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मनहूस बनी 11 जुलाई! साल बदले पर नहीं थमा जान जानें का सिलसिला, अब वियतनाम में ली 15 भारतीयों की जिंदगी | 11-july-black-day-vietnam-boat-accident-india

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मनहूस 11 जुलाई! साल बदले पर नहीं थमा सिलसिला, फिर गई 15 की भारतीयों की जिंदगी

Last Updated:July 11, 2026, 19:44 IST

11 July & Vietnam Boat Accident: 11 जुलाई एक बार फिर दर्दनाक हादसे की तारीख बन गई है. इसी तारीख को एक बार फिर वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास भारतीय पर्यटकों से भरी नाव पलटने से 15 लोगों की मौत हुई है. भारतीय दूतावास राहत और बचाव अभियान में जुटा है. हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं. इससे पहले भी 11 जुलाई को दुनिया भर में कई बड़े हादसे हो चुके हैं, जिनमें विमान दुर्घटनाएं, मुंबई ट्रेन ब्लास्ट, भूकंप, गैस टैंकर विस्फोट और अन्य त्रासदियों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है. जानिए क्यों बार-बार चर्चा में आती है 11 जुलाई की तारीख.मनहूस 11 जुलाई! साल बदले पर नहीं थमा सिलसिला, फिर गई 15 की भारतीयों की जिंदगीZoomहादसों को लेकर 11 जुलाई का इतिहास बेहद खूनी रहा है.

11 July & Vietnam Boat Accident: एक बार फिर सिर्फ साल बदला, लेकिन 11 जुलाई का खूनी सफर जारी रहा. इस बार 11 जुलाई का कहर वियतनाम में घूमने आए सैलानियों पर बरसा. शनिवार दोपहर वियतनाम के मशहूर फु क्वोक द्वीप के पास टूरिस्‍ट से भरी एक नाव समुद्र में पटल गई. इस नाव में भारतीय मूल के करीब 36 टूरिस्‍ट सवार थे. मौके पर मौजूद राहत और बचाव दल में लंबी जद्दोजहद के बाद 21 भारतीय टूरिस्‍ट की जान बचा ली है. वहीं, 15 भारतीय टूरिस्‍ट समुद्र की तेज लहरों के बीच जीवन की जंग हार गए. इस घटना की जानकारी मिलने के बाद भारतीय दूतावास के अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं. भारतीय दूतावास की तरफ से हताहतों की मदद के लिए हर संभव मदद मुहैया कराई जा रही है.

वहीं, दुखद हादसे के बाद भारतीय दूतावास ने हेल्‍पलाइन नंबर जारी किए हैं, जिससे हताहतों के परिजनों तक सही जानकारी और मदद पहुंचाई जा सके. इस हादसे से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए हो ची मिन्ह सिटी में +84 36 281 7930, +84 91 552 3714 और +84 33 452 0414 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है. इसके अलावा, हनोई में बनाए गए कंट्रोल रूम के लिए +84 91 308 9165 नंबर जारी किया गया है. वहीं, अतीत में 11 जुलाई को हुए हादसों की बात करें, तो अब तक एक दर्जन से अधिक ऐसे वाकए सामने हैं, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान गई है. कभी 11 जुलाई को एयरक्रैश हुआ, कभी भूकंप ने सैकड़ों लोगों की जान ली, तो कभी गैस टैंकर फटने और आतंकी हमलों में सैकड़ों की जान गई.

साल बदले पर जारी रहा 11 जुलाई को हादसों का सिलसिला

2011: ओब नदी में इमरजेंसी लैंडिंग, 7 की गई जान11 जुलाई 2011 को रूस की अंगारा एयरलाइंस की फ्लाइट 9007 उड़ान भरने के कुछ समय बाद हादसे का शिकार हो गई. जांच में पता चला कि उड़ान के दौरान उसके इंजन में अचानक आग लग गई थी. हालात बिगड़ते देख पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और प्‍लेन को ओब नदी में उतार दिया. इस हादसे में प्‍लेन में सवार 37 लोगों में से सात की मौत हो गई, जबकि 30 लोगों की जान बच गई. जांच में सामने आया कि प्‍लेन के इंजन में लगी आग इस हादसे की सबसे बड़ी वजह थी.
2006: मुंबई की लोकल ट्रेनों में 11 मिनट में हुए 7 धमाके11 जुलाई 2006 को लोकल ट्रेनों में सिलसिलेवार तरीके से हुए बम धमाकों ने मुंबई को दहला दिया था. आतंकियों ने महज महज 11 मिनट के भीतर सात बम धमाकों को अंजाम दिया था. धमाके इतने तेज थे कि ट्रेन के कई डिब्बे पूरी तरह बर्बाद हो गए. इस आतंकी हमले में 187 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, जबकि 700 से अधिक लोग घायल हुए थे. इन बम धमाकों को जांच एजेंसियों ने सुनियोजित आतंकी हमला बताया था. यह हादसे को भारतीय रेल में हुए सबसे बड़े आतंकी हमलों में गिना जाता है.
1991: टेकऑफ के कुछ मिनट बाद आग का गोला बना प्‍लेन11 जुलाई 1991 को नाइजीरिया एयरवेज की फ्लाइट 2120 सऊदी अरब के जेद्दा एयरपोर्ट से उड़ान भर रही थी. टेकऑफ के कुछ ही मिनट बाद प्‍लेन के एक टायर में आग लग गई. आग धीरे-धीरे पूरे प्‍लेन में फैलने लगी. पायलट ने प्‍लेन को वापस एयरपोर्ट लाने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. प्‍लेन क्रैश हो गया और उसमें सवार सभी 261 लोगों की मौत हो गई. जांच में पता चला कि टायर का प्रेशर कम होने की वजह से उसमें आग लगी थी.
1983: पहाड़ से टकरा कर क्रैश हुआ प्‍लेन, कोई नहीं बचा11 जुलाई 1983 को इक्वाडोर की टैमी एयरलाइन की फ्लाइट 173 अपने तय रूट पर उड़ान भर रही थी. उड़ान के दौरान खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण प्‍लेन सही रास्ते से भटक गया. कुछ ही देर बाद प्‍लेन एक पहाड़ से टकरा गया. टक्कर इतनी भीषण थी कि प्‍लेन पूरी तरह तबाह हो गया. इस हादसे में प्‍लेन में सवार सभी 119 लोगों की मौत हो गई. जांच के बाद नेविगेशन सिस्‍टम और मौसम को क्रैश की वजह बताया गया.
1978: गैस टैंकर फटने से 215 लोगों की गई जान11 जुलाई 1978 को स्पेन के अल्कानार इलाके में एक रोड टैंकर 23 टन प्रोपलीन गैस लेकर जा रहा था. रास्ते में एक कैंपिंग साइट के पास पहुंचते ही टैंकर में जोरदार विस्फोट हो गया. धमाका इतना भयानक था कि आग की लपटों ने पूरे कैंप को अपनी चपेट में ले लिया. इस हादसे में 215 लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से झुलस गए. इसके बाद यूरोप में खतरनाक केमिकल और गैस के ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े सुरक्षा नियमों को बेहद सख्‍त कर दिया गया.
1973: पेरिस के पास प्‍लेन में आग लगने से गई 122 लोगों की मौत11 जुलाई 1973 को ब्राजील की एक पैसेंजर फ्लाइट पेरिस के पास हादसे का शिकार हो गई. उड़ान के दौरान प्‍लेन में अचानक आग लग गई. पायलट ने इमरजेंसी लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन प्‍लेन सेफ लैंडिंग नहीं कर सका. इस हादसे में 122 लोगों की मौत हो गई. जांच में सामने आया कि आग और धुएं ने कुछ ही मिनटों में पूरे प्‍लेन को अपनी चपेट में ले लिया था.
