Sikar News: अब दुनिया के पर्यटन नक्शे पर चमकेगा शेखावाटी, हवेलियों को विश्व धरोहर की प्रारंभिक सूची में जगह

Last Updated:September 12, 2026, 12:28 IST
शेखावाटी की ऐतिहासिक हवेलियों को विश्व धरोहर की प्रारंभिक सूची में जगह मिलने से राजस्थान के इस ‘ओपन आर्ट गैलरी’ क्षेत्र को वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ी है. सीकर, चूरू और झुंझुनूं के 14 प्रमुख क्षेत्रों की हवेलियों से पर्यटन, रोजगार और स्थानीय कारोबार को नई रफ्तार मिल सकती है. 660 हवेलियों के संरक्षण और हेरिटेज स्ट्रीट विकसित करने की योजनाओं के बीच अब सबसे बड़ी चुनौती इस अनमोल विरासत को सुरक्षित रखना है.
शेखावाटी की हवेलियां अब सिर्फ राजस्थान की पहचान नहीं रहेंगी, बल्कि दुनिया के पर्यटन नक्शे पर अपनी अलग पहचान बनाने की राह पर हैं. भित्तिचित्रों और अनूठी वास्तुकला के लिए मशहूर यहां की ऐतिहासिक हवेलियों को विश्व धरोहर की प्रारंभिक सूची में जगह मिली है. सीकर, चूरू और झुंझुनूं के प्रमुख कस्बों की हवेलियों के शामिल होने से पर्यटन को नई उड़ान मिलेगी.
शेखावाटी क्षेत्र को ओपन आर्ट गैलरी कहा जाता है. यहां हवेलियों की दीवारों पर बने भित्तिचित्र अपने आप में इतिहास, संस्कृति और कला की कहानी कहते हैं. अलसीसर, बिसाऊ, चिड़ावा, चूरू, डूंडलोद, फतेहपुर, झुंझुनूं, खेतड़ी, लक्ष्मणगढ़, मंडावा, महांसर, नवलगढ़, रामगढ़ और सीकर जैसे क्षेत्रों की हवेलियां देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करती है.
विश्व धरोहर की प्रारंभिक सूची में शामिल होने के बाद इन हवेलियों को देखने के लिए देश-दुनिया से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है. अभी तक कई पर्यटक शेखावाटी के कुछ चुनिंदा पर्यटन स्थलों तक ही पहुंचते हैं, लेकिन हवेलियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने से फतेहपुर, मंडावा, नवलगढ़, रामगढ़, लक्ष्मणगढ़ और चूरू जैसे कस्बों में पर्यटन गतिविधियां और तेज होगी.
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हवेलियों के संरक्षण की दिशा में सरकार पहले से कवायद कर रही है. बजट घोषणा में शेखावाटी की 660 हवेलियों को चिन्हित किया गया है. इनके संरक्षण के साथ हेरिटेज स्ट्रीट विकसित करने की योजना भी सामने आई है. यदि इन हवेलियों को व्यवस्थित तरीके से संरक्षित किया जाता है तो आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक कला को देख सकेंगी और पुरानी इमारतों के अस्तित्व को बचाया जा सकेगा.
पर्यटन बढ़ने का सीधा असर स्थानीय रोजगार पर भी पड़ेगा. पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी तो गाइड, होटल, होम स्टे, रेस्टोरेंट, टैक्सी, हस्तशिल्प और स्थानीय बाजार से जुड़े कारोबार को फायदा मिलेगा. स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए विकल्प तैयार हो सकते हैं. यानी हवेलियां केवल इतिहास की निशानी नहीं रहेंगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए आमदनी का जरिया भी बनेगी.
सीकर, चूरू व झुंझुनूं जिले की 14 प्रमुख क्षेत्रों की हवेलियों को जगह मिलने से पर्यटन सेक्टर और मजबूत होगा. फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, रामगढ़-शेखावाटी, मंडावा, चूरू, झुंझुनूं और नवलगढ़ जैसे कस्बों की पहचान हवेलियों से गहराई से जुड़ी है. इन शहरों में कई हवेलियां आज भी अपनी भव्यता और बारीक चित्रकारी के साथ खड़ी हैं. संरक्षण और पर्यटन का बेहतर मॉडल तैयार होने पर इन कस्बों की अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है.
स्थानीय दुकानदारों से लेकर परिवहन व होटल व्यवसाय तक इसका लाभ पहुंच सकता है. सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि शेखावाटी की कला को स्थानीय पहचान से आगे वैश्विक पहचान मिल सकेगी. विश्व धरोहर की प्रारंभिक सूची में जगह मिलना इस दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. अब जरूरत है कि हवेलियों का संरक्षण केवल सरकारी कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उनकी वास्तुकला, भित्तिचित्रों और विरासत को बचाने के साथ पर्यटन सुविधाएं भी विकसित हों.
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September 12, 2026, 12:28 IST



