Bikaner Swarupa Soni Matchbox Collection

Bikaner: बीकानेर से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां कक्षा 7वीं की 15 वर्षीय छात्रा स्वरूपा सोनी ने अपने अनोखे शौक से सभी को हैरान कर दिया है. डिजिटल युग में जहां बच्चे मोबाइल और टेक्नोलॉजी में व्यस्त रहते हैं, वहीं स्वरूपा ने पिछले 5 वर्षों की कड़ी मेहनत और लगन से 35,000 से अधिक माचिस की डिब्बियों का दुर्लभ और ऐतिहासिक संग्रह तैयार किया है. उनका यह संग्रह किसी बड़े निजी संग्रहालय से कम नजर नहीं आता.
स्वरूपा का यह कलेक्शन सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दुनिया के कई प्रमुख देशों की वैश्विक विविधता देखने को मिलती है. उनके पास इंग्लैंड, इजरायल, जापान, अमेरिका, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों की माचिस की डिब्बियां मौजूद हैं. इसके अलावा, भारत के लगभग हर राज्य की पारंपरिक, सांस्कृतिक और आधुनिक डिजाइन वाली माचिस की डिब्बियां भी उनके इस संग्रह की शोभा बढ़ा रही हैं.
ऐतिहासिक स्मारकों, वन्यजीवों और देशभक्तों के चित्रों से सजी डिब्बियांइन माचिस की डिब्बियों की सबसे बड़ी खासियत इनकी अनूठी विविधता है. इन पर केवल ब्रांड के नाम नहीं हैं, बल्कि ऐतिहासिक धरोहरें, वन्यजीव, धार्मिक स्थल, देशभक्त, लोक संस्कृति, राष्ट्रीय प्रतीक और महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश उकेरे गए हैं. इनमें से कई डिब्बियां ‘सीमित संस्करण’ (Limited Edition) की हैं, जो आज के समय में बाजार में मिलना नामुमकिन हैं. यही वजह है कि यह संग्रह अब केवल एक शौकिया कलेक्शन न होकर एक सांस्कृतिक दस्तावेज बन चुका है.
10 इंच लंबी और सवा इंच की तीलियों वाली माचिस बनीं आकर्षण का केंद्रसंग्रह में कई माचिस की डिब्बियां अपनी अनोखी बनावट और आकार के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करती हैं. इनमें लगभग 10 इंच लंबी माचिस से लेकर सवा इंच की तीलियों वाली बेहद छोटी माचिस भी शामिल हैं. लकड़ी, कार्डबोर्ड और विशेष पैकेजिंग वाली इन डिब्बियों पर उकेरी गई कलाकृतियां, सुनहरे प्रिंट और आकर्षक चित्रांकन इन्हें बेहद खास बनाते हैं.
पिता किशन सोनी और परिजनों के सहयोग से पूरा हुआ मुकामस्वरूपा के पिता किशन सोनी ने बताया कि बचपन से ही घर में पुरानी व दुर्लभ वस्तुओं को सहेजते देखकर स्वरूपा के मन में कुछ अलग करने की इच्छा जागी. उसने माचिस की डिब्बियों को इकट्ठा करने को अपना लक्ष्य बनाया. उसके इस जुनून को देखकर परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों ने भी पूरा सहयोग किया, जिसकी बदौलत आज यह कलेक्शन 35,000 के आंकड़े को पार कर चुका है. स्वरूपा की यह उपलब्धि आज के युवाओं को संदेश देती है कि धैर्य और अनुशासन से कोई भी शौक बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है.



