Hadjor Chutney I घुटने-जोड़ों की समस्या से परेशान हैं? रसोई में मौजूद ये देसी चटनी है बेहद खास

Last Updated:October 03, 2026, 11:32 IST
Hadjor Chutney: हैदराबाद में पारंपरिक रूप से खाई जाने वाली हड़जोड़ की चटनी स्वाद के साथ सेहत के लिए भी खास मानी जाती है. तिल, इमली, लहसुन और मसालों से तैयार इस चटनी को हड्डियों और जोड़ों की मजबूती से जोड़कर देखा जाता है. जानें इसकी खासियत और पारंपरिक बनाने का तरीका.
हैदराबाद. बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों के कारण आजकल कम उम्र में ही लोगों को जोड़ों और घुटनों में दर्द की समस्या परेशान करने लगी है. ऐसे में हमारी पारंपरिक रसोई और आयुर्वेद में कई ऐसी औषधियां मौजूद हैं जो बिना किसी महंगे इलाज के शरीर को भीतर से मजबूती देती हैं. दक्षिण भारत, विशेषकर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में पारंपरिक रूप से खाई जाने वाली हड़जोड़ की चटनी ऐसी ही एक अचूक औषधि है जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का खजाना मानी जाती है. आयुर्वेद में हड़जोड़ को अस्थिसंहारक कहा जाता है जिसका अर्थ है हड्डियों को जोड़ने और मजबूत करने वाला. इसमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम और प्राकृतिक फाइबर पाया जाता है.
बुजुर्गों के अनुसार, नियमित रूप से इसका संतुलित सेवन करने से जोड़ों का दर्द, सूजन और हड्डियों की कमजोरी दूर होती है. पारंपरिक चिकित्सा में माना जाता है कि यह शरीर को इतनी मजबूती देता है कि व्यक्ति कठिन शारीरिक परिश्रम भी आसानी से कर सकता है. हड़जोड़ का उपयोग करते समय एक विशेष सावधानी बरतनी जरूरी होती है, इसे छीलने और काटने से पहले हाथों में सरसों या तिल का तेल अच्छी तरह लगा लेना चाहिए, क्योंकि इसके प्राकृतिक रस से त्वचा में हल्की खुजली हो सकती है. सहजन की फली की तरह इसके चारों कोनों के रेशे छीलकर अलग कर दिए जाते हैं और तने व कोमल पत्तों को छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है.
पारंपरिक तरीके से कैसे तैयार होती है यह चटनी?सबसे पहले कड़ाही में सफेद तिल को सूखा भूनकर अलग रख लिया जाता है, इसके बाद थोड़े तेल में सूखी लाल मिर्च और साबुत धनिया भूनते हैं. फिर कटे हुए हड़जोड़ के टुकड़े और करी पत्ते डालकर तब तक भूना जाता है जब तक कि उनका रंग हल्का न बदल जाए. पारंपरिक स्वाद और पोषण बनाए रखने के लिए इसे सिलबट्टे पर पीसा जाता है. सबसे पहले भुने तिल, लाल मिर्च, नमक और हल्दी को पीसा जाता है. इसके बाद भुने हुए हड़जोड़ के टुकड़े, लहसुन की कलियां, कच्चा जीरा और भीगी हुई इमली मिलाकर बारीक पेस्ट तैयार किया जाता है. इमली का खट्टापन हड़जोड़ के कसैलेपन को पूरी तरह संतुलित कर देता है. तैयार चटनी को गरमा-गरम उबले चावल और एक चम्मच शुद्ध देसी घी के साथ परोसा जाता है. यह न सिर्फ भोजन का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि दैनिक आहार में हड्डियों को मजबूत रखने का एक प्राकृतिक और किफायती उपाय भी साबित होती है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Hyderabad,Telangana
First Published :
October 03, 2026, 11:32 IST



