चों के लिए कठोर हो सकता है. वे ‘बूट पॉलिश’ की सफलता के बाद बहुत मशहूर हो गई थीं. तब राज कपूर ने बेबी नाज की स्विट्जरलैंड में पढ़ाई का खर्च उठाने का ऑफर दिया था, मगर उनकी मां ने मना कर दिया. राज कपूर ने वादा किया कि वे लौटने के बाद नाज को लॉन्च करेंगे, मगर उनकी मां को डर था कि अगर नाज लंबे वक्त तक कमाई नहीं करेंगी तो परिवार कैसे चलेगा.(फोटो साभार: X@FilmHistoryPic)

बेबी नाज ने चार साल की उम्र से ही अपने परिवार के लिए कमाना शुरू कर दिया था. उन्होंने 120 फिल्मों में काम किया, मगर कभी पैसे नहीं बचा सकीं, क्योंकि उनकी मां ने सारे पैसे उस आदमी पर खर्च कर दिए जिसके साथ उनका अफेयर चल रहा था. बेबी नाज को साल 1955 में कान्स फिल्म फेस्टिवल में ‘बूट पॉलिश’ के लिए ‘स्पेशल मेंशन’ अवॉर्ड मिला था. वे फिल्म सेट पर बड़ी हुईं और ‘बूट पॉलिश’ जैसी फिल्मों में राज कपूर जैसे सितारों से बहुत प्यार मिला, मगर घर पर उनकी जिंदगी बहुत दुखभरी थी. (फोटो साभार: AI की मदद से बनी फोटो)

बेबी नाज का असली नाम सलमा बेग था. उन्होंने 4 साल की उम्र में स्टेज पर डांस करना शुरू कर दिया था. उन्हें स्क्रीन पर दिखने वाली हीरोइनों की नकल करना और डांस करना पसंद था. उन्होंने बाद में ‘स्टारडस्ट’ को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, ‘जो चीज एक शौक के तौर पर शुरू हुई थी, वह जल्द ही मेरे लिए मजबूरी बन गई.’ बेबी नाज ने श्रीदेवी के लिए डबिंग भी की थी, क्योंकि तब श्रीदेवी को हिंदी नहीं आती थी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बेबी नाज के पिता एक स्ट्रग्लिंग कहानी लेखक थे और परिवार का गुजारा मुश्किल से हो रहा था. नाज को हर शो के लिए 100 रुपये मिलने लगे और उन्हें पता भी नहीं चला कि कब वे अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालने लगीं. बेबी नाज को 8 साल की उम्र में पहली फिल्म ऑफर हुई, हालांकि उनके माता-पिता शुरू में इसके लिए ज्यादा रोमांचित नहीं थे, लेकिन जब उन्हें उनकी फीस के बारे में पता चला तो वे इस मौके के लिए तुरंत तैयार हो गए. बेबी नाज स्कूल जाने का समय नहीं निकाल पाईं. राज कपूर की ‘बूट पॉलिश’ में काम करने के बाद उन्हें घर-घर पहचान मिली.

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बेबी नाज के स्कूल ने उन्हें अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए वापस बुला लिया. वे तब तक अपने परिवार के लिए कमाई का जरिया बन चुकी थीं, इसलिए किसी ने भी उनकी पढ़ाई की परवाह नहीं की. उन्होंने बताया, ‘मैंने पढ़ाई छोड़ दी क्योंकि मेरी मां मेरी तरफ से फिल्में साइन करती रहती थीं और मेरे पिता ने काम करना बंद कर दिया था. मेरी मां को मुझसे पैसे कमाने की आदत हो गई थी और वह यह आसान जिंदगी छोड़ना नहीं चाहती थीं. वह चाहती थीं कि मैं उनकी सुख-सुविधाओं के लिए काम करूं और मैं इतनी छोटी थी और अपने माता-पिता के इतने दबाव में थी कि मना नहीं कर पाई.’ बेबी नाज दिन-रात काम करती थीं, लेकिन जो पैसे कमाती थीं, उनका मजा नहीं ले पाती थीं. कई दिन ऐसे भी होते थे जब उन्हें बिना खाए-पिए ही सोना पड़ता था. जब वह शूटिंग से लौटती थीं, तो उनके माता-पिता को उनकी कोई परवाह नहीं होती थी क्योंकि वे आपस में झगड़ने में व्यस्त रहते थे. उन्होंने कहा, ‘वे हर समय आपस में लड़ते रहते थे. उन्हें यह भी पता नहीं चलता था कि मैं घर आ गई हूं और बिना खाना खाए सो गई हूं. मैं गिन भी नहीं सकती कि कितनी बार मैं बिना खाना खाए सोई हूं.’

