ये बस रंग-बिरंगी मछली नहीं, इंसानों की बीमारियों का है इलाज, 16 घंटे में धड़कने लगता है दिल

Last Updated:September 21, 2026, 20:25 IST
Zebra Fish DNA Similar To Human: भारत में 3000 से अधिक मछलियों की प्रजाति पाई जाती हैं इन्हीं में से एक बहुत ही खूबसूरत रंग बिरंगी दिखाई देने वाली छोटी-छोटी जेब्रा फिश भी होती है. यह दिखने में जितनी छोटी और साधारण होती है. आजकल वही वैज्ञानिकों की रिसर्च में सबसे अधिक उपयोग की जा रही है क्योंकि जेब्रा फिश का डीएनए और जीनोम ह्यूमन से काफी मिलता-जुलता है. इसमें लगभग 86% समानता होती है.
यही वजह है कि इस छोटी सी मछली का इस्तेमाल दिल, कैंसर, आनुवंशिक बीमारियों और दवाओं पर रिसर्च करने में बहुत तेजी से किया जा रहा है. इसका डेवलपमेंट बहुत फास्ट होता है. फर्टिलाइजेशन के बाद मात्र 16 घंटे में इसका दिल धड़कने लगता है. रिसर्च में इस मछली को विकसित होते हुए वैज्ञानिक पारदर्शी तरीके से बड़ी आसानी से देख सकते हैं और इसमें मात्र दो दिन का ही समय लगता है.
इस मछली की लंबाई अधिकतम तीन से चार सेंटीमीटर होती है और यह मीठे जल में पाई जाने वाली प्रजाति है. बाजार में 20 -25 रुपए में एक मछली को आसानी से खरीदा जा सकता है.सागर की डॉक्टर हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सीनियर साइंटिस्ट एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ योगेश भार्गव बताते हैं कि जेब्रा फिश का अगर अनुवांशिकी के हिसाब से देखें तो इसका जो DNA है.
इसका कंप्लीट सीक्वेंस किया जा चुका है. इसलिए हम लोग इसका रिसर्च आर्गनिज्म के रूप में उपयोग करते हैं. यह वर्टेब्रेट एनिमल (रीढ़ की हड्डी वाले जीव)है. रिसर्च को लेकर अपने दूसरे जीवों के नाम भी सुने होंगे लेकिन वह नॉनवर्टिब्रेट है. जिसमें मिनिमम वर्टिब्रेट एनिमल्स जिसमें हम लोग रिसर्च कर सकते हैं उसमें जेब्रा फिश का नाम शुमार है.
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जेब्रा फेस का ग्रोथ बहुत फास्ट होता है. फर्टिलाइजेशन के बाद जो सिंगल सेल होता है उसमें 16 घंटे में दिल धड़कने लगता है. 48 घंटे में बच्चा हैच होकर बाहर आ जाता है, जिसको हम लोग लार्वा कहते हैं. अगर वह अंडे के अंदर होता है तो उसको हम लोग भ्रूण (Embryo) कहते है. (Embryo) का विकास एक सेल के अंदर होता है. Chorion (कोरियन) सेल के रूप में काम करता है. जिसको प्लेजेंटा के रूप में भी मान सकते है.
बाहर से जो तत्व उस तक नहीं पहुंच पाते कुछ ही मात्रा में जो छनकर तत्व पहुंचते हैं प्लेसेंटा के रूप में कोरियन काम करता है. Chorion (कोरियन) के अंदर ही Embryo विकसित होता है. जेब्रा फेस मुख्य रूप से गंगा नदी के किनारे चारों तरफ तट पर पाई जाती है. जो भारत नेपाल और भूटान जैसे देश में पाई जाती है. आजकल इसको बाजार से भी खरीद सकते हैं, इनको जेनेटिक मॉडिफाई भी किया जा चुका है.
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September 21, 2026, 20:25 IST



