म्यांमार ड्रोन अटैक केस: टूरिस्ट वीजा से घुसपैठ तक… हर कदम पर तोड़ा एक नया नियम, अब NIA कर रही पूरा हिसाब

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टूरिस्ट वीजा से घुसपैठ तक… हर कदम पर तोड़ा नियम, अब NIA कर रही पूरा हिसाब
Last Updated:September 04, 2026, 19:38 IST
म्यांमार में नागरिक विमान पर ड्रोन हमले की जांच में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं. एनआईए ने तिहाड़ जेल में बंद अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैन डाइक और यूक्रेनी नागरिक विक्टर कामिंस्की से पूछताछ की इजाजत मिल गई है. जांच में टूरिस्ट वीजा के गलत इस्तेमाल, बिना जरूरी परमिट संवेदनशील इलाके में पहुंचने, भारत-म्यांमार सीमा पार करने, ड्रोन उपकरणों की सप्लाई और सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग देने जैसे मामलों की पड़ताल की जा रही है. जानिए इस पूरे मामले में किन-किन कानूनों और नियमों के उल्लंघन की जांच चल रही है.एनआईए को तेहाड़ जेल में बंद हो विदेशी नागरिकों से पूछताछ की इजाजत मिल गई है.
नई दिल्ली: म्यांमार में एक प्लेन पर ड्रोन हमले से जुड़े मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं. मामला सिर्फ एक ड्रोन हमले या विदेशी नागरिकों की गतिविधियों तक सीमित नहीं है. जांच एजेंसी एनआईए की जांच में वीजा नियमों के उल्लंघन से लेकर संवेदनशील इलाके में बिना अनुमति पहुंचने, भारत-म्यांमार सीमा पार करने, ड्रोन उपकरण पहुंचाने और आर्म्ड ग्रुप को टेक्निकल र्टेनिंग देने की बात सामने आई है.
इसी मामले में दिल्ली की अदालत ने एनआईए को तिहाड़ जेल में बंद दो विदेशी नागरिकों से पूछताछ की अनुमति दी है. इनमें अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैन डाइक और यूक्रेनी नागरिक विक्टर कामिंस्की शामिल हैं. एनआईए का कहना है कि डिजिटल सबूतों और नई मिली जानकारी के आधार पर दोनों से पूछताछ जरूरी है. लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन विदेशी नागरिकों पर किन-किन नियमों और कानूनों के उल्लंघन का आरोप है? आइए पूरे मामले को सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं.
कहां से शुरू हुआ पूरा मामला?
एनआईए ने इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 18 के तहत एफआईआर दर्ज कर अपनी जांच शुरू की थी. म्यांमार में एक प्लेन पर ड्रोन से हमला करने के इस मामले में एनआईए ने कुल सात विदेशी नागरिकों की भूमिका पाई थी. एजेंसी का आरोप है कि इन आतंकी साजिश में शामिल कुछ विदेशी लोग भारत आए. इसके बाद म्यांमार में सक्रिय आर्म्ड ग्रुप तक पहुंचे. म्यांमार पहुंचने के बाद आरोपी विदेशी नागरिकों ने नकेवल आर्म्ड ग्रुप्स को ड्रोन से जुड़ी ट्रेनिंग दी, बल्कि उन्हें आतंकी हमले में शामिल होने वाले इक्यूपमेंट भी उपलब्ध कराए.
आरोपियों ने किन भारतीय कानूनों का किया उल्लंघन
टूरिस्ट वीजा का गलत इस्तेमाल: एनआईए के आरोपों में सबसे पहला बड़ा आरोप भारत आने के मकसद को लेकर है. एनआईए के मुताबिक, कुछ विदेशी नागरिक भारत में टूरिस्ट वीजा पर आए थे. आमतौर पर यह वीजा टेरिज्म और सीमित निजी यात्रा के लिए दिया जाता है. यदि कोई व्यक्ति वीजा नियमों से इतर गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो इसे वीजा शर्तों का उल्लंघन माना जा सकता है. इस मामले की जांच एनआईए ने पाया कि आरोपियों का असल मकसद किसी दूसरे देश में सक्रिय आर्म्ड गुप्स तक पहुंचना औश्र उन्हें टेक्निकल सपोर्ट देना था. लिहाजा, उनके खिलाफ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के तहत कार्रवाई हो सकती है.