बेबी नाज के पिता बहुत बीमार थे और वह अपनी हालत के लिए उन्हें दोषी नहीं मानती थीं. उनकी मां ही सारी समस्याओं की जड़ थीं. उन्होंने कहा, ‘उन्हें बस पैसे की परवाह थी. वह बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी हो गई थीं. ‘मुझे घुटन महसूस हो रही थी. मुझे खुली हवा में सांस लेने की जरूरत थी. मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती थी और तभी मैंने पहली बार अपनी जान देने की कोशिश की.’ नाज को किस्मत से उनकी आया ने उन्हें बचा लिया. बेबी नाज सबसे ज्यादा कमाई करने वाली चाइल्ड आर्टिस्ट थीं, लेकिन उनकी जिंदगी में ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने 10 साल की उम्र में कुएं में कूदकर अपनी जान देने की कोशिश की. बेबी नाज की मां परेशान थीं, इसलिए नहीं कि उनकी बेटी ऐसे ख्यालों से परेशान थी, बल्कि इसलिए क्योंकि उनकी कमाई बंद हो जाती.

बेबी नाज ने कहा, ‘वे मुझे गले लगाकर रोई नहीं और न ही मुझसे दोबारा ऐसा न करने की गुजारिश की. उन्होंने कभी एक आंसू भी नहीं बहाया. इसके बजाय उस औरत ने मुझे जोर से थप्पड़ मारा और मुझ पर चिल्लाईं.’ इसके बाद, नाज पहले से कहीं ज्यादा दुखी हो गईं क्योंकि हालात ‘बद से बदतर’ होते गए. 12 साल की उम्र में नाज को समझ आ गया था कि उसके माता-पिता के बीच लगातार झगड़े क्यों हो रहे थे. उसकी मां का राजेंद्र मल्लोनी नाम के एक कैमरामैन के साथ अफेयर चल रहा था और वह तलाक लेना चाहती थी. उसकी मां ने उसके पिता को घर से निकाल दिया और अगले दो सालों तक नाज को उनके ठिकाने के बारे में कुछ पता नहीं चला.

राजेंद्र के बारे में बात करते हुए नाज ने कहा कि वह उस आदमी से नफरत करती थी. उसी की वजह से मेरे पिता को अपना घर छोड़कर गंदे होटलों में रहना पड़ा. वह बेबस थी क्योंकि उसने जो भी पैसा कमाया था, वह उसकी मां के नाम पर था और उसके पास अपना कुछ भी नहीं था. वे कहती थीं, ‘मेरा कोई बैंक बैलेंस नहीं था. घर, प्रॉपर्टी, गहने, कैश सब कुछ मेरी मां के नाम पर था.’ जब नाज 16 साल की हुई, तो उसकी मां ने राजेंद्र से शादी कर ली और पहली बार नाज ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने उनके साथ रहने से इनकार कर दिया, इसलिए एक नया इंतजाम किया गया. उसकी मां दिन में उसके साथ रहती थी और राजेंद्र के साथ भी रहती थी. नाज की आया हर रात उसके साथ सोती थी. अपनी मां से कुछ दूरी बनाने के बाद उसने अपने पिता को खोजना शुरू किया और बहुत कोशिशों के बाद उन्हें ढूंढ निकाला और घर ले आई. (फोटो साभार: X@FilmHistoryPic)

नाज ने तब तक अपनी मां को मदद देना भी बंद कर दिया था और यह पता चलने पर राजेंद्र ने उसकी मां को छोड़ दिया. जब उसने नाज से पूछा कि क्या वह उसके साथ रह सकती है, तो नाज ने इनकार कर दिया और उसे अपने दूसरे पति के साथ रहने के लिए कहा. उन्होंने कहा, ‘जिंदगी के आखिरी दिनों में उसे अपने दूसरे पति से बहुत कुछ झेलना पड़ा.’ बेबी नाज की 1960 में अपने होने वाले पति सुबिराज से मुलाकात हुई, जो एक एक्टर थे. पांच साल तक एक-दूसरे को जानने-समझने के बाद 1965 में दोनों ने शादी कर ली, जबकि उनके परिवार वाले इसके खिलाफ थे. उन्होंने कहा था, ‘वह मेरी जिंदगी के पहले ऐसे इंसान थे जिन्होंने मुझे समझने, दुख में सहारा देने और मेरा दुख बांटने की कोशिश की. उन्होंने मुझे वह प्यार और अपनापन दिया जो मुझे पहले कभी नहीं मिला था.’

नाज के माता-पिता इस शादी के खिलाफ थे क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि वह हिंदू धर्म अपनाए. सुबिराज कपूर परिवार से थे क्योंकि उनकी मां पृथ्वीराज कपूर की बहन थीं. आखिरकार, दोनों ने ‘देख प्यार तुम्हारा’ फिल्म के सेट पर शादी की, जब सुबिराज ने उनके माथे पर सिंदूर लगाया. नाज और सुबिराज कभी बहुत अमीर जिंदगी नहीं जी पाए, लेकिन गुजारा कर लेते थे. उन्होंने इसे खुद महसूस किया था कि अमीर होने से ज्यादा जरूरी साथ रहना था.

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September 11, 2026, 20:05 IST

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