वीर तेजाजी महाराज की तेजा दशमी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, मंदिरों में लगी भक्तों की कतारें

Last Updated:September 21, 2026, 20:31 IST
Teja Dashmi 2026: तेजा दशमी पर लोक देवता वीर तेजाजी महाराज के मंदिरों और थानकों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. भक्तों ने बाबा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की. कई जगह तेजा गायन, गीत महोत्सव और भजन-कीर्तन हुए. ढोल-नगाड़ों के साथ झंडा जुलूस निकाले गए. मान्यता के अनुसार श्रद्धालु थानकों पर पहुंचकर तांती या डस्सी कटवाते हैं. कई स्थानों पर मेले भी आयोजित किए गए.
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तेजा दशमी
कोटा: राजस्थान की संस्कृति और लोक आस्था के केंद्र, महान लोक देवता वीर तेजाजी महाराज के पावन पर्व तेजा दशमी के अवसर पर ग्रामीण अंचल से लेकर शहरी क्षेत्रों तक आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा. इस पवित्र दिन राज्यभर में तेजाजी महाराज के थानकों और मंदिरों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं. भक्तों ने अनुष्ठान पूर्वक बाबा के दर्शन किए, विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की. तेजा दशमी का यह पर्व राजस्थान की लोक संस्कृति, अटूट विश्वास और धार्मिक सछ्भाव का एक अनूठा संगम बनकर उभरा.
तेजा दशमी के इस पावन अवसर पर राजस्थान के विभिन्न ग्रामीण अंचल और कस्बों में विशेष धार्मिक आयोजनों की धूम रही. तेजाजी महाराज के मंदिरों और पारंपरिक थानकों को विशेष रूप से सजाया गया था. कई स्थानों पर भव्य गीत महोत्सव, पारंपरिक तेजा गायन और रात्रि जागरण व भजन-कीर्तन के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने बाबा तेजाजी के यशोगान किए. ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के बीच भव्य झंडा जुलूस निकाले गए. इन जुलूसों में युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और तेजाजी महाराज के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा.
तांती बंधवाने और कटवाने की अनूठी परंपरालोक मान्यता के अनुसार वीर तेजाजी महाराज को वचन के पक्के और नागवंशी देवता के रूप में पूजा जाता है. ऐसी अटूट मान्यता है कि सर्प (सांप) या किसी भी जहरीले कीड़े के काटने पर यदि पीड़ित व्यक्ति सच्चे मन से तेजाजी महाराज का स्मरण करे और उनके नाम की तांती या डस्सी बांध ली जाए, तो विष का प्रभाव समाप्त हो जाता है. इसी आस्था के चलते तेजा दशमी के विशेष दिन दूर-दूर से श्रद्धालु तेजाजी के थानकों और मंदिरों पर पहुंचे. जिन भक्तों ने मन्नत मांगकर तांती बांधी थी, उन्होंने तेजा दशमी के दिन थानकों पर पहुंचकर विधि-विधान से तांती कटवाई और बाबा के चरणों में अपना शीश नवाकर उनका आभार व्यक्त किया.
मेलों का आयोजन और सांस्कृतिक उल्लासतेजा दशमी के अवसर पर कई प्रमुख स्थानों पर विशाल मेलों का आयोजन किया गया. इन मेलों में ग्रामीण परिवेश की अद्भुत छटा देखने को मिली, जहां पारंपरिक खान-पान, मेलों की दुकानें और बच्चों के आकर्षण का केंद्र रहे झूले विशेष रूप से आकर्षित कर रहे थे. मेलों में आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे, जिससे आपसी भाईचारा और सांस्कृतिक एकता का सुंदर दृश्य प्रस्तुत हुआ.
प्रेम और विश्वास पीढ़ियों से अटूट चला आ रहाकुल मिलाकर, तेजा दशमी का यह पर्व राजस्थान के कोने-कोने में पूरी श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया. लोक देवता वीर तेजाजी महाराज के प्रति लोगों की यह अगाध आस्था यह साबित करती है कि आज भी ग्रामीण अंचल में लोक देवताओं के प्रति लोगों का प्रेम और विश्वास पीढ़ियों से अटूट चला आ रहा है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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September 21, 2026, 20:31 IST