1927: भूकंप की तबाही से गई सैकड़ों लोगों की जान11 जुलाई 1927 को मैंडेटरी फ़िलिस्तीन और ट्रांसजॉर्डन में करीब 7.5 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया. तेज झटकों से कई शहरों और गांवों की इमारतें गिर गईं. इस प्राकृतिक आपदा में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और हजारों लोग बेघर हो गए. आज के इजराइल, फिलिस्‍तीन और जॉर्डन के कई हिस्सों में भारी नुकसान हुआ था. राहत और बचाव के सीमित संसाधनों के कारण हालात लंबे समय तक सामान्य नहीं हो सके थे.
1979: पहाड़ से टकराया गरुड़ इंडोनेशिया का प्‍लेन11 जुलाई 1979 को गरुड़ इंडोनेशिया एयरवेज का फोककर F-28 प्‍लेन मेडन के पास उड़ान भर रहा था. खराब मौसम और कम दृश्यता के बीच प्‍लेन एक पहाड़ से टकरा गया. हादसा इतना भीषण था कि प्‍लेन में सवार सभी 61 लोगों की मौत हो गई. जांच में खराब मौसम को इस दुर्घटना की सबसे बड़ी वजह माना गया. इसके बाद इंडोनेशिया में उड़ान सुरक्षा नियमों की नए सिरे से समीक्षा की गई.
1879: भूकंप के बाद उठीं समुद्र की ऊंची लहरें11 जुलाई 1879 को मिस्र में आए भूकंप के बाद स्वेज की खाड़ी से तेज लहरें उठने लगीं. इन लहरों ने तूर गांव को अपनी चपेट में ले लिया. समुद्री का पानी गांव में घुस गया, जिससे कई घर और नावें बह गईं. उस समय सुनामी की चेतावनी देने जैसी कोई व्यवस्था नहीं थी. इसलिए लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिल पाया था.
1973: वारिग फ्लाइट 820 की आग में 123 यात्रियों की मौत11 जुलाई 1973 को ब्राजील की एयरलाइन वारिग की फ्लाइट 820 पेरिस के पास हादसे का शिकार हो गई. प्‍लेन के केबिन में आग लग गई थी. पायलट ने इमरजेंसी लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. इस प्‍लेन क्रैश में 134 लोगों में से 123 की जान चली गई थी. ज्यादातर यात्रियों की जान जहरीले धुएं और आग में झुलसने की वजह से हुई थी. इस हादसे के बाद फ्लाइट में फायर सेफ्टी के लिए सख्त नियम बनाए गए थे.
1946: कार्गो एरिया में आग लगने के बाद प्‍लेन हुआ क्रैश11 जुलाई 1946 को टीडब्ल्यूए की फ्लाइट 513 अमेरिका के पेंसिल्वेनिया के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई. यह एक लॉकहीड L-049 कॉन्स्टेलेशन प्‍लेन था. जांच के बाद पता चला कि उड़ान के दौरान प्‍लेन के कार्गो वाले हिस्से में आग लग गई थी. कार्गो में फायर सेंसर नहीं होने की वजह से पायलट को आग के बारे में नहीं पता चला. इस हादसे में सात में से छह फ्लाइट क्रू मेंबर्स की मौत हो गई थी.
1943: अपनी ही सेना ने अपने प्‍लेन मार गिराए11 जुलाई 1943 को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मित्र देशों की सेना सिसिली पर ‘ऑपरेशन हस्की’ चला रही थी. इसी दौरान, एयर डिफेंस सिस्‍टम अपने ही एयरक्राफ्टस को नहीं पहचान सके और 23 मिलिट्री जेट्स पर फायरिंग कर दी. इस ‘फ्रेंडली फायर’ घटना में 83 एयरमैन की मौत हो गई.

11 जुलाई के हादसों की लंबी है फेहरिस्‍त: पायलट की जिद्द, टॉयलेट में सिगरेट और एयर होस्‍टेस… जब एक झटके में खाक हुईं प्‍लेन में सवार 618 जिंदगियां

11 जुलाई का है महज संयोग या फिर पीछे है कोई बड़ा कारण

अतीत के पन्‍ने उलटे तो अलग-अलग सालों में एक दर्जन से अधिक बड़े हासदे हुए हैं. इन हादसों में हजारों की संख्‍या में मासूमों की जान गई है. यह कहना तो मुश्किल है कि 11 जुलाई को साल दर साल हो रहे हादसों के पीछे महज कोई संयोग है या फिर इस खूनी तारीख के पीछे कोई दूसरी बड़ी वजह है. फिलहाल, सभी का ध्‍यान वियतनाम में हादसे से बचे भारतीय टूरिस्‍ट को सही इलाज मुहैया कराने में है. साथ ही, जान गवाने वाले भारतीय पर्यटकों का शव यथाशीघ्र अपनों के बीच लाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं.

About the AuthorAnoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें

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