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Agriculture: देसी कपास में अमेरिकन से 26% ज्यादा पैदावार, फिर भी किसान क्यों बना रहे दूरी? ये है मुख्य वजह

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देसी कपास में अमेरिकन से 26% ज्यादा पैदावार, फिर भी किसान क्यों बना रहे दूरी?

Last Updated:October 11, 2026, 10:24 IST

Desi Cotton vs American Cotton Yields: राजस्थान के श्रीगंगानगर में कपास पर हुए अनुसंधान में देसी कपास की उत्पादन क्षमता को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं. स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान केंद्र में किए गए शोध के अनुसार, देसी कपास की पैदावार अमेरिकन कपास की तुलना में करीब 26 प्रतिशत अधिक पाई गई है. अनुसंधान अधिकारी डॉ. एनके शर्मा के अनुसार, केंद्र में वर्ष 1967 से कपास की विभिन्न किस्मों पर शोध किया जा रहा है. वर्तमान में देसी और अमेरिकन कपास की 14 किस्मों के साथ संकर किस्मों का भी परीक्षण किया जा रहा है. हालांकि, नहरबंदी के आसपास बुवाई का समय और फसल की दो से तीन बार चुनाई जैसी चुनौतियों के कारण किसान देसी कपास से दूरी बना रहे हैं. कृषि विशेषज्ञों का जोर अब इसकी खूबियों के प्रति किसानों को जागरूक करने और खेती को प्रोत्साहित करने पर है.Amazon Prime DayTop Deals Inside

बीकानेर. देसी कपास का प्रचलन भले ही लगातार कम हो रहा हो, लेकिन श्रीगंगानगर में हुए अनुसंधान में इसके बेहतर उत्पादन को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं. शोध के अनुसार, देसी कपास की कुल पैदावार अमेरिकन कपास की तुलना में करीब 26 प्रतिशत अधिक पाई गई है. ऐसे में कृषि विशेषज्ञ देशी कपास को बढ़ावा देने और किसानों को इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दे रहे हैं. स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान अधिकारी डॉ. एनके शर्मा ने बताया कि श्रीगंगानगर स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र में वर्ष 1967 से कपास पर अनुसंधान किया जा रहा है.  कपास इस क्षेत्र की प्रमुख फसलों में शामिल है. यहां देसी और अमेरिकन कपास की विभिन्न किस्मों के साथ संकर किस्मों का भी परीक्षण किया जा रहा है. डॉ. शर्मा ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत अनुसंधान केंद्र में देसी और अमेरिकन कपास की कुल 14 किस्मों पर काम किया जा रहा है.

इनमें देसी कपास की चार और अमेरिकन कपास की 10 किस्में शामिल हैं. इसके अलावा निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की ओर से विकसित संकर किस्मों का भी परीक्षण किया जाता है. आईसीएआर के साथ-साथ उत्तर क्षेत्र के लिए स्वीकृत बीटी कॉटन हाइब्रिड का भी परीक्षण पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इन तीनों राज्यों में छह अलग-अलग स्थानों पर संकर किस्मों के परीक्षण किए जाते हैं. इनके उत्पादन, बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता और प्रदर्शन का आकलन किया जाता है. परीक्षण के परिणामों के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली संकर किस्मों की पहचान कर हर साल राजस्थान सरकार को उनकी सिफारिश की जाती है, ताकि उपयुक्त किस्मों की बिक्री की अनुमति देने के संबंध में निर्णय लिया जा सके.

अमेरिकन की तुलना में देसी कपास का उत्पादन क्षमता 26 प्रतिशत अधिक 

डॉ. शर्मा ने बताया कि अनुसंधान के दौरान देसी कपास की पैदावार अमेरिकन कपास की तुलना में करीब 26 प्रतिशत अधिक पाई गई है. यह निष्कर्ष अनुसंधान के आधार पर सामने आया है. उन्होंने बताया कि देसी कपास की खेती को प्रोत्साहित करने की जरूरत है. हालांकि, इसका प्रचलन कम होने के पीछे कुछ व्यावहारिक कारण भी हैं। देसी कपास की बुवाई का समय नहरबंदी की अवधि के आसपास होता है. इसके अलावा इसकी फसल में दो से तीन बार चुनाई करनी पड़ती है. मजदूरों की सीमित उपलब्धता के कारण भी किसान देसी कपास की खेती को प्राथमिकता नहीं दे पा रहे हैं. ऐसे में जरूरत है कि किसानों को देसी कपास की विशेषताओं और इसकी उत्पादन क्षमता के बारे में जानकारी दी जाए.

बीकानेरी नरमा और आरजी-8 जैसी किस्में आज भी प्रचलित

श्रीगंगानगर कृषि अनुसंधान केंद्र में कपास पर लंबे समय से शोध हो रहा है. डॉ. शर्मा के अनुसार, बीकानेरी नरमा, गंगानगर अगेता और आरएसटी-9 जैसी पुरानी किस्मों को आज भी किसान जानते हैं. वहीं, देसी कपास की आरजी-8 किस्म भी प्रचलित किस्मों में शामिल है. उन्होंने बताया कि देसी कपास को बढ़ावा देने के लिए किसानों को जागरूक करना जरूरी है. इसके लिए इसकी उत्पादन क्षमता, खेती के अनुकूल समय और उपयोगिता के बारे में जानकारी उपलब्ध करानी होगी. कपास की विभिन्न किस्मों पर अनुसंधान अभी भी जारी है. वैज्ञानिकों का प्रयास है कि किसानों को ऐसी किस्में उपलब्ध कराई जाएं, जिनसे बेहतर पैदावार मिल सके और बीमारियों से होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सके.

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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Bikaner,Rajasthan

First Published :

October 11, 2026, 10:24 IST

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