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Bharatpur Collectrate Cannon | कलेक्ट्रेट की ऐतिहासिक तोप

Last Updated:May 11, 2026, 08:09 IST

Bharatpu Dharohar: भरतपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थापित ऐतिहासिक तोप पिछले 30 वर्षों से वीरता और शौर्य का प्रतीक बनी हुई है. लोहागढ़ किले से लाकर यहाँ स्थापित की गई यह तोप प्रशासनिक परिसर की शोभा बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को भरतपुर के गौरवशाली इतिहास से जोड़ती है. विशाल आकार वाली यह तोप पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र है. यह धरोहर नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के अजेय साहस और पराक्रम की याद दिलाती है, जिससे आम जन में देशभक्ति और स्वाभिमान की भावना जागृत होती है.

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भरतपुर. राजस्थान का भरतपुर जिला अपने ‘लोहागढ़’ किले और कभी न हारने वाले जज्बे के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. इसी वीरता और अजेय साहस की जीवंत मिसाल आज भी भरतपुर कलेक्ट्रेट परिसर में देखने को मिलती है. यहाँ स्थापित एक विशाल ऐतिहासिक तोप पिछले तीन दशकों से प्रशासनिक केंद्र की शोभा बढ़ा रही है. करीब 30 वर्ष पहले इस तोप को धरोहर के रूप में यहाँ संरक्षित किया गया था, जो आज न केवल एक आकर्षण का केंद्र है, बल्कि भरतपुर के गौरवशाली सैन्य इतिहास की याद भी दिलाती है.

विशाल आकार और अभेद्य धातु से बनी यह तोप अपनी अनोखी बनावट के कारण दूर से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है. जानकारों के मुताबिक, इस तोप को खास तौर पर भरतपुर के ऐतिहासिक किले (लोहागढ़) से लाकर यहाँ स्थापित किया गया था. इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि प्रशासनिक कार्यों के लिए आने वाले आम नागरिक और युवा पीढ़ी अपने पूर्वजों के शौर्य और वीरता को करीब से महसूस कर सकें. यह तोप उस दौर की गवाही देती है जब भरतपुर की तोपों की गूंज से दुश्मन के खेमे में थरथराहट पैदा हो जाती थी.

स्वाभिमान और पहचान का प्रतीकस्थानीय निवासियों और राज परिवार से जुड़े लोगों के लिए यह तोप महज धातु का एक ढांचा नहीं, बल्कि भरतपुर की पहचान और स्वाभिमान का प्रतीक है. कलेक्ट्रेट आने वाले लोग जब इस तोप को देखते हैं, तो उनके मन में अपने समृद्ध इतिहास के प्रति गर्व की भावना जाग उठती है. आज के आधुनिक युग में, जहाँ पुरानी परंपराएं धुंधली होती जा रही हैं, यह ऐतिहासिक धरोहर नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है. यहाँ आने वाले पर्यटक और छात्र अक्सर इस तोप के साथ फोटो खिंचवाते हैं और इसके इतिहास के बारे में जानने की उत्सुकता दिखाते हैं.

संरक्षण की अहमियतधरोहरों का संरक्षण हमारी संस्कृति को जीवित रखने के लिए अनिवार्य है. कलेक्ट्रेट परिसर में इस तोप की मौजूदगी यह संदेश देती है कि विकास के साथ-साथ अपनी ऐतिहासिक विरासत को सहेजना भी उतना ही जरूरी है. पिछले 30 वर्षों से यह तोप कलेक्ट्रेट की चारदीवारी के भीतर देशभक्ति और पराक्रम की भावना को जीवित रखे हुए है. यह जीवंत कहानी आने वाले कई सालों तक लोगों को भरतपुर के उस सुनहरे अतीत की याद दिलाती रहेगी, जिसे कभी कोई जीत नहीं सका.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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