World

Bolivia Crisis : खजाने से भरा पड़ा है ये देश, फिर भी दाने-दाने को तड़प रहे नागरिक, अब किसानों-मजदूरों ने ‘जनता को बनाया बंधक’

सुक्रे: दक्षिण अमेरिकी देश बोलिविया उस खजाने से भरा पड़ा है, जिसे लिए लिए दुनिया के बड़े-बड़े देश आपस में लड़ रहे हैं, फिर भी इस देश के लोग दाने-दाने को मोहताज हैं, महंगाई 40 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है, जिससे लोगों के घरों में चूल्हा जलना तक मुश्किल हो गया है. हालत इतनी बदतर है कि दवाइयों, रोजगार और राशन जैसी बेसिक चीजों के लिए भी जनता तड़प रही है. अब किसानों-मजदूरों का सब्र का बांध पूरी तरह टूट चुका है और वे आर-पार की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतर आए हैं. पिछले 50 दिनों से पूरे देश में भयंकर चक्काजाम और नाकाबंदी कर दी गई है और गुस्साए लोग सीधे राष्ट्रपति से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.

बोलिविया में चल क्या रहा है?

बोलिविया इस वक्त इतिहास के सबसे बड़े और खौफनाक राजनीतिक संकट से गुजर रहा है. लगातार 50 दिनों से जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों, चक्का जाम और ठप पड़ी अर्थव्यवस्था के बीच वहां के राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने शनिवार को पूरे देश में आपातकाल का ऐलान कर दिया है. महंगाई और आर्थिक तंगी को लेकर शुरू हुआ ये आंदोलन अब इस कदर उग्र हो चुका है कि मजदूर संगठन, किसान और पूर्व राष्ट्रपति एवो मोरालेस के समर्थक सड़कों पर डटे हैं और सीधे तौर पर राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए देशव्यापी रोड ब्लॉक की वजह से कई शहरों में खाने-पीने की चीजों, ईंधन और मेडिकल सप्लाई की भारी किल्लत हो गई है, जिससे पूरा देश एक तरह से बंधक बन चुका है.

‘जनता को बंधक नहीं रहने देंगे’ सड़कों को खाली कराएगी सेना

राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने शनिवार को राष्ट्र के नाम एक कड़ा संदेश जारी करते हुए इस आपातकाल की घोषणा की. उन्होंने साफ कर दिया कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है और देश को ठप करने वाले इन उपद्रवियों से कड़ाई से निपटा जाएगा. देश को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा ‘मैंने देश की सड़कों को इन अवैध रुकावटों से पूरी तरह मुक्त कराने के लिए स्टेट ऑफ एक्सेप्शन लागू करने का आदेश दे दिया है. बोलिविया के नागरिक अब उन लोगों के बंधक बनकर और ज्यादा नहीं रह सकते जो उन्हें काम करने, पढ़ाई करने, इलाज कराने, राशन जुटाने और अपने घरों तक रोजी-रोटी पहुंचाने से रोक रहे हैं’.

राष्ट्रपति ने साफ किया कि इस कदम के बाद अब सेना और पुलिस को देश में कानून-व्यवस्था बहाल करने और हिंसा को रोकने के लिए बल प्रयोग करने के पूरे अधिकार मिल गए हैं. केंद्रवादी विचारधारा के राष्ट्रपति पाज ने महज सात महीने पहले ही बोलिविया की कमान संभाली थी. उन्हें विरासत में एक पीढ़ी का सबसे खराब आर्थिक दौर मिला है, जिसने बोलिविया में पिछले दो दशकों से चले आ रहे वामपंथी शासन का अंत कर दिया था. साल 2006 से लगभग लगातार बोलिविया पर राज करने वाली वामपंथी पार्टी ‘मूवमेंट टू सोशलिज्म’ की विदाई के बाद पाज़ का चुना जाना इस देश के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव था.

राष्ट्रपति ने अपने भाषण में साफ किया कि आपातकाल का फैसला कोई जल्दबाजी में नहीं लिया गया है. उन्होंने कहा, ‘जायज मांगें रखने वाले समूहों के साथ हमने हर तरह की बातचीत की और समझौतों तक पहुंचे लेकिन इसके बावजूद कुछ संगठित और हिंसक तत्व देश को अस्थिर करने की साजिश रच रहे हैं. सभी रास्ते आजमाने के बाद अब पूरे राष्ट्रीय क्षेत्र में आपातकाल लागू करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था’. बता दें कि पिछले महीने ही पाज ने एक कानून पर दस्तखत किए थे जो सेना को आंतरिक संघर्षों में दखल देने की इजाजत देता है, हालांकि उन्होंने इसे आखिरी विकल्प बताया था.

आखिर क्यों सुलग उठा बोलिविया?

इस पूरे बवाल की जड़ें इस साल मई महीने से जुड़ी हैं, जब राष्ट्रपति पाज़ ने देश के बढ़ते राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए सालों से चली आ रही ईंधन सब्सिडी को अचानक खत्म कर दिया. इस फैसले के बाद देश का आर्थिक संकट और गहरा गया.

विदेशी मुद्रा की भारी कमी: देश के पास अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए डॉलर और विदेशी मुद्रा का रिजर्व लगभग खत्म हो चुका है.
गैस निर्यात में भारी गिरावट: बोलिविया की अर्थव्यवस्था का मुख्य जरिया रहे प्राकृतिक गैस के निर्यात में भारी कमी आई है.
40 साल की रिकॉर्ड महंगाई: देश में इस वक्त महंगाई पिछले 40 सालों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है, जिससे आम जनता का जीना मुहाल है.
ईंधन की किल्लत: पेट्रोल-डीजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है, जिससे ट्रांसपोर्ट सिस्टम पूरी तरह ठप है.

इसी बदहाली के खिलाफ अब मजदूर संगठन और यूनियंस सड़कों पर हैं. वे न सिर्फ राष्ट्रपति का इस्तीफा मांग रहे हैं, बल्कि वेतन में बढ़ोतरी और देश में जारी ईंधन और डॉलर के संकट को तुरंत खत्म करने की मांग पर अड़े हैं.

वाशिंगटन से दोस्ती और $1.5 बिलियन की डील भी नहीं आई काम

अपनी आर्थिक नैया को डूबने से बचाने के लिए राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज लगातार प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने साल 2009 से अमेरिका के साथ तनावपूर्ण चल रहे कूटनीतिक रिश्तों को दोबारा मजबूत करने की पहल की है. इसी कड़ी में पिछले सितंबर में उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर करीब 125 अरब रुपए के एक बड़े आर्थिक सहयोग समझौते का खाका तैयार किया था, ताकि देश में ईंधन की सप्लाई को सुचारू रूप से जारी रखा जा सके लेकिन इस अंतरराष्ट्रीय मदद के जमीन पर उतरने से पहले ही देश के भीतर अंदरूनी कलह और गृहयुद्ध जैसे हालात बन गए हैं. वामपंथी समर्थक और यूनियन नेता इस अमेरिकी झुकाव और सब्सिडी कटौती को देश की जनता के साथ धोखा बता रहे हैं, जिसके चलते पूरा बोलिविया इस समय बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है.

खजाने पर बैठे देश की कैसे हुई ये हालत?

बोलिविया के पास प्राकृतिक गैस, लिथियम और चांदी जैसे कीमती खनिजों का बहुत बड़ा खजाना है. इसके बावजूद, सही मैनेजमेंट न होने और राजनीतिक उथल-पुथल की वजह से देश इस दौलत का फायदा अपनी जनता तक नहीं पहुंचा पाया है.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj