राजस्थान के गांवों में बदलेगा सत्ता का चेहरा, 7200 पंचायतों की कमान संभालेंगी महिला

Last Updated:September 25, 2026, 10:24 IST
Rajasthan Panchayat Election 2026: राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है. प्रदेश की कुल 14,403 ग्राम पंचायतों में से करीब 7,200 पंचायतों की कमान महिला सरपंचों के हाथ में होगी. पंचायत चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण और हालिया नए परिसीमन के बाद महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी अब अपने चरम पर होगी. पिछले चुनाव की 5,670 महिला सरपंचों की तुलना में यह एक बड़ी छलांग है. साथ ही करीब 65 हजार महिलाएं वार्ड पंच भी बनेंगी. यह बदलाव ग्रामीण राजनीति में महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा उदाहरण बनने जा रहा है.
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Rajasthan Panchayat Election 2026: गांव की सरकार में आधी हिस्सेदारी महिलाओं की, 7200 पंचायतों पर होगी सीधी कमान
Jaipur: राजस्थान में आगामी पंचायत चुनाव 2026 राज्य की सियासत में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है. इस बार गांवों की सरकार में महिलाओं की अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिलेगी. प्रदेश की करीब 14,403 ग्राम पंचायतों में से आधी यानी लगभग 7,200 पंचायतों की कमान सीधे तौर पर महिलाओं के हाथों में होगी. यह केवल एक चुनावी आंकड़ा नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर सत्ता और समाज के बदलते स्वरूप का एक मजबूत प्रमाण है. परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या में हुआ इजाफा और 50 फीसदी महिला आरक्षण इस बदलाव के मुख्य कारण हैं.
पिछले पंचायत चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में करीब 5,670 महिला सरपंच चुनी गई थीं. लेकिन परिसीमन और आरक्षण के नए नियमों के बाद इस बार यह संख्या छलांग लगाकर करीब 7,200 तक पहुंचने वाली है. इसका सीधा अर्थ यह है कि राजस्थान की हर दूसरी ग्राम पंचायत का नेतृत्व एक महिला सरपंच करेगी. ग्राम सभाओं में अब फैसले लेने वाली कुर्सी पर महिलाएं होंगी और विकास की रूपरेखा भी उन्हीं के नेतृत्व में तय की जाएगी.
परिसीमन ने बदला पंचायत चुनाव का गणितहाल ही में हुए परिसीमन के बाद राजस्थान में ग्राम पंचायतों की कुल संख्या बढ़कर 14,403 हो गई है. पंचायतों के इस विस्तार ने ग्रामीण राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया है. सरपंच के 14,403 पदों में से 3,058 पद अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित किए गए हैं. इसी तरह 2,493 पद अनुसूचित जाति (एससी) और 1,961 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए रिजर्व रखे गए हैं. इन सभी श्रेणियों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था को सख्ती से लागू किया गया है.
वार्ड पंचों के स्तर पर भी महिलाओं का दबदबासरपंच के अलावा वार्ड पंचों के पदों पर भी महिलाओं का दबदबा साफ नजर आ रहा है. पिछली बार जहां करीब 54 हजार महिला वार्ड पंच थीं, वहीं इस बार यह आंकड़ा 65 हजार को पार करने की उम्मीद है. प्रदेश में वार्ड पंचों के करीब 1.30 लाख पदों में से 21,962 पद एससी, 19,117 एसटी और लगभग 15 हजार पद ओबीसी के लिए आरक्षित किए गए हैं. इन सभी पदों पर भी महिलाओं की आधी हिस्सेदारी तय कर दी गई है.
आदिवासी इलाकों में शत-प्रतिशत आरक्षणआरक्षण की इस व्यवस्था ने आदिवासी बहुल जिलों में तस्वीर पूरी तरह से बदल दी है. बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जैसे जिलों में सरपंच और वार्ड पंच के सभी पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किए गए हैं. इन क्षेत्रों में अब राजनीतिक और सामाजिक समीकरण इसी आरक्षण व्यवस्था के इर्द-गिर्द घूमेंगे. हालांकि श्रीगंगानगर के घड़साना में कुछ विरोध के कारण आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया को रोकना पड़ा था, जिसे बाद में संपन्न कर लिया गया.
राष्ट्रीय स्तर से लेकर गांव की चौपाल तक बदलावदेश में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लाया गया है. लेकिन राजस्थान में पंचायत स्तर पर 50 फीसदी आरक्षण पहले से ही लागू है. अब पंचायत भवनों में महिलाएं केवल नाम की सरपंच नहीं होंगी, बल्कि वे वास्तविक रूप से सत्ता का संचालन करेंगी. राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 ग्रामीण सत्ता के बदलते चेहरे और महिला सशक्तिकरण की नई इबारत लिखने के लिए तैयार है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
September 25, 2026, 10:24 IST



