Rajasthan

निजाम के दौर में रजाकारों से लिया लोहा, जनता के लिए जमीन बेच दी; जानें किस्सा कस्ताला रामकिष्टू का

Last Updated:September 12, 2026, 15:52 IST

Kastala Ramkishtu Ki Kahani : कस्ताला रामकिष्टू ने तेलंगाना के स्वतंत्रता संग्राम व निजाम शासन के खिलाफ संघर्ष में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने भूमिहीनों को 20,000 एकड़ जमीन दिलवाई और आदिलाबाद के विकास में योगदान दिया. इसके साथ ही आदिलाबाद शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों परिवारों को आवास के लिए जमीन उपलब्ध कराई.

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तेलंगाना: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और तेलंगाना के इतिहास में कई ऐसे जननायक हुए, जिन्होंने आम जनता के हक और स्वाभिमान के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया. आदिलाबाद की धरती के ऐसे ही एक निस्वार्थ सेनानी थे कस्ताला रामकिष्टू. निजाम के दौर में रजाकारों के जुल्म के खिलाफ सीना तानकर खड़े होने वाले रामकिष्टू एक ऐसे नेता थे, जिनका जीवन त्याग और जनसेवा की मिसाल बना.

इतिहास के स्कॉलर शाहिद उमेर बताते हैं कि 16 अगस्त 1918 को जन्मे कस्ताला रामकिष्टू ने देश की आजादी के आंदोलन के साथ-साथ निजाम के निरंकुश शासन के खिलाफ चले तेलंगाना सशस्त्र संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाई. रजाकारों के अत्याचारों के खिलाफ उनके कड़े प्रतिरोध को देखते हुए उस समय की निजाम सरकार ने उन्हें देखते ही गोली मारने का आदेश जारी किया था. इसके बावजूद वे डिगे नहीं और भूमिहीनों तथा शोषित वर्ग की आवाज बने रहे.

जब आंदोलन के लिए अपनी जमीन तक बेच दीआंदोलन को आगे बढ़ाने और अपने साथियों की मदद के लिए उन्होंने अपनी निजी जमीन तक बेच दी. एक समय ऐसा भी आया, जब उनके पास खुद का कोई ठिकाना नहीं बचा था. तब जिन गरीब और बेसहारा लोगों के लिए वे लड़े थे, उन्हीं लोगों ने मिलकर उनके रहने के लिए एक घर तैयार कराया.

आदिलाबाद की जनता ने बनाया जननायकजनता के प्रति उनकी इसी निष्ठा का परिणाम था कि वर्ष 1967 के विधानसभा चुनाव में आदिलाबाद की जनता ने उन्हें अपना विधायक चुना. जनप्रतिनिधि बनने के बाद उन्होंने गरीबों के कल्याण को ही अपनी प्राथमिकता बनाया. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने करीब 20,000 एकड़ सरकारी जमीन के पट्टे भूमिहीनों और गरीबों को दिलवाए. इसके साथ ही आदिलाबाद शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों परिवारों को आवास के लिए जमीन उपलब्ध कराई.

क्षेत्र में कराए ये सारे कामक्षेत्र के विकास में भी उनका अहम योगदान रहा. सीसीआई स्पिनिंग मिल की स्थापना, सातनाला सिंचाई परियोजना के भूमि सर्वेक्षण और आदिलाबाद हवाई पट्टी के लिए ली गई 109 एकड़ जमीन के बदले किसानों को उनका उचित मुआवजा दिलाने में उन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई. 8 सितंबर 1985 को उनका निधन हुआ, लेकिन आज भी आदिलाबाद की केआरके कॉलोनी उनके जनसंघर्ष और सेवा की याद दिलाती है. वे इतिहास में एक ऐसे नेता के रूप में जाने जाते हैं, जिन्होंने राजनीति को सत्ता नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम बनाया.

About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…

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Hyderabad,Hyderabad,Telangana

First Published :

September 12, 2026, 15:52 IST

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