Rajasthan

Ratanjot Plant Benefits: बादाम समझकर न खा लें ये बीज; उल्टी-दस्त करा सकता है रतनजोत, जानिए बालों और स्किन के लिए इसके फायदे

Last Updated:November 04, 2026, 08:27 IST

Ratanjot Medicinal Plant Benefits: सिरोही के माउंट आबू वन्यजीव अभ्यारण्य व अरावली क्षेत्र में पाई जाने वाली रतनजोत जड़ी-बूटी औषधीय गुणों से भरपूर है. सेवानिवृत्त जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. दामोदरप्रसाद चतुर्वेदी के अनुसार, इसके बीजों से बायोडीजल बनता है, लेकिन बादाम समझकर बीज खाने से उल्टी-दस्त हो सकते हैं क्योंकि ये जहरीले होते हैं. रतनजोत की जड़ का लाल रंग त्वचा व बालों के इलाज में काम आता है. नारियल तेल में गर्म कर लगाने से बालों का झड़ना रुकता है और त्वचा साफ होती है. जोड़ों के दर्द व बुखार में भी यह फायदेमंद है.

सिरोही जिले के माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य में कई दुर्लभ औषधीय पौधे पाए जाते हैं. इनका इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने के साथ अन्य कई कामों में भी किया जाता है. ऐसा ही एक पौधा रतनजोत है. आयुर्वेदिक गुणों के लिए पहचाने जाने वाले इस पौधे के बीजों में तेल की मात्रा अधिक होती है, जिससे बायोडीजल भी तैयार किया जाता है. हालांकि, इसके बीजों का सेवन करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. अगर कोई व्यक्ति इन्हें साबुत खा ले, तो उसे उल्टी, दस्त और पेट से जुड़ी कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं. सिरोही के सेवानिवृत्त जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. दामोदर प्रसाद चतुर्वेदी के मुताबिक, रतनजोत के बीज जहरीले हो सकते हैं.

रतनजोत के बीजों का इस्तेमाल कुछ जगहों पर तेल निकालने के लिए भी किया जाता है. खासतौर पर जेट्रोफा पौधे के बीजों से तेल प्राप्त किया जाता है, जिसका उपयोग बायोडीजल बनाने में होता है. हालांकि, इसके बीजों का सेवन इंसानों और पशुओं दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है. इसलिए इन्हें बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखना चाहिए.

रतनजोत की कुछ खास किस्मों की जड़ों से प्राकृतिक लाल रंग प्राप्त होता है. पुराने समय में इस रंग का इस्तेमाल तेल, सौंदर्य प्रसाधन और कुछ औषधियां बनाने में किया जाता था. इसकी जड़ में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से सूजन कम करने और त्वचा की देखभाल से जोड़कर देखा जाता है. पहले के समय में रतनजोत की जड़ का उपयोग त्वचा संबंधी कुछ समस्याओं के घरेलू उपचार में भी किया जाता था.

Add as Preferred Source on Google

रतनजोत का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से सूजन, त्वचा संबंधी परेशानियों और घावों की देखभाल के लिए किया जाता रहा है. बालों की देखभाल में भी इसका उपयोग किया जाता है. कुछ घरेलू नुस्खों में रतनजोत को नारियल या सरसों के तेल में गर्म करके बालों और स्कैल्प पर लगाया जाता है. माना जाता है कि इससे बालों की ग्रोथ बेहतर होती है और झड़ने की समस्या कम हो सकती है. इसके एंटी-माइक्रोबियल गुणों के कारण इसे स्कैल्प के संक्रमण और रूसी से बचाव के लिए भी उपयोगी माना जाता है. वहीं, आंवला पाउडर के साथ मिलाकर लगाने का पारंपरिक नुस्खा सफेद बालों की समस्या के लिए भी अपनाया जाता है. हालांकि, इन सभी फायदों को लेकर पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं.

गुलाब जल में रतनजोत का पाउडर मिलाकर फेस पैक की तरह इस्तेमाल करने का पारंपरिक चलन रहा है. माना जाता है कि इससे त्वचा की रंगत निखरती है और चेहरे पर चमक आती है. इसके अलावा, रतनजोत में पाए जाने वाले कुछ तत्वों को एंटी-माइक्रोबियल गुणों से जोड़कर देखा जाता है. पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल एक्जिमा, खुजली और त्वचा से जुड़ी अन्य समस्याओं में भी किया जाता रहा है. हालांकि, गंभीर त्वचा रोगों में इसका इस्तेमाल करने से पहले किसी आयुर्वेदिक वैद्य या त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.

रतनजोत के तेल का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से गठिया, जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों में खिंचाव जैसी समस्याओं में मालिश के लिए किया जाता रहा है. वहीं, इसके पत्तों और जड़ों से तैयार मंजन का उपयोग मसूड़ों से जुड़ी समस्याओं के घरेलू उपचार में भी बताया जाता है. कुछ पारंपरिक नुस्खों में इसकी जड़ों का काढ़ा बुखार कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था. इसके अलावा, इसे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने और दिल की सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है. हालांकि, इन दावों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं. रतनजोत के बीज जहरीले हो सकते हैं, इसलिए इसका काढ़ा या अन्य उत्पाद बिना विशेषज्ञ की सलाह के सेवन न करें.

लेटेस्ट कॉमर्स डील्स, खास डिस्काउंट और बेहतरीन शॉपिंग ऑफर देखने के लिए कंपेयर इंड‍िया✅देखें.First Published :

November 04, 2026, 08:27 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj