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15 दिन के भीतर होंगे चुनाव… फिर भी खत्‍म नहीं हुआ जामिया का छात्र आंदोलन, कांग्रेस सांसदों पर दर्ज हुई FIR

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15 दिन में चुनाव… फिर भी खत्‍म नहीं हुआ छात्र आंदोलन, 2 सांसदों पर FIR दर्ज

Last Updated:October 28, 2026, 14:47 IST

जामिया मिल्लिया इस्‍लामिया प्रशासन ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव करा लिए जाएंगे. विश्‍वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले के बावजूद छात्र अपना विरोध प्रदर्शन खत्‍म करने के लिए तैयार नहीं है. वहीं प्रशासन ने छात्रों पर जबरन परिसर में दाखिल होकर तोड़फोड़ के आरोप लगाए हैं. साथ ही, ट्रेस पासिंग के मामले में कांग्रेस सांसदों के ख‍िलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.Amazon Prime DayTop Deals Inside15 दिन में चुनाव... फिर भी खत्‍म नहीं हुआ छात्र आंदोलन, 2 सांसदों पर FIR दर्जZoomजामिया में छात्रों का 17वें दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी है. (Image: PTI)

नई दिल्ली. जामिया मिल्लिया इस्‍लामिया प्रशासन ने छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने का फैसला लिया है. इस फैसले के बावजूद छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर छात्र अपनी जिद पर लगतार अड़े हुए हैं. नतीजतन, 28 अक्‍टूबर को जामिया में छात्रों का प्रदर्शन जारी रहा है. आज यानी 28 अक्‍टूबर को इस प्रदर्शन का 17वां दिन है. विश्‍वविद्यायल प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद छात्र आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं. छात्रों की मांग है कि प्रशासन छात्र संघ के चुनाव की एक निश्चित तारीख घोषित करे. उनका कहना है कि 2006 के बाद से विश्वविद्यालय में छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं. इसके साथ ही छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने के लिए भी समयसीमा तय की जाए.

प्रशासन ने लगाया तोड़फोड़ का आरोप

आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने बुधवार को टूटी हुई खिड़कियों की तस्वीरें साझा कीं. अधिकारियों का आरोप है कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने जबरन परिसर के कुछ हिस्सों में प्रवेश किया. इस दौरान सीसीटीवी कैमरों और विश्वविद्यालय की दूसरी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया.
विश्वविद्यालय प्रशासन ने हालात को सामान्‍य करने के मकसद से सोमवार को एक आदेश भी जारी किया था. इस आदेश में छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने की बात कही गई थी.
इसके अलावा, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी आदेश में प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी किए गए सस्पेंशन और कारण बताओ नोटिस भी रद्द करने की बात कही गई थी.
आदेश में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मचारियों के व्यवहार की जांच के लिए एक कमेटी बनाने का भी प्रावधान किया गया था. लेकिन छात्रों का कहना है कि सिर्फ चुनाव कराने का भरोसा देना काफी नहीं है.
छात्रों का साफ कहना है कि जब तक छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने की समयसीमा तय नहीं होती और चुनाव की तारीख साफ नहीं होती, तब तक उनकी मांग पूरी नहीं मानी जा सकती है.
आंदोलन में शामिल चार छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में से एक रेहान खान ने सोमवार को कहा था कि उनकी पहली मांग छात्र संघ के चुनाव बहाल करने और चुनाव की तारीख घोषित करने की है.

सुरक्षा बढ़ने के बाद परिसर में तनावसोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा बढ़ाए जाने के बीच प्रदर्शनकारी छात्रों और अर्धसैनिक बलों के जवानों के बीच झड़पें हुई थीं. प्रशासन के खिलाफ नारे लगा रहे छात्रों को पुलिसकर्मियों ने विश्वविद्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया था. इससे पहले 24 अक्टूबर को विश्वविद्यालय ने छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए सभी कोर्स की क्लास ऑनलाइन कर दी थीं. प्रशासन के आदेश में यह भी कहा गया कि प्रदर्शनकारी छात्र आंदोलन के दौरान प्रशासन के खिलाफ दिए गए मानहानि वाले बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने पर सहमत हैं.

छात्र संगठनों और पूर्व छात्रों ने दिया समर्थनजामिया नगर के सैयदा मंजिल में सोमवार को जामिया कलेक्टिव की ओर से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई. इसमें विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों, संस्थापक परिवारों के सदस्यों, कलाकारों, वकीलों और छात्र प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया. इस दौरान परिसर में लोकतांत्रिक गतिविधियों के लिए जगह बहाल करने की मांग उठाई गई. एनएसयूआई, एआईएसएफ, एसएफआई, एआईडीएसओ, आइसा और डीआईएसएचए के प्रतिनिधियों ने भी छात्रों की मांगों का समर्थन किया. साथ ही प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत की जरूरत पर जोर दिया.

कांग्रेस सांसदों के खिलाफ भी दर्ज हुई एफआईआरछात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और इमरान प्रतापगढ़ी समेत अन्य लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है. यह कार्रवाई विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार मोहम्मद महताब आलम रिजवी की शिकायत पर हुई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि इमरान प्रतापगढ़ी ने 21 अक्टूबर को गेट नंबर 4ए का ताला तोड़कर परिसर में प्रवेश किया था. वहीं, इमरान मसूद पर 23 अक्टूबर को सीढ़ी की मदद से गफूर नगर के पास विश्वविद्यालय की चारदीवारी पर चढ़कर अंदर आने का आरोप है. 25 अक्टूबर को जामिया नगर पुलिस थाने में इस बाबत एफआईआर दर्ज कर ली गई है.

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October 28, 2026, 14:47 IST

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