बिना सरकारी मदद के 4.5 करोड़ से पलटी स्कूल की काया, कभी बच्चों के बैठने की नहीं थी जगह, अब हर सुविधा मौजूद

जालोर. जिस सरकारी स्कूल में कभी 450 से ज्यादा बच्चों को बैठने के लिए जगह नहीं मिलती थी, वहां अब दो मंजिला आधुनिक भवन तैयार है. खास बात यह है कि करीब 4.50 करोड़ रुपये की लागत से बने इस स्कूल के निर्माण के लिए सरकारी सहायता का इंतजार नहीं किया. गांव के पूर्व विद्यार्थियों, प्रवासी व्यवसायियों और ग्रामीणों ने मिलकर पैसा जुटाया.
राजस्थान के जालोर जिले के नरसाणा गांव में बना यह विद्यालय भवन जनसहयोग की मिसाल बन गया है. इस पहल की शुरुआत पंचायतीराज सेवा से रिटायर्ड अधिकारी, पूर्व विद्यार्थी और सरपंच प्रतिनिधि जसवंत सिंह ने की. उनकी अपील पर गांव के लोग एकजुट हुए और अपने पुराने स्कूल की तस्वीर बदलने का संकल्प लिया.
सात कमरों से शुरू हुआ सफर
एक समय नरसाणा के सरकारी स्कूल में सिर्फ सात कमरे थे. इनमें से दो कमरों का इस्तेमाल कार्यालय और स्टोर के रूप में होता था. ऐसे में करीब 450 से ज्यादा विद्यार्थियों के बैठने के लिए जगह नहीं थी. बच्चों को बरामदों और खुले स्थानों में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी. स्कूल की इस परेशानी को देखते हुए जसवंत सिंह ने पूर्व विद्यार्थियों और ग्रामीणों से सहयोग की अपील की. इसके बाद गांव में विद्यालय के लिए धन जुटाने की मुहिम शुरू हुई.
‘हर घर से एक ईंट’ की अपील
विद्यालय निर्माण के लिए हर घर से एक ईंट का संदेश दिया गया. गांव के लोगों के साथ दूसरे राज्यों में कारोबार करने वाले प्रवासी व्यवसायी भी इस मुहिम से जुड़े. किसी ने 51 हजार रुपये का सहयोग दिया, तो किसी ने सात लाख रुपये दिए. वहीं, कुछ भामाशाहों ने 21 लाख रुपये तक की राशि देकर स्कूल निर्माण में योगदान किया.
इस तरह ग्रामीणों और प्रवासी व्यवसायियों के सहयोग से करीब 4.50 करोड़ रुपये जुटाए गए. करीब साढ़े चार साल की मेहनत के बाद विद्यालय का नया भवन तैयार हुआ.
इन सुविधाओं से लैस है नया स्कूल
दो मंजिला विद्यालय भवन में विद्यार्थियों की पढ़ाई और दूसरी गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए कई सुविधाएं विकसित की गई हैं. इसमें 21 कमरे और दो बड़े हॉल बनाए गए हैं. इसके अलावा बच्चों के लिए अंडरग्राउंड इनडोर स्टेडियम और विज्ञान की पढ़ाई के लिए साइंस लैब भी बनाई गई है.
पानी की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 10 हजार लीटर क्षमता का वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी तैयार किया गया है. इससे बारिश के पानी को जमा करने और पानी की उपलब्धता बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.
स्कूल को संवारने लौटे पूर्व विद्यार्थी
नरसाणा के पूर्व विद्यार्थियों ने जिस स्कूल में पढ़कर अपने भविष्य की नींव रखी, उसी के विकास के लिए एकजुट होकर योगदान दिया. इस पहल से आने वाली पीढ़ियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने की कोशिश की गई है.
यह भवन केवल एक नई इमारत नहीं, बल्कि अपने गांव और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की भावना का उदाहरण है. नरसाणा के लोगों ने दिखाया कि जब ग्रामीण, पूर्व विद्यार्थी और प्रवासी व्यवसायी मिलकर प्रयास करते हैं, तो सामूहिक सहयोग से बड़े बदलाव की राह बनाई जा सकती है.



