Chittorgarh News: बस्सी की काष्ठ कला पहुंची विदेश तक, अमेरिका के दल ने किया शोध, बनाई डॉक्यूमेंट्री फिल्म

Last Updated:July 08, 2026, 13:07 IST
चित्तौड़गढ़ के बस्सी क्षेत्र की सदियों पुरानी काष्ठ कला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है. यहां की प्रसिद्ध कावड़ कला पर अमेरिका के शोध दल ने पांच दिनों तक अध्ययन किया और कलाकारों की पारंपरिक तकनीकों को समझते हुए डॉक्यूमेंट्री फिल्म तैयार की. मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के सहयोग से हुए इस शोध ने बस्सी की लोक कला और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच प्रदान किया है.
चित्तौड़गढ़. जिले के बस्सी क्षेत्र की प्रसिद्ध काष्ठ कला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है. यहां तैयार होने वाली पारंपरिक कावड़, लकड़ी के खिलौने और अन्य कलात्मक वस्तुएं देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर के कला प्रेमियों को आकर्षित कर रही हैं. इसी समृद्ध कला परंपरा को जानने, समझने और गहन अध्ययन करने के उद्देश्य से अमेरिका का एक शोध दल बस्सी पहुंचा और पांच दिनों तक यहां रहकर काष्ठ कला पर शोध किया. अमेरिका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के सेन्ट्रल फॉर इंटिग्रेटिव स्टडीज इन सोशल साइंस द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘कल्चरल स्टडीज विद परपज’ के तहत बस्सी की काष्ठ कला पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म तैयार की गई. इस फिल्म में बस्सी की पारंपरिक कावड़ निर्माण कला, कलाकारों की मेहनत, उनकी तकनीक और इस कला से जुड़े सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं को दर्शाया गया है. डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन उदयपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया.
इस अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक पहल में भारतीय शिल्प संस्थान के साथ समर्थ एक्सचेंज प्रोग्राम का आयोजन किया. कार्यक्रम के माध्यम से अमेरिका और भारत के विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं, सामाजिक जीवन और विभिन्न कलाओं का अध्ययन किया. विद्यार्थियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर कलाकारों से बातचीत की और पारंपरिक शिल्प की बारीकियों को समझने का प्रयास किया. बस्सी की प्रसिद्ध कावड़ कला पर अमेरिका के शोधार्थी टेलर क्विलनिनल विशेष अध्ययन कर रहे हैं. उन्होंने बस्सी में पांच दिनों तक रहकर कावड़ निर्माण की पूरी प्रक्रिया को करीब से देखा. इस दौरान उन्होंने लकड़ी को आकार देने, उस पर बारीक नक्काशी करने और रंगों से चित्रकारी करने की पारंपरिक विधियों को समझा.
टेलर ने स्थानीय कलाकारों के साथ समय बिताकर इस कला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, तकनीकी पहलुओं और वर्तमान चुनौतियों की जानकारी जुटाई. उन्होंने कलाकारों के काम को कैमरे में भी रिकॉर्ड किया ताकि इस अनूठी कला पर आधारित डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से इसे वैश्विक मंच तक पहुंचाया जा सके. बस्सी की काष्ठ कला सदियों से चली आ रही लोक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है. अंतरराष्ट्रीय शोध और डॉक्यूमेंट्री निर्माण से इस कला को नई पहचान मिलने की उम्मीद है. स्थानीय कलाकारों का मानना है कि ऐसे प्रयासों से आने वाली पीढ़ियों को इस विरासत को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलेगी और बस्सी की कावड़ कला विश्व स्तर पर और अधिक प्रसिद्ध होगी.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
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Chittaurgarh,Chittaurgarh,Rajasthan



