पितरों के तर्पण से जुड़ा है उदयपुर का गंगू कुंड, मेवाड़ की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा आज भी है कायम

Last Updated:September 30, 2026, 14:23 IST
Udaipur Gangoo Kund: उदयपुर की पहचान सिर्फ झीलों और महलों तक सीमित नहीं है. शहर में कई प्राचीन स्थल मेवाड़ की धार्मिक परंपराओं और इतिहास को संजोए हुए हैं. गंगू कुंड भी ऐसा ही खास स्थान है, जिसे श्राद्ध पक्ष में पितरों के तर्पण से जुड़ा माना जाता है. यहां इतिहास, आस्था और परंपरा का अनोखा मेल देखने को मिलता है, जो उदयपुर की सांस्कृतिक विरासत को खास बनाता है.
श्राद्ध पक्ष चल रहा है और इन दिनों लोग अपने पितरों को याद कर उनके लिए तर्पण और पूजा-अर्चना कर रहे हैं.हिंदू धर्म में श्राद्ध पक्ष के दौरान पितरों का तर्पण करना बेहद खास माना जाता है. ऐसे में उदयपुर शहर में एक ऐसी ऐतिहासिक जगह भी है, जिसे पितरों के तर्पण के लिए बेहद पवित्र माना जाता है.हम बात कर रहे हैं उदयपुर के आजाद स्थित ऐतिहासिक गंगू कुंड की.
गंगू कुंड सिर्फ एक जलकुंड नहीं, बल्कि मेवाड़ के इतिहास और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खास जगह है.स्थानीय मान्यता के अनुसार इस स्थान का संबंध माता गंगा से माना जाता है. कहा जाता है कि जब महाराणा महाराज विक्रमादित्य के पिता राजा गंधर्व की चिता शांत नहीं हो रही थी, तब इसी स्थान पर माता गंगा स्वयं प्रकट हुईं और उनकी चिता को शांति मिली.इसी मान्यता के कारण इस जगह को बेहद पवित्र माना जाता
गंगू कुंड की एक खास बात यह भी है कि यहां सालभर पानी मौजूद रहता है. प्राचीन समय से ही यह स्थान धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है. यहां कई पुराने शिव मंदिर भी मौजूद रहे हैं, जो इस जगह की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को और खास बनाते है.
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गंगू कुंड के आसपास मेवाड़ के राज परिवार से जुड़ी छतरियां भी मौजूद हैं. इन छतरियों का संबंध महाराणाओं के अंतिम संस्कार की परंपरा से बताया जाता है. मेवाड़ के राज परिवार में अंतिम संस्कार से जुड़ी यह परंपरा आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान बनाए हुए .
श्राद्ध पक्ष के दौरान इस जगह की खासियत और बढ़ जाती है. मान्यता है कि यहां पितरों का तर्पण करने से उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है और परिवार के लोग अपने पूर्वजों को याद करते है.यही वजह है कि श्राद्ध पक्ष में शहर और आसपास के इलाकों से लोग गंगू कुंड पहुंचते हैं और यहां अपने पितरों के लिए तर्पण करते हैं.
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September 30, 2026, 14:23 IST



