CAZRI Saltwater Farming Technology: खारा पानी बना कमाई का जरिया, रोहट के किसान अब उगाएंगे ड्रैगन फ्रूट और बेर

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खारा पानी बना कमाई का जरिया, रोहट के किसान अब उगाएंगे ड्रैगन फ्रूट और बेर
Last Updated:August 20, 2026, 10:29 IST
CAZRI Saltwater Farming: पाली जिले के रोहट में काजरी के वैज्ञानिकों ने खारे पानी में खेती करने का सफल मॉडल विकसित किया है. ड्रिप इरिगेशन और विशेष पोषण प्रबंधन की मदद से अब खारे पानी और बंजर जमीन पर उन्नत किस्म के बेर और ड्रैगन फ्रूट उगाए जा रहे हैं. वैज्ञानिक डॉ. कमला चौधरी और डॉ. विजय सिंह के अनुसार इस तकनीक से लवणता का असर कम होता है और किसानों की आय दोगुनी से तीन गुनी हो सकती है. काजरी क्षेत्र के किसानों को इसके लिए विशेष ट्रेनिंग भी दे रहा है.
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Pali Agriculture News: राजस्थान के पाली जिले के रोहट क्षेत्र के उन किसानों के लिए बेहद राहत भरी और बड़ी खबर है, जो सालों से सिंचाई के लिए खारे पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे. केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जो खारे पानी में भी सोना उगाने का काम करेगी. जिस पानी और जमीन को अब तक खेती के लिहाज से अनुपयोगी मान लिया गया था, वहां अब उन्नत किस्म के बेर और ड्रैगन फ्रूट की खेती लहलहाएगी. काजरी की यह तकनीक रोहट के किसानों की तकदीर बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है.
काजरी की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कमला चौधरी ने इस नई तकनीक और इसके पीछे के विज्ञान को स्पष्ट करते हुए बताया कि खारे पानी के उपयोग में सबसे बड़ी बाधा मिट्टी में लवण (सेलिनाइटी) का जमना होता है. जब खारे पानी को सामान्य तरीके से खेतों में बहाया जाता है, तो पानी वाष्पित होकर उड़ जाता है और जमीन पर नमक की मोटी परत जमा हो जाती है, जो पौधों को सुखा देती है. इस समस्या का तोड़ काजरी ने ‘ड्रिप इरिगेशन’ यानी बूंद-बूंद सिंचाई प्रणाली के रूप में निकाला है.
बूंद-बूंद सिंचाई और विशेष पोषण प्रबंधन से मिलेगी सफलता
डॉ. कमला चौधरी के अनुसार ड्रिप तकनीक के माध्यम से पानी सीधे पौधे की जड़ों तक पहुंचता है, जिससे मिट्टी में लवणता का असर बहुत कम हो जाता है. इसके साथ ही प्रति पौधा केवल 50 ग्राम का विशेष पोषण प्रबंधन देकर पौधों को विपरीत परिस्थितियों में भी तेजी से पनपने के योग्य बनाया जाता है. इस आधुनिक तकनीक के तहत रोहट क्षेत्र में उन्नत किस्म के बेर और ड्रैगन फ्रूट के पौधों को सफलतापूर्वक रोपा गया है.
फसल विविधीकरण से किसानों की आय होगी दोगुनी से तीन गुनी
काजरी के वैज्ञानिक डॉ. विजय सिंह ने बताया कि पाली और रोहट के इलाकों में खारे पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखकर कई फलदार पौधों पर गहन शोध किए गए. इन प्रयोगों में ड्रैगन फ्रूट का परिणाम सबसे बेहतरीन और उत्साहजनक रहा है. डॉ. विजय सिंह का कहना है कि पारंपरिक खेती की तुलना में यदि किसान फसल विविधीकरण (क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन) अपनाएं, तो उनकी आय सीधे दोगुनी से तीन गुनी तक हो सकती है. ड्रैगन फ्रूट एक हाई-वैल्यू फ्रूट है जिसकी बाजार में जबरदस्त मांग है और यह कम पानी तथा खारेपन को सहने में बेहद सक्षम है.
काजरी में दी जा रही किसानों को विशेष ट्रेनिंग
काजरी पाली केंद्र केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिकों की टीम किसानों के मन से ‘खारे पानी के डर’ को निकालने के लिए जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण अभियान चला रही है. किसानों को काजरी के प्रदर्शन खेतों में लाकर यह दिखाया जा रहा है कि वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर खारे पानी में भी बंपर पैदावार ली जा सकती है. रोहट के जो किसान कल तक अपनी जमीन को बेकार मानकर हताश थे, आज वे काजरी के वैज्ञानिकों से ट्रेनिंग लेकर ड्रैगन फ्रूट और बेर के बाग लगाने की तैयारी में जुट गए हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Pali,Pali,Rajasthan
First Published :
August 20, 2026, 10:29 IST



