Agriculture: फूलों की खेती का अनूठा मॉडल, दो बीघा में 3 टन गेंदा, रोज 1000 गुलाब, सिरोही में ऐसे हो रही ऑर्गेनिक खेती

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दो बीघा में 3 टन गेंदा, रोज 1000 गुलाब, सिरोही में ऐसे हो रही फूलों की खेती
Last Updated:October 15, 2026, 06:50 IST
Sirohi Rose and Marigold Cultivation: सिरोही जिले के आमथला गांव स्थित ब्रह्माकुमारी संस्थान के तपोवन में पूरी तरह ऑर्गेनिक तरीके से गुलाब और गेंदे के फूलों की खेती की जा रही है. यहां जैविक खाद और वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है. यहां दो बीघा में गेंदा और लगभग 1.5 बीघा में देसी और विदेशी प्रजातियों के 13 तरह के गुलाब उगाए जा रहे हैं. दो बीघा में एक बार में 3 टन के गेंदे के फूल तैयार हो जाते हैं. वहीं गुलाब की खेती में यहां रोजाना 800 से 1000 फूल प्रतिदिन तक उत्पादन हो रहा है. कीमत की बात करें तो बाजार में गेंदा 3000 से 3500 रुपए प्रति क्विंटल और गुलाब 12 हजार से 14 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है.
सिरोही. आज के समय में जहां खेतों में ज्यादा उत्पादन और कमाई के लिए रसायनों वाले कीटनाशक और खाद का चलन बढ़ रहा है, तो वहीं सिरोही जिले के आमथला गांव स्थित ब्रह्माकुमारी संस्थान के तपोवन में पिछले करीब 8 वर्षों से पूरी तरह ऑर्गेनिक तरीके से गुलाब की खेती की जा रही है. यहां एकमात्र ऑर्गेनिक रोज गार्डन मॉडल भी बनाया गया है, जहां गुलाब की अलग-अलग किस्मों की ऑर्गेनिक तैराकी से खेती होती है. इस मॉडल का डिजाइन भी कैलिफोर्निया के विशेषज्ञों ने तैयार किया था. गुलाब के अलावा यहां पर करीब 2 बीघा क्षेत्र में गेंदे के फूलों की भी खेती होती है. यहां गेंदे के टैनिस बॉल किस्म की खेती होती है, जो सामान्य फूलों से साइज में बड़े और ज्यादा दिनों तक खराब नहीं होते हैं.
तपोवन के बीके शरत भाई ने बताया कि तपोवन परिसर में बने रोज गार्डन में करीब 1 से 1.5 बीघा भूमि में देसी और विदेशी प्रजातियों के कुल 13 तरह के गुलाब उगाए जा रहे हैं. इस खेती में किसी भी प्रकार के रासायनिक कीटनाशकों या खादों का इस्तेमाल नहीं कर यहीं पर तैयार हो रहे जीवामृत और नीम की खली और तेल से बने कीटनाशक का उपयोग किया जाता है. मिट्टी की नेचुरल उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए केवल गाय के गोबर और गोमूत्र से बनी जैविक खाद का उपयोग किया जाता है, जिससे पौधों को पोषक तत्व मिलते हैं और फूलों की गुणवत्ता बेहतरीन रहती है. इसके अलावा खेती में मलचिंग, ड्रिप सिस्टम से सिंचाई और खाद देने की वैज्ञानिक तकनीक भी अपनाई जाती है.
दो तरह के गेंदे के फूलों की हो रही है खेती
तपोवन में करीब 2 बीघा मने सब्जियों के साथ गेंदे के फूलों की आरजे इक खेती की जा रही है. इसे मिक्स या हाइब्रिड खेती की तकनीक कहा जाता है. जिसमें एक ही खेत में फल, फूल और सब्जियों की खेती की जा सकती है. तपोवन क बीके शरत भाई ने बताया यहां पीले रंग के टैनिस बॉल किस्म के फूलों और नारंगी रंग के फूलों।की खेती हो रही है. इस किस्म की खास बात यह है कि फूल तोड़ने के 1 सप्ताह तक ये फूल खराब नहीं होते हैं. इन्हें बस तोड़ने के बाद सीधी धूप से बचाकर रखना जरूरी होता है. फूलों की खेती में सिंचाई का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है. इसके लिए ड्रिप सिस्टम सबसे सही विकल्प होता है.
2 बीघा से एक बार में 3 टन का होता है उत्पादन
करीब दो बीघा में एक बार में 3 टन के करीब गेंदे के फूल तैयार हो जाते हैं. वहीं गुलाब की खेती में यहां रोजाना 800 से 1000 फूल प्रतिदिन तक उत्पादन पहुंच जाता है. बाजार में गुलाब के फूलों की मांग हमेशा बनी रहती है. धार्मिक कार्यक्रमों के अलावा शादी समारोह, सजावट के अलावा कई तरह के कामों में गुलाब और गेंदे के फूलों का उपयोग होता है. वर्तमान में बाजार में गेंदे के फूलों के दाम करीब 3000 से 3500 रुपए प्रति क्विंटल भाव मिल जाते है. वहीं गुलाब के फूलों की कीमत 12 हजार से 14 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक मिल सकते हैं.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Sirohi,Rajasthan
First Published :
October 15, 2026, 06:50 IST



