Bikaner News: 28 दिन तक केवल उबले जल पर रही अनिता नाहटा, जैन संस्कार विधि से हुआ मासखमण तप का पारणा

Last Updated:August 25, 2026, 13:38 IST
बीकानेर के गंगाशहर की नई लाइन निवासी श्रद्धालु अनिता नाहटा ने 28 दिनों तक निराहार रहकर कठिन मासखमण तपस्या पूर्ण की. जैन संस्कार विधि के अनुसार मांगलिक मंत्रोच्चार के बीच उनका पारणा करवाया गया। तपस्विनी के दृढ़ मनोबल, संयम और अटूट इच्छाशक्ति की समाजजनों ने सराहना की. तपस्या के दौरान उन्होंने सामायिक, जप, स्वाध्याय, धर्म-ध्यान और प्रवचन श्रवण के साथ साधना को निरंतर बनाए रखा.
बीकानेर. गंगाशहर की नई लाइन निवासी श्रद्धालु अनिता नाहटा ने लगातार 28 दिनों तक निराहार रहकर मासखमण की कठिन तपस्या पूर्ण की. तपस्या संपन्न होने पर जैन संस्कार विधि के अनुसार विधि-विधान और मांगलिक मंत्रोच्चार के बीच उनका पारणा करवाया गया. इस अवसर पर उपस्थित समाज के लोगों ने तपस्विनी के दृढ़ मनोबल, संयम और अटूट इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए उनके प्रति मंगलकामनाएं व्यक्त की. जैन संस्कार विधि के ‘श्री संस्कारक’ धर्मेंद्र डाकलिया ने अनिता नाहटा का पारणा करवाते हुए कहा कि लगातार 28 दिनों तक निराहार रहना दृढ़ मनोबल, रसनेन्द्रिय पर विजय और अटूट इच्छाशक्ति का अनुपम उदाहरण है.
वर्तमान समय में कुछ समय तक भी भूखा रहना कठिन प्रतीत होता है, ऐसे में लगभग एक महीने तक अन्न का त्याग कर तपस्या करना अत्यंत कठिन साधना है. उन्होंने कहा कि जैन धर्म में तपस्या को आत्मशुद्धि का महान साधन बताया गया है. तप के माध्यम से व्यक्ति अपने संचित कर्मों को क्षीण करने की दिशा में आगे बढ़ता है. धर्मेंद्र डाकलिया ने मांगलिक मंत्रोच्चार के साथ तप संपूर्ति अनुष्ठान संपन्न करवाया.
मंगल भावना यंत्र की विधि संपन्न करवाई
जैन संस्कार विधि को आचार्य तुलसी का महान अवदान बताते हुए कहा कि यह विधि सादगी, अहिंसा और आडंबर रहित धार्मिक आयोजन का संदेश देती है. उन्होंने समाज के लोगों से धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में इस विधि को अपनाने का आह्वान किया. सहयोगी संस्कारक देवेंद्र डागा और विपिन बोथरा ने मंगल भावना यंत्र की विधि संपन्न करवाई. इसके साथ ही उन्होंने तपस्विनी को पारणे के बाद स्वास्थ्य और दैनिक जीवन में ध्यान रखने योग्य बातों की जानकारी देते हुए आवश्यक संकल्प ग्रहण करवाए. रश्मि दसानी ने बताया कि अनिता नाहटा ने 28 दिनों की तपस्या के दौरान सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच केवल थोड़ी मात्रा में उबले हुए जल का सेवन किया.
रोशन नाहटा और कीर्ति नाहटा ने बताया कि इस कठिन तपस्या के दौरान अनिता नाहटा ने नियमित रूप से सामायिक, जप, स्वाध्याय, धर्म-ध्यान और प्रवचन श्रवण किया. इससे उन्होंने अपनी साधना को निरंतर बनाए रखते हुए भावों को निर्मल रखा. शीलम और भावना ने बताया कि देव, गुरु और धर्म के पुण्य प्रभाव, गंगाशहर में विराजित साधु-साध्वियों की नियमित प्रेरणा, दर्शन लाभ तथा तपस्विनी के दृढ़ संकल्प के कारण यह कठिन तपस्या सानंद संपन्न हुई. आयोजन के दौरान धर्मेंद्र डाकलिया, देवेंद्र डागा और विपिन बोथरा ने विभिन्न जैन धार्मिक मंत्रों तथा आध्यात्मिक गीतिकाओं के संगान से वातावरण को भक्तिमय बना दिया. धर्मेंद्र डाकलिया ने उपस्थित लोगों को जैन संस्कार विधि की विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने अनिता नाहटा की तपस्या के उपलक्ष्य में प्रत्येक व्यक्ति से अपनी क्षमता और सुविधा के अनुसार कोई छोटा या बड़ा त्याग करने का आग्रह किया.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Bikaner,Rajasthan
First Published :
August 25, 2026, 13:38 IST



