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Gajar Ghas Health Hazard & Crop Damage | गाजर घास के नुकसान

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सफेद फूलों वाला ये पौधा दिखते ही रहें सावधान, सेहत के लिए है खतरनाक

Last Updated:October 04, 2026, 08:30 IST

Gajar Ghas Hazard Impact On Health and Crop : सीकर में गाजर घास का तेजी से फैलाव मानव स्वास्थ्य और कृषि के लिए बड़ा खतरा बन गया है. डॉ. अभिलाषा रणवा के अनुसार इसके संपर्क से त्वचा रोग और दमा जैसी बीमारियां हो सकती हैं. अमेरिका से आई यह घास एक साल में 25 हजार तक बीज पैदा कर सकती है, जिससे फसलों के उत्पादन में 40% तक की कमी आ सकती है. कृषि विशेषज्ञ दिनेश जाखड़ और रामचंद्र बाजिया ने बताया कि इसे फूल बनने से पहले दस्ताने पहनकर नष्ट करना जरूरी है. इसके नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयास और पंचायत स्तर पर सफाई अभियान की बहुत आवश्यकता है.

इन दिनों खाली जमीन, सड़क किनारे, खेल मैदानों और मकानों के आसपास गाजर घास का फैलाव तेजी से नजर आ रहा है. देखने में सामान्य खरपतवार जैसा दिखने वाला यह पौधा मानव स्वास्थ्य, पशुओं, फसलों और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक माना जाता है. बारिश के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह यह बड़ी संख्या में उग आती है. समय रहते इसकी रोकथाम नहीं होने पर इसके बीज आसपास के इलाकों में तेजी से फैल सकते हैं, जिससे इसका फैलाव और बढ़ने की आशंका रहती है.

पर्यावरण प्रेमी डॉ. अभिलाषा रणवा ने बताया कि गाजर घास के लगातार संपर्क में आने से त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसके संपर्क में आने पर खुजली, लाल चकत्ते और चर्म रोग जैसी परेशानियां हो सकती हैं. लंबे समय तक संपर्क में रहने पर एक्जीमा और दमा जैसी समस्याओं का खतरा भी बताया जाता है. खासकर खेतों, खाली भूखंडों और घास वाले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को गाजर घास से बचाव के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है.

उन्होंने बताया कि गाजर घास का वैज्ञानिक नाम Parthenium hysterophorus है. इसे चटक चांदनी और कैरट ग्रास के नाम से भी जाना जाता है. कृषि जानकारों के अनुसार, इसके बीज वर्ष 1955 में अमेरिका से आयातित गेहूं के साथ भारत में पहुंचे थे. सबसे पहले महाराष्ट्र के पुणे में इसके पाए जाने की जानकारी सामने आई थी. इसके बाद धीरे-धीरे यह देश के अलग-अलग हिस्सों में फैलता चला गया.

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गाजर घास का पौधा करीब एक मीटर तक ऊंचा हो सकता है और इसमें छोटे-छोटे सफेद फूल दिखाई देते हैं. इसकी सबसे बड़ी चुनौती इसकी तेज बीज उत्पादन क्षमता है. एक पौधा सालभर में करीब 5 हजार से 25 हजार तक बीज पैदा कर सकता है. हवा, पानी और अन्य माध्यमों के जरिए ये बीज एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंच जाते हैं. इसी कारण खाली जमीन से शुरू हुआ इसका फैलाव धीरे-धीरे आसपास के बड़े क्षेत्र तक पहुंच सकता है.

गाजर घास केवल खाली जगह पर फैलने वाला खरपतवार नहीं है, बल्कि यह आसपास उगने वाली अन्य वनस्पतियों के विकास को भी प्रभावित कर सकती है. इससे स्थानीय जैव विविधता पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि गाजर घास की मौजूदगी से फसलों की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित हो सकता है. कुछ परिस्थितियों में इसके कारण कृषि उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत तक कमी देखी जा सकती है.

गाजर घास की रोकथाम के लिए जरूरी है कि इसे फूल और बीज बनने से पहले ही हटा दिया जाए. पौधे को उखाड़ते समय हाथों में दस्ताने पहनने चाहिए, ताकि त्वचा का सीधे संपर्क होने से बचा जा सके. इसके नियंत्रण के लिए यांत्रिक, रासायनिक और जैविक विधियों को अपनाया जा सकता है. इसके अलावा खाली जमीन और सार्वजनिक स्थानों पर सामूहिक अभियान चलाकर भी गाजर घास के फैलाव को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा सकते हैं.

सहायक निदेशक कृषि विभाग रामचंद्र बाजिया ने बताया कि गाजर घास खेतों की अपेक्षा खाली स्थानों पर अधिक दिखाई देती है. खेतों में जुताई और बुवाई के दौरान इसके कई बीज नष्ट हो जाते हैं, जिससे इसका फैलाव कुछ हद तक कम रहता है. उन्होंने बताया कि गाजर घास के उन्मूलन के लिए कृषि विभाग में अलग से कोई प्रावधान नहीं है. ऐसे में पंचायत, स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण मिलकर सामूहिक अभियान चलाएं तो इसके फैलाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.

First Published :

October 04, 2026, 08:30 IST

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