अल नीनो का रौद्र रूप, सितंबर में 36% कम बारिश, IMD का ताजा अलर्ट – el nino impact on india monsoon 36 percent less rainfall during 3 to 9 september

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अल नीनो का रौद्र रूप, सितंबर में अभी तक 36% कम बारिश, IMD अब क्या बोला
Last Updated:September 12, 2026, 05:12 IST
IMD Weather Today: भारत में वेदर सिस्टम के लगातार एक्टिव होने की वजह से पूरब से लेकर उत्तर भारत तक में बारिश की संभावना बनी हुई है. बिहार में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. दिल्ली-एनसीआर में भी मूसलाधार बारिश की प्रबल संभावना है. हालांकि, सितंबर का पहला सप्ताह तकरीबन सूखा बीता है. खासतौर पर दक्षिण भारत में औसत से काफी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है. तो क्या अल नीनो अपना असर दिखाने लगा है?3 से 9 सितंबर के बीच देशभर में 36 फीसद कम बारिश रिकॉर्ड की गई है. (फाइल फोटो
IMD Weather Today: यह समुद्री राक्षस अल नीनो का असर है या फिर मानसून के अवसान की शुरुआत…वजह जो भी हो मौजूदा हालात ये हैं कि सितंबर के पहले सप्ताह में बारिश में जबर्दश्त कमी दर्ज की गई है. इस अवधि में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान जितनी बारिश होनी चाहिए थी, बदरा उससे 36 फीसद तक कम बरसे हैं. देश के दक्षिणी हिस्से में इस अवधि में काफी कम बारिश होने की वजह से ऐसा हुआ है. उत्तर और पूर्वी भारत में लगातार मध्यम से तेज बारिश रिकॉर्ड किया गया है. मौसम विभाग ने (IMD) ने अपने ताजा पूर्वानुमान में बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में आने वाले 7 दिनों तक अच्छी बारिश हो सकती है. बंगाल, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, लेह-लद्दाख में अच्छी बारिश होने की संभावना है. बंगाल की खाड़ी में बना लो प्रेशर एरिया लगातार मजबूत हो रहा है. साथ ही वेस्टर्न डिस्टर्बेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ भी जोर पकड़ रहा है. इन दोनों वेदर सिस्टम की वजह से अच्छी बारिश होने के आसार बन रहे हैं. बता दें कि देश के साथ ही दुनियाभर के मौसम विज्ञानियों ने इस बार अल नीनो के काफी मजबूत होने की आशंका जताई है. इससे बारिश में कमी और और औसत तापमान में वृद्धि होने की प्रबल संभावना है. वेदर एक्सपर्ट का यह भी मानना है कि स्ट्रॉन्ग अल नीनो की वजह से खाद्य संकट पैदा हो सकता है.
वेदर एक्सपर्ट महेश पहलावत के अनुसार, देश में मानसून की रफ्तार लगातार कमजोर बनी हुई है. 3 से 9 सितंबर के बीच देश में सामान्य से 36 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई. इससे 2026 के पूरे मानसून सीजन में बारिश की कमी बढ़कर 15 प्रतिशत हो गई है. उनके अनुसार, दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित है और यहां बारिश में सबसे बड़ी कमी दर्ज की गई है. कमजोर बारिश का असर खेती और जल संसाधनों पर भी पड़ सकता है. मौसम पर नजर रखने वाली संस्था स्काईमेट वेदर से जुड़े महेश पहलावत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मानसून की मौजूदा स्थिति की जानकारी साझा की है. आने वाले समय में यदि अच्छी बारिश नहीं होती है तो वर्षा में कमी का फासला और बढ़ सकता है. आम जनजीवन के साथ ही इंडियन इकोनॉमी पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ना तय है.
India’s monsoon slowdown continues: rainfall was 36% below normal during 3–9 September, pushing the seasonal deficit to 15%. The South Peninsula remains the worst affected, recording the largest rainfall shortfall. #Monsoon2026 #RainfallDeficit @SkymetWeather @JATINSKYMET



