खुद बोल नहीं सकते, लेकिन बेजुबानों की आवाज बने फरसाराम, 12 साल से कर रहे वन्यजीवों की सेवा

Last Updated:August 09, 2026, 12:21 IST
Deaf Mute Wildlife Saver: जोधपुर के बुधनगर गांव के रहने वाले मूक-बधिर फरसाराम पिछले 12 सालों से घायल वन्यजीवों के लिए मसीहा बने हुए हैं. सिलाई का काम करने वाले फरसाराम अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बेजुबानों के इलाज पर खर्च करते हैं. उन्होंने अपने घर को ही अस्थायी रेस्क्यू सेंटर बना रखा है. व्हाट्सएप नेटवर्क और अपनी टीम के जरिए वे जोधपुर और पाली क्षेत्र में सैकड़ों जानवरों की जान बचा चुके हैं. उन्होंने अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए राष्ट्रपति को पत्र लिखकर प्रशासनिक गलियारों तक अपनी आवाज भी बुलंद की है.
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Jodhpur News: कहते हैं कि इंसानियत और संवेदनाओं को बयां करने के लिए शब्दों या भाषा की जरूरत नहीं होती. इस बात को राजस्थान में जोधपुर के पास स्थित बुधनगर गांव के रहने वाले फरसाराम ने पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है. फरसाराम जन्म से ही बोलने और सुनने में असमर्थ हैं. शारीरिक रूप से मूक-बधिर होने के बावजूद उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. वे मूक और असहाय वन्यजीवों की तकलीफ को सबसे गहराई से महसूस करते हैं. अपनी मेहनत और सिलाई की कमाई के एक बड़े हिस्से से उन्होंने अपने ही घर को एक अस्थायी रेस्क्यू सेंटर में बदल दिया है. पिछले 12 वर्षों के लंबे सफर में वे सैकड़ों घायल जानवरों की जान बचा चुके हैं. इतना ही नहीं, जब अरावली पर्वतमाला के अस्तित्व पर संकट आया, तो इस पर्यावरण प्रेमी ने सीधे देश के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर प्रशासनिक गलियारों तक अपनी बुलंद आवाज पहुंचाई.
फरसाराम अपनी आजीविका चलाने के लिए सिलाई का काम करते हैं. बचपन में गांव के सरकारी स्कूल से वे केवल 7वीं कक्षा तक ही पढ़ाई कर सके थे, क्योंकि आगे का अध्ययन जारी रखने के लिए वहां कोई विशेष शिक्षक (स्पेशल एजुकेटर) मौजूद नहीं था. पढ़ाई छूटने के बाद उन्होंने वन्यजीवों की सेवा को ही अपने जीवन का मुख्य ध्येय बना लिया. सिलाई से होने वाली अपनी सीमित आय का एक बड़ा हिस्सा वे बेजुबान जानवरों की दवाओं और प्राथमिक उपचार पर खर्च करते हैं, जबकि बाकी बचे पैसों से अपने परिवार का जीवन-यापन करते हैं. उनके घर पर बना यह अस्थायी रेस्क्यू सेंटर घायल वन्यजीवों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जहां इलाज के बाद स्वस्थ होने पर जीवों को वन विभाग को सौंप दिया जाता है.
स्मार्ट तकनीक और दोस्तों की टीम से बनाया मजबूत नेटवर्क
आस-पास के जंगलों, गांवों और ढाणियों से घायल या बीमार वन्यजीवों की समय पर सूचना पाने के लिए फरसाराम ने तकनीक का सहारा लिया है. उन्होंने एक व्हाट्सएप ग्रुप तैयार किया है, जिसके माध्यम से ग्रामीणों से संदेश मिलते ही वे तुरंत हरकत में आ जाते हैं. फरसाराम अपने दोस्तों विनोद (जो स्वयं भी मूक-बधिर हैं), अनिल, मनीष विश्नोई, अजय विश्नोई, सुनील विश्नोई और मनीष के साथ बाइक से तुरंत मौके पर पहुंच जाते हैं. मोबाइल मैसेज के जरिए आपस में संवाद करने वाली यह समर्पित टीम जोधपुर से लेकर पाली जिले के रोहट क्षेत्र तक वन्यजीवों के रेस्क्यू के लिए हमेशा तैयार रहती है.
हालिया घटनाएं और अरावली संरक्षण के लिए राष्ट्रपति को पत्र
हाल ही में उमेदनगर में कुत्तों के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए एक खरगोश को फरसाराम और उनकी टीम ने अपनी तत्परता से बचाया. जब वन विभाग की रेस्क्यू गाड़ी आने में देरी हो रही थी, तो उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर दबाव बनाकर गाड़ी बुलवाई और प्राथमिक उपचार के बाद खरगोश को सुरक्षित वन विभाग को सौंपा. इसके अलावा, फरसाराम केवल जमीनी रेस्क्यू तक सीमित नहीं हैं. अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए उन्होंने भारत के राष्ट्रपति को एक भावुक पत्र लिखा. इसमें उन्होंने अरावली को उत्तर भारत की प्राकृतिक ढाल और आने वाली पीढ़ियों का जीवन आधार बताते हुए इसके पूर्ण संरक्षण की मांग उठाई.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Pali,Pali,Rajasthan
First Published :
August 09, 2026, 12:21 IST



