अजमेर की इस पहाड़ी पर सालभर बहता है झरना, खुद होता है शिवलिंग का जलाभिषेक, सावन में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

Last Updated:August 05, 2026, 15:11 IST
Ajmer Jharneshwar Mahadev Temple: अजमेर में 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित प्राचीन झरनेश्वर महादेव मंदिर सावन के महीने में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. मराठा कालीन इस मंदिर में सम्राट पृथ्वीराज चौहान भी पूजा-अर्चना करते थे. ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह के ऊपर स्थित यह मंदिर हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है, जहां सावन में कांवड़ियों का फूलों से स्वागत किया जाता है.
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Ajmer: हिंदू धर्म में सावन माह का अत्यंत पवित्र और विशेष महत्व माना जाता है. इस पूरे महीने में श्रद्धालु देशभर के प्रसिद्ध शिवालयों में दर्शन, पूजन और जलाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. राजस्थान के अजमेर में भी अरावली की सुंदर पहाड़ियों के बीच एक ऐसा ही प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिर स्थित है, जो अपनी अगाध धार्मिक मान्यता, अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और अनूठे सांप्रदायिक सौहार्द के लिए पूरे प्रदेश में विशेष पहचान रखता है. इस पवित्र धाम को झरनेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है.
यह पावन मंदिर धरातल से लगभग 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है. प्राचीन काल में मंदिर तक पहुंचने का मार्ग काफी कच्चा, पथरीला और दुर्गम हुआ करता था, जिससे श्रद्धालुओं को चढ़ाई करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था. हालांकि, अब स्थानीय प्रशासन और भामाशाहों के सहयोग से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पक्की सीढ़ियों का निर्माण करवा दिया गया है, जिससे अब मंदिर तक की चढ़ाई काफी आसान और सुगम हो गई है. इस स्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पहाड़ी से वर्षभर प्राकृतिक रूप से जल की धारा बहती रहती है और शिवलिंग का स्वतः जलाभिषेक होता रहता है. इस बहते झरने के कारण ही इस धाम का नाम ‘झरनेश्वर महादेव’ पड़ा.
मराठा काल में हुई थी स्थापना, सम्राट पृथ्वीराज चौहान से जुड़ा है इतिहासमंदिर के पुजारी और स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना मराठा शासन काल के दौरान हुई थी. ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, महान राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान भी अपने शासनकाल में इस एकांत और पवित्र पहाड़ी स्थान पर आकर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना और ध्यान किया करते थे. यही ऐतिहासिक और धार्मिक कारण है कि यह मंदिर सदियों से लाखों शिवभक्तों की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. सावन के पूरे महीने में यहां सुबह तड़के से लेकर देर शाम तक भक्तों का तांता लगा रहता है. श्रद्धालु कतारबद्ध होकर शिवलिंग पर जल, कच्चा दूध, बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित कर भगवान भोलेनाथ से सुख, समृद्धि व आरोग्यता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
हिंदू-मुस्लिम सौहार्द की अनूठी मिसाल है यह पवित्र शिव धामझरनेश्वर महादेव मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का भी एक बड़ा प्रतीक है. यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के ठीक ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है, जिसके कारण यह स्थान वर्षों से हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश कर रहा है. सावन के महीने में जब दूर-दराज से हजारों कांवड़िए और शिवभक्त जल लेकर पहाड़ी मार्ग से होकर मंदिर की ओर बढ़ते हैं, तब रास्ते में स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग उनका गुलाब के फूलों की वर्षा कर गर्मजोशी से स्वागत करते हैं.
जानिए कैसे पहुंच सकते हैं झरनेश्वर महादेव मंदिर?यदि आप भी सावन के इस पावन अवसर पर या किसी अन्य समय अजमेर स्थित झरनेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन करने का विचार बना रहे हैं, तो यहां पहुंचना बेहद आसान है. सबसे पहले आपको अजमेर शहर पहुंचना होगा. अजमेर रेलवे स्टेशन या मुख्य बस स्टैंड से दरगाह क्षेत्र तक जाने के लिए ऑटो, ई-रिक्शा और टैक्सी सेवाएं चौबीसों घंटे आसानी से उपलब्ध रहती हैं. दरगाह क्षेत्र में पहुंचने के बाद आप पहाड़ियों की ओर जाने वाले पैदल मार्ग और सीढ़ियों का सहारा लेकर आसानी से इस दर्शनीय व प्राकृतिक शिव धाम तक पहुंच सकते हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Ajmer,Ajmer,Rajasthan
First Published :
August 05, 2026, 15:11 IST



