Calf Care Tips In Monsoon | HOW TO proctect Calf in monsoon |

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Calf Care Tips: मानसून में गाय के बछड़ों की देखभाल कैसे करें? अपनाएं ये टिप्स
Last Updated:July 04, 2026, 06:25 IST
Cow Calf Care Tips in Monsoon: भीलवाड़ा में पशुपालन विभाग के अनुसार मानसून में नवजात बछड़ों को संक्रमण, दस्त और निमोनिया से बचाने के लिए पशुपालकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. जन्म के तुरंत बाद बछड़े को मां का पहला दूध (खीस) जरूर पिलाएं. बछड़ों को कीचड़ से दूर साफ व सूखी जगह पर रखें. बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और समय पर टीकाकरण कराएं. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए डॉक्टर की सलाह पर गुड़-हल्दी का सेवन करा सकते हैं.
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भीलवाड़ा. मानसून का मौसम जहां एक तरफ किसानों और पशुपालकों के लिए चिलचिलाती गर्मी से बड़ी राहत लेकर आता है, वहीं दूसरी तरफ यह मौसम गाय के नवजात बछड़ों के लिए कई तरह की बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़ा देता है. लगातार हवा में नमी, चारों तरफ कीचड़ और गंदगी के कारण नवजात बछड़ों में संक्रमण (Infection), दस्त (Diarrhea), निमोनिया और तेज बुखार जैसी समस्याएं बहुत जल्दी हो सकती हैं. यदि समय रहते उनकी सही देखभाल नहीं की जाए तो उनकी जान पर भी बड़ा खतरा बन सकता है. इसलिए पशुपालकों को इस मौसम में बछड़ों की विशेष देखभाल करने की सख्त जरूरत होती है.
पशुपालन विभाग के डॉक्टर अरुण कुमार सिंह ने बताया कि जन्म के तुरंत बाद बछड़े को मां का पहला गाढ़ा दूध यानी ‘खीस’ जरूर पिलाना चाहिए. खीस में प्रचुर मात्रा में ऐसे पोषक तत्व और रोग प्रतिरोधक (Immunity) तत्व होते हैं, जो बछड़े की रोगों से लड़ने की आंतरिक क्षमता को बढ़ाते हैं. जन्म के पहले दो से तीन घंटे के भीतर खीस पिलाना सबसे अधिक लाभदायक माना जाता है. इससे बछड़ा अंदर से मजबूत बनता है और उसमें किसी भी प्रकार के संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है.
रहने के स्थान पर साफ-सफाई और सूखापन रखेंमानसून के इस मौसम में बछड़ों को हमेशा सूखी, साफ और पूरी तरह से हवादार जगह पर ही रखना चाहिए. जहां पानी जमा हो रहा हो या कीचड़ हो, वहां उन्हें भूलकर भी बिल्कुल नहीं बांधना चाहिए. बछड़ों के बैठने के स्थान यानी बिछावन के लिए हमेशा सूखा भूसा या पुआल इस्तेमाल करें और उसे नियमित रूप से बदलते रहें. अगर बछड़ा अचानक बारिश में भीग जाए तो उसे तुरंत किसी सूखे कपड़े से अच्छी तरह पोंछकर गर्म और सुरक्षित स्थान पर रखें. सिर्फ साफ-सफाई रखने से ही कई गंभीर संक्रामक बीमारियों से बचाव किया जा सकता है.
संतुलित आहार और पशु चिकित्सक की सलाह है आवश्यकपशुपालकों को बछड़ों के खान-पान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए. उन्हें हमेशा साफ और ताजा पानी ही उपलब्ध कराएं तथा उनकी उम्र के अनुसार संतुलित आहार दें. यदि बछड़े में दस्त, सुस्ती, तेज बुखार, खांसी या अचानक दूध पीना बंद करने जैसे कोई भी असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो बिना किसी देरी के तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें. समय पर उचित इलाज मिलने से बछड़े की जान बचाई जा सकती है और बड़े आर्थिक नुकसान से भी बचा जा सकता है.
कृमिनाशक दवा, टीकाकरण और देसी उपायबछड़ों को समय पर आवश्यक टीकाकरण (Vaccination) और कृमिनाशक (Deworming) दवा दिलाना बेहद जरूरी है. इसके अलावा कुछ आसान देसी उपाय भी बछड़ों को स्वस्थ रखने में मददगार हो सकते हैं. पशुपालक चाहें तो पशु चिकित्सक की उचित सलाह से हल्दी और गुड़ का सीमित मात्रा में उपयोग कर सकते हैं, जिससे बछड़ों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर बनी रहती है. हालांकि, किसी भी घरेलू नुस्खे को मुख्य इलाज का विकल्प बिल्कुल नहीं मानना चाहिए. नियमित देखभाल, साफ-सफाई, पौष्टिक आहार और समय पर चिकित्सा ही बछड़ों को मानसून के मौसम में पूरी तरह स्वस्थ रखने का सबसे प्रभावी तरीका है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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