बिना जरूरी परमिट संवेदनशील इलाके में पहुंचना: जांच में दूसरा अहम मसला मिजोरम पहुंचने का है. एनआईए के अनुसार, आरोपी गुवाहाटी के रास्ते मिजोरम पहुंचे थे. भारत के कुछ सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में विदेशी नागरिकों के प्रवेश के लिए विशेष नियम होते हैं. इन इलाकों में जाने के लिए किसी भी विदेशी नागरिक को रिस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट (आरएपी) और प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (पीएपी) लेना आवश्यक होता है. एनआईए का आरोप है कि आरोपियों ने आवश्यक परमिट नहीं लिया था. इस मामले में भी आरोपियों के खिलाफ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है.
भारत से म्यांमार में की घुसपैठ: एनआईए ने अपनी जांच में पाया कि आतकी वारदात को अंजाम देने के लिए तीनों भारत से म्यांमार के इलाके में घुसपैठ की थी. आपको बता दें कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमा को पार करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया होती है और इमिग्रेशन चेक पोस्ट से एंट्री या एग्जिट कर सकते हैं. अगर कोई व्यक्ति निर्धारित इमिग्रेशन प्रॉसेस को दरकिनार कर अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करता है, तो मामला सिर्फ यात्रा नियमों तक सीमित नहीं रहता है. खासतौर पर तब, जब सीमा पार करने के बाद व्यक्ति की गतिविधियों का संबंध किसी आतंकी गतिविधि से जुड़ा हो. इस मामले में भी इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है.
म्यांमार के आर्म्ड ग्रुप्स को दी ड्रोन की ट्रेनिंग: एनआईए की जांच में सबसे गंभीर आरोप म्यांमार में सक्रिय एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स को ड्रोन की ट्रेनिंग देने का है. ट्रेनिंग पहले से तय साजिश के तहत दी गई. इसमें ड्रोन ऑपरेशन, ड्रोन वॉरफेयर, ड्रोन असेंबली और ड्रोन जैमिंग जैसी तकनीक शामिल थीं. यहीं से मामला सामान्य इमिग्रेशन या वीजा उल्लंघन से आगे बढ़कर राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में पहुंच गया है. आरोप है कि तिहाड़ जेल में बंद दोनों विदेशी नागरिकों से मिली ट्रेनिंग की मदद से आर्म्ड ग्रुप्स ने सिविल एयरक्राफ्ट पर ड्रोन से हमला किया था. इस मामले में एनआईए यूएपीए की धारा के तहत कार्रवाई कर सकती है.
ड्रोन और इक्यूपमेंट्स को भारत के रास्ते पहुंचाया गया: एनआईए ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपियों ने यूरोप से ड्रोन और उनसे जुड़े इक्यूपमेंट हासिल किए और उन्हें भारत के रास्ते म्यांमार पहुंचाया. इस आरोप के साथ कुछ सवाल भी खड़े हो गए हैं, जिसमें पहला सवाल यही है कि ये उपकरण भारत कैसे आए. क्या कस्टम विभाग के सामने इन्हें डिक्लेयर किया गया था. क्या इनके आयात के लिए जरूरी मंजूरी ली गई थी? इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कस्टम एक्ट और फॉरेन ट्रेड एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है.
भारतीय में प्रतिबंधित संगठनों से संबंध: एनआईए के आरोपों में सबसे गंभीर पहलू म्यांमार बेस्ड आमर्ड ग्रुप्स को ड्रोन ट्रेनिंग देने का आरोप है. एनआईए का आरोप है कि आरोपियों का संबंध भारत में प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से भ्ज्ञी रहे हैं और वे उन्हें हथियार, प्रशिक्षण या अन्य सहायता उपलब्ध कराते रहे हैं. यहीं से यह मामला सीधे तौर पर भारत की सुरक्षा व्यवस्था से भी जुड़ गया है.
अब सामने आया सिविल एयरक्राफ्ट पर ड्रोन हमले का एंगल
मामले में नई कड़ी तब जुड़ी जब एनआईए ने अदालत को बताया कि कुछ विदेशी नागरिकों के म्यांमार में एक सिविल एयरक्राफ्ट पर हुए ड्रोन हमले से जुड़े होने का सबूत मिले हैं. इसी जानकारी के आधार पर तिहाड़ जेल में बंद अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैन डाइक और यूक्रेनी नागरिक विक्टर कामिंस्की से दोबारा पूछताछ की अनुमति मांगी थी. एनआईए के मुताबिक, जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस से फोटो, वीडियो और वॉयस डेटा मिले हैं. इसी आधार पर अदालत ने एनआईए को दोनों विदेशी नागरिकों से पूछताछ की अनुमति दे दी है.
About the Authorअनूप कुमार मिश्रAssistant Editor
Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…
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September 04, 2026, 19:37 IST



