सदियों पुरानी जल धरोहरों को मिलेगा नया जीवन! करोड़ों की लागत से बदलेगी तालाबों की तस्वीर, बढ़ेगा पर्यटन

Last Updated:June 23, 2026, 12:21 IST
Nagaur Hindi News: नागौर शहर की ऐतिहासिक जल धरोहरों को संरक्षित और विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. करीब 10.23 करोड़ रुपये की लागत से गिनाणी, समस और दुलैया तालाबों का कायाकल्प किया जाएगा. इस परियोजना का उद्देश्य इन ऐतिहासिक जलाशयों की मूल पहचान को बनाए रखते हुए उनका सौंदर्यीकरण और संरक्षण करना है. योजना के तहत तालाबों के आसपास बुनियादी सुविधाओं का विकास, जल संरक्षण से जुड़े कार्य और पर्यावरणीय सुधार किए जाएंगे. इससे न केवल शहर की सुंदरता बढ़ेगी बल्कि स्थानीय लोगों और पर्यटकों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी. इन तालाबों का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व लंबे समय से नागौर की पहचान का हिस्सा रहा है. परियोजना पूरी होने के बाद ये स्थल पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन के महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं.
नागौर शहर के गिनाणी, समस और दुलैया तालाबों को पुनर्जीवित करने की दिशा में नगर परिषद ने बड़ा कदम उठाया है. परिषद ने इन तीनों तालाबों के संरक्षण और सौंदर्याकरण के लिए 10.23 करोड़ रुपए की विस्तृत किए हैं. इस परियोजना को लेकर डीपीआर रिपोर्ट अमृत 2.0 योजना के तहत स्वीकृति के लिए रूड्सिको जयपुर भेज दी है. इसे मंजूरी मिलने के बाद लंबे समय से उपेक्षित इन तीनों जलाशयों के विकास कार्य शुरू किए जाएंगे.
परियोजना के तहत सबसे पहले तालाबों की भूमि को सुरक्षित किया जाएगा. तीनों तालाबों के कैचमेंट एरिया में बढ़ते अतिक्रमण और अवैध कब्जों को रोकने के लिए मजबूत बाउंड्री वॉल का निर्माण प्रस्तावित है. इससे तालाबों की मूल सीमाएं सुरक्षित रहेंगी और भविष्य में भूमि पर होने वाले अतिक्रमण पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी. नगर परिषद का मानना है कि जल संरक्षण के लिए तालाबों की सुरक्षा सबसे बड़ा कदम है.
तालाबों के आसपास बड़े स्तर पर सौंदर्याकरण कार्य भी किए जाएंगे. योजना के अनुसार परिसर में हरियाली बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे तथा सुंदर पार्क और लॉन विकसित किए जाएंगे. इससे न केवल तालाबों की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि शहरवासियों को स्वच्छ और आकर्षक सार्वजनिक स्थल भी उपलब्ध होंगे. पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह क्षेत्र लोगों के लिए मनोरंजन और विश्राम का केंद्र भी बन सकेगा.
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शहरवासियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तालाबों के किनारे वॉक-वे और पाथवे का निर्माण किया जाएगा. इससे नागरिक सुबह और शाम सैर का आनंद ले सकेंगे. इसके अलावा पूरे परिसर में आधुनिक लाइटिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिसमें हाईमास्ट लाइट, पोल लाइट और डेकोरेटिव लाइटें शामिल होंगी. इससे रात के समय भी यह क्षेत्र सुरक्षित और आकर्षक बना रहेगा.
आपको बता दें कि वर्तमान में तीनों तालाब अपनी बदहाल स्थिति के कारण कई समस्याओं से जूझ रहे हैं. इनके भराव क्षेत्रों पर वर्षों से अतिक्रमण बढ़ता गया है और कई स्थानों पर अवैध निर्माण भी हो चुके हैं. इसके कारण तालाबों की जल संग्रहण क्षमता प्रभावित हुई है. साथ ही शहर का गंदा पानी और सीवरेज भी इनमें पहुंच रहा है, जिससे जल गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है.
पिछले वर्ष हुई भारी बारिश के दौरान इन तालाबों के ओवरफ्लो होने से आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई थी. जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने के कारण कई बस्तियों में पानी भर गया था और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था. ऐसे में तालाबों के संरक्षण और उचित प्रबंधन से भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से काफी हद तक बचा जा सकता है.
डीपीआर के अनुसार समस तालाब के विकास पर 382 लाख रुपए, दुलैया तालाब पर 344.34 लाख रुपए तथा गिनाणी तालाब पर 297 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे. नगर परिषद आयुक्त गोविंद सिंह भींचर ने बताया कि कलेक्टर की समीक्षा बैठक में मिले निर्देशों के बाद यह प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है. स्वीकृति और बजट मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू कर कार्यों को जल्द धरातल पर उतारा जाएगा, जिससे नागौर के इन ऐतिहासिक तालाबों को नया स्वरूप मिल सकेगा.
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