Bikaner Ramlila: मजहब की दीवारें तोड़ रामलीला में उतरे मोहसिन खान, 19 साल से निभा रहे भगवान राम का किरदार

Last Updated:October 17, 2026, 18:49 IST
Bikaner Ramlila: बीकानेर में मुस्लिम कलाकार मोहसिन खान पिछले 19 वर्षों से रामलीला का मंचन कर भगवान श्रीराम के आदर्शों का संदेश दे रहे हैं. नेताजी सुभाष कला मंडल की रामलीला में हिंदू-मुस्लिम समेत 80 से अधिक कलाकार बिना पारिश्रमिक के योगदान देकर गंगा-जमुनी तहजीब और कौमी एकता की मिसाल पेश कर रहे हैं.
बीकानेर. धर्म और मजहब के नाम पर जहां कई बार छोटी-छोटी बातों पर विवाद खड़े हो जाते हैं, वहीं राजस्थान का बीकानेर आज भी अपनी गंगा-जमुनी तहजीब और कौमी एकता की मिसाल पेश कर रहा है. यहां एक मुस्लिम कलाकार पिछले 19 वर्षों से भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, करुणा और त्याग की गाथा को रामलीला के मंच पर साकार कर रहे हैं. मोहसिन खान नाम के ये कलाकार न केवल रामलीला का निर्देशन करते हैं, बल्कि इसमें अलग-अलग किरदार निभाकर भगवान राम के जीवन से जुड़े संदेशों को लोगों तक पहुंचाने में भी जुटे हैं.
नवरात्रि के अवसर पर शहर में कई स्थानों पर रामलीला का मंचन हो रहा है, लेकिन नेताजी सुभाष कला मंडल की ओर से आयोजित रामलीला अपने अनूठे सांस्कृतिक संदेश के कारण खास है. यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव की जीवंत तस्वीर भी पेश करता है. मोहसिन खान पिछले 19 वर्षों से इस परंपरा से जुड़े हुए हैं और पूरी शिद्दत के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.
कला मजहब की दीवारें तोड़कर दिलों को जोड़ती है
मोहसिन खान का मानना है कि कला को धर्म और मजहब के चश्मे से नहीं देखना चाहिए. कला का असली उद्देश्य लोगों को जोड़ना और समाज में इंसानियत का संदेश फैलाना है. उनका कहना है कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है और ईश्वर सब देख रहा है. इतने वर्षों से रामलीला से जुड़े रहने के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं हुई. उनके लिए भगवान राम के आदर्शों को मंच पर प्रस्तुत करना सामाजिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम है. इस रामलीला की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें हिंदू, मुस्लिम समेत विभिन्न धर्मों के 80 से अधिक छोटे-बड़े कलाकार और सहयोगी जुड़े हुए हैं. ये सभी बिना किसी पारिश्रमिक के निस्वार्थ भाव से आयोजन को सफल बनाने में योगदान देते हैं. सभी का उद्देश्य भगवान राम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना और शहर की साझा सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखना है.
आधुनिकता के दौर में परंपराओं को बचाने की चुनौती
आज की युवा पीढ़ी मोबाइल और डिजिटल दुनिया में अधिक व्यस्त होती जा रही है, इसके चलते पारंपरिक आयोजनों में दर्शकों की भागीदारी बनाए रखना और रामलीला जैसे मंचनों के लिए आर्थिक संसाधन जुटाना चुनौती बन गया है. इसके बावजूद कलाकार अपनी परंपरा को आगे बढ़ाने में लगे हैं. उनका प्रयास है कि आने वाली पीढ़ियां भी भारतीय संस्कृति, धार्मिक कथाओं और सामाजिक एकता के महत्व को समझें. भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं. उनका जीवन मर्यादा, त्याग, करुणा और कर्तव्य का संदेश देता है. बीकानेर की यह रामलीला बताती है कि आस्था और कला की कोई सीमा नहीं होती. जब उद्देश्य इंसानियत और प्रेम का संदेश देना हो, तो धर्म की दीवारें अपने आप छोटी पड़ जाती हैं. यही वजह है कि मोहसिन खान और उनकी पूरी टीम की पहल शहर की गंगा-जमुनी तहजीब को नई मजबूती दे रही है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Bikaner,Rajasthan
First Published :
October 17, 2026, 18:49 IST